Diljit Dosanjh Film Removed From ZEE5 | ACTPnews

तीन दिन पहले फिल्म रिलीज हुई थी।


दिलजीत की फिल्म OTT प्लेटफॉर्म से हटाई गई। इस पर उन्होंने कहा-एक इंसानियत होती है, वह इंसानियत मर गई।

पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फिल्म को अचानक OTT प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। खालड़ा ने आतंकवाद के दौर में पंजाब में फेक एनकाउंटर में 25 हजार युवाओं को मारने का दावा किया था। यह फिल्म 3 साल की रोक के

.

फिल्म हटाने के बाद दिलजीत दोसांझ ने कहा- एक इंसानियत होती है, वह इंसानियत मर गई। मुझे इस बात का दुख नहीं है कि फिल्म इंटरनेट से हटा दी गई, क्योंकि फिल्म लोगों तक पहुंच चुकी है। एक बार जो चीज इंटरनेट पर आ गई, उसे हटाना आसान नहीं है। इनके सलाहकार ठीक नहीं हैं। इस फिल्म के साथ वही हुआ, जो खालड़ा जी के साथ हुआ था।

उन्होंने उन लोगों से फिल्म को दूसरों के साथ शेयर करने की अपील की, जिन्होंने इसे पहले ही डाउनलोड कर लिया था। फिल्म हटाने पर पंजाबी कलाकारों ने गुस्सा जताया है।

OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 के बयान में सिर्फ इतना कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अगले आदेश तक ‘सतलुज’ प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं रहेगी। कंपनी ने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी उचित विकल्प तलाश रही है, ताकि फिल्म को जल्द से जल्द फिर से दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके।

स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म ने लोगों से पायरेटेड कॉपीज न देखने या शेयर न करने की अपील की है। हालांकि दिलजीत दोसांझ ने फैंस के कमेंट देख कहा कि जिसने डाउनलोड कर ली, वह दूसरे से शेयर करे। इसे पायरेसी को बढ़ावा देने की बात माना जा रहा है।

तीन दिन पहले फिल्म रिलीज हुई थी।

फिल्म में दिखाया, पुलिस की क्रूरता से आतंकवाद का रास्ता दिलजीत की इस फिल्म में पूर्व CM बेअंत सिंह की बम ब्लास्ट में हत्या का सीन भी दिखाया गया है। फिल्म की कहानी के लिए इस सीन को एक टर्निंग पॉइंट के रूप में दिखाया गया है कि इसके बाद पुलिस की क्रूरता शुरू हुई। फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि कैसे पुलिस की क्रूरता और निर्दोष लोगों पर बढ़ते अत्याचारों के कारण एक आम आदमी अंदर से टूट जाता है और आतंकवाद या इस तरह के कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाता है। इसमें तत्कालीन DGP केपीएल गिल को IPS बिट्‌टा के तौर पर दिखाया गया है।

फिल्म में दिखाया गया है 31 अगस्त 1995 को तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की हत्या होती है और इस घटना के ठीक एक हफ्ते बाद यानी 6 सितंबर 1995 को जसवंत सिंह खालड़ा का भी अपहरण कर लिया जाता है। मुख्यमंत्री की मौत के बाद जब राजनीतिक माहौल बदला, तो पुलिस को डर था कि खालड़ा उनके इस 25 हजार अवैध दाह-संस्कार के काले राज को दुनिया के सामने न ले आएं, इसलिए वे खालड़ा का अपहरण करने का कदम उठाते हैं।

फिल्म में तत्कालीन CM बेअंत सिंह की हत्या का सीन भी दिखाया गया है। जिसमें पुलिस कर्मी ने मानव बम बनकर उनकी कार को उड़ा दिया था।

फिल्म में तत्कालीन CM बेअंत सिंह की हत्या का सीन भी दिखाया गया है। जिसमें पुलिस कर्मी ने मानव बम बनकर उनकी कार को उड़ा दिया था।

सरकारी सोर्स- खालिस्तान समर्थक आंदोलन के पक्ष में माहौल बन सकता है केंद्र सरकार से जुड़े सोर्सेज के मुताबिक फिल्म के कुछ हिस्सों का भारत विरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग किए जाने की आशंका है। सूत्रों के मुताबिक, चिंता है कि फिल्म के कुछ दृश्य और सामग्री का इस्तेमाल खालिस्तान समर्थक आंदोलन के पक्ष में माहौल बनाने के लिए किया जा सकता है, खासकर पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले ऐसा हो सकता है। सरकार का मानना है कि “ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे सबसे ऊपर होते हैं। यह राजनीति का विषय नहीं है।

फिल्म में दिलजीत को जसवंत खालड़ा की भूमिका में विदेशों में फर्जी मुठभेड़ में पंजाबी युवकों के कत्ल का मुद्दा उठाते दिखाया गया है।

फिल्म में दिलजीत को जसवंत खालड़ा की भूमिका में विदेशों में फर्जी मुठभेड़ में पंजाबी युवकों के कत्ल का मुद्दा उठाते दिखाया गया है।

25 हजार अवैध कत्ल, किडनैप कर मर्डर, जिन जसवंत खालड़ा पर फिल्म, उनकी कहानी जानिए

  • सहकारी बैंक में काम करते थे, अवैध कत्लों की जांच शुरू की: 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में पंजाब आतंकवाद और उग्रवाद से जूझ रहा था। आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ों, हिरासत में हत्याओं और लापता लोगों के मामलों के आरोप लगने लगे। इन्हीं आरोपों की सच्चाई जानने के लिए अमृतसर के सहकारी बैंक से जुड़े जसवंत सिंह खालड़ा ने दस्तावेजी जांच शुरू की।
  • श्मशान घाट, निगम के रिकॉर्ड खंगाले, 25 हजार की अवैध हत्या का दावा: खालड़ा ने अमृतसर, तरनतारन और आसपास के श्मशान घाटों के रिकॉर्ड, नगर निगम के दस्तावेज और अंतिम संस्कार रजिस्टर खंगाले। उनकी जांच में सामने आया कि बड़ी संख्या में ‘लावारिस’ बताकर शवों का अंतिम संस्कार किया गया, जबकि कई शव कथित रूप से उन लोगों के थे जो पुलिस हिरासत के बाद लापता हो गए थे। उन्होंने दावा किया कि पूरे पंजाब में करीब 25,000 लोगों की अवैध हत्या और गुप्त अंतिम संस्कार किए गए।
  • इंटरनेशनल लेवल तक मुद्दा उठाया: जसवंत खालड़ा ने अपनी जांच के दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए। इसके बाद उन्होंने खुद ही देश के साथ-साथ विदेशों में भी मानवाधिकार संगठनों के सामने यह मुद्दा उठाया। उनके खुलासों के बाद मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), CBI और कोर्ट तक पहुंचा।
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत खालड़ा ने विदेशों में जाकर भी इस मुद्दे को इंटरनेशनल लेवल पर उठाया था।

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत खालड़ा ने विदेशों में जाकर भी इस मुद्दे को इंटरनेशनल लेवल पर उठाया था।

  • CBI ने 2097 की पुष्टि की: इसके बाद CBI ने इस मामले की जांच की। मगर, उन्होंने खालड़ा के पूरे दावे की पुष्टि नहीं की। जांच एजेंसी ने केवल तरनतारन जिले में 2,097 अवैध अंतिम संस्कार होने की पुष्टि की। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने फैसलों में CBI के इस जांच के आंकड़ों का हवाला दिया।
  • खालड़ा का अपहरण हुआ: 6 सितंबर 1995 की सुबह जसवंत सिंह खालड़ा अपने अमृतसर स्थित घर के बाहर थे। परिवार ने दावा किया कि पंजाब पुलिस उन्हें जबरन उठाकर ले गई। इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। पुलिस लंबे समय तक उन्हें हिरासत में लेने से इनकार करती रही।
  • CBI जांच में अवैध पुलिस हिरासत का खुलासा हुआ: मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। इसके बाद खालड़ा के किडनैप होने और मौत को लेकर CBI जांच के आदेश दिए गए। जब CBI ने जांच की तो इसमें पाया कि खालड़ा को पुलिस ने अवैध हिरासत में रखा था। CBI ने कई पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अपहरण और हत्या का मामला दर्ज किया। साल 1996 में CBI ने 9 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या और अपहरण का केस चलाने की सिफारिश की।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पुलिस अत्याचार कानून पर हमला: यह मामला पहले ट्रायल कोर्ट में चला। जहां साल 2005 में 6 पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया गया। इनमें DSP जसपाल सिंह और ASI अमरजीत सिंह को उम्रकैद हुई। इसके अलावा SI सतनाम सिंह, SI सुरिंदर पाल सिंह, SI जसबीर सिंह और हेड कॉन्स्टेबल पृथीपाल सिंह को 7-7 साल की कैद हुई। साल 2007 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चार अन्य दोषियों की सजा भी बढ़ाकर उम्रकैद कर दी। वहीं SI अमरजीत सिंह को बरी कर दिया। साल 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने 5 दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अत्याचार कानून के शासन पर सीधा हमला हैं।
  • केपीएस गिल पर केस नहीं चला: इस मामले में पंजाब में आतंकवाद खत्म करने को लेकर सुर्खियों में आए तत्कालीन पुलिस प्रमुख केपीएस गिल का भी नाम आया था। CBI ने कहा था कि जांच के दौरान एक गवाह कुलदीप सिंह ने गिल की भूमिका का जिक्र किया। CBI ने उस बयान के आधार पर अलग से जांच की, लेकिन आगे की जांच में ऐसे सबूत नहीं मिले जो आरोपों की पुष्टि कर सकें। इसलिए चार्जशीट में उन्हें आरोपी नहीं बनाया गया। बाद में जसवंत खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में गिल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, लेकिन CBI ने कोर्ट में जवाब दिया कि अतिरिक्त जांच में भी गिल के खिलाफ केस के लायक सबूत नहीं मिले। साथ ही यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट को भी ऐसा कोई आधार नहीं मिला कि गिल को आरोपी के रूप में तलब किया जाए।

पहले फिल्म के बारे में जानिए…

  • मानवाधिकार कार्यकर्ता पर आधारित, 2022 में बननी शुरू हुई: मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के नाम पर 2022 में फिल्म बनाने की घोषणा की। फिल्म का शुरुआती नाम ‘घल्लूघारा’ रखा गया था, जिसका अर्थ ‘नरसंहार’ होता है। फिल्म की शूटिंग पंजाब के विभिन्न हिस्सों, खासकर अमृतसर में पूरी हुई। अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा की भूमिका निभाने के लिए अपने लुक और शारीरिक बनावट में बदलाव किया।
  • सेंसर बोर्ड ने नाम बदलवाया: साल 2023 में फिल्म बनकर तैयार हो गई। इसके बाद इसे सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास मंजूरी के लिए भेजा गया, तो बोर्ड ने फिल्म के टाइटल पर आपत्ति जताई और कई बदलाव तथा कट्स सुझाए। इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर ‘पंजाब 95’ रखा गया।
  • 127 कट लगाने को भी कहा: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBFC ने फिल्म में 127 कट्स और कई बदलाव सुझाए। इनमें कुछ ऐतिहासिक संदर्भों, स्थानों और पात्रों के नामों में बदलाव की मांग भी शामिल थी। हालांकि, CBFC ने सार्वजनिक रूप से इन सभी प्रस्तावित बदलावों का विस्तृत आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया। भारत में सेंसर बोर्ड की मंजूरी नहीं मिलने के कारण फिल्म भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी।
  • विदेशों में रिलीज नहीं हो सकी: इसके बाद 7 फरवरी 2025 को इसे चुनिंदा देशों में रिलीज किया गया। इसके बाद साल 2023 में फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहां इसकी कहानी और दिलजीत दोसांझ के अभिनय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।
  • सिर्फ OTT पर रिलीज करने की छूट मिली: इसके बाद इसे OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज करने की छूट मिली। उसमें किसी तरह के कट नहीं लगाए गए थे। 2 दिन के भीतर पंजाब में इस फिल्म को खूब देखा गया। जिसके बाद अचानक OTT प्लेटफॉर्म से फिल्म हट गई। इसके बारे में सिर्फ इतना कहा गया कि अगले आदेश तक फिल्म हटा दी गई है।
फिल्म में दिखाया गया है कि जसवंत खालड़ा का रोल कर रहे दिलजीत दोसांझ फर्जी मुठभेड़ में मारे गए युवकों के बारे में सिख बुद्धिजीवियों को जानकारी दे रहे हैं।

फिल्म में दिखाया गया है कि जसवंत खालड़ा का रोल कर रहे दिलजीत दोसांझ फर्जी मुठभेड़ में मारे गए युवकों के बारे में सिख बुद्धिजीवियों को जानकारी दे रहे हैं।

अब पढ़िए, फिल्म हटाने पर दिलजीत दोसांझ ने क्या कहा…

  • इंसानियत होती है, जो मर गई: फिल्म को हटाए जाने पर दिलजीत ने कहा कि मैं लोगों के मुंह की तरफ देखता हूं। एक इंसानियत होती है, लेकिन वह इंसानियत मर गई। कमाल है। फिल्म इंटरनेट से हट गई, इसलिए मैं उदास नहीं हूं। फिल्म तो लोगों तक पहुंच ही गई। अब वह कहीं नहीं जाने वाली। एक प्यार, इत्तेफाक और इंसानियत होती है, लेकिन लोगों का रवैया कमाल का है। बस इसी बात का थोड़ा दुख है।
  • मुझे पहले पता था ऐसा होना है: दिलजीत ने कहा- मुझे पहले से ही पता था कि ऐसा होना है। मैंने सोचा था कि अगर फिल्म दो-तीन दिन भी चल जाए तो हमारा काम हो जाएगा। इंटरनेट पर एक बार कोई चीज आ जाए, तो उसे पूरी तरह हटाना आसान नहीं होता। इनके सलाहकार ठीक नहीं हैं।
  • प्रोजेक्ट आया था, जो बैन हो गया, यूरोप टूर पर जाएंगे: एक प्रशंसक ने जब दिलजीत से उनके अपकमिंग प्रोजेक्ट के बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया- एक प्रोजेक्ट आया था, जो अब बैन हो गया है। इसके बाद अब हम यूरोप टूर पर जाएंगे। पहला शो बर्लिन में होगा।

अकाली सांसद बोली- फिल्म हटाई, लेकिन काला दौर नहीं छिपा सकते सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि शहीद भाई जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ को भारत में हटाया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसा करके पंजाब के उस काले दौर को नहीं छिपाया जा सकता, जब कांग्रेस सरकार ने हमारे नौजवानों को उनके घरों से उठाकर मार दिया था। भाई खालड़ा ने उन अज्ञात शवों के वारिस बनकर सरकार से सवाल किए और इसके लिए शहादत दी। मैं इस फैसले की कड़ी निंदा करती हूं और मांग करती हूं कि फिल्म पर लगाई गई पाबंदी हटाई जाए।

आप सांसद बोले- इतिहास का ईमानदारी से सामना किया जाए आम आदमी पार्टी के लोकसभा सांसद मालविंदर कंग ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाला है। जब कोई देश अपने ही इतिहास से डरने लगे, तो सेंसरशिप उसका सबसे खतरनाक हथियार बन जाती है। ‘सतलुज’ को रोककर भाजपा ने अपना असली चेहरा उजागर कर दिया है।

यह पंजाब की सच्चाई को लेकर उसकी असहजता और पंजाब के प्रति उसके लगातार पूर्वाग्रह का एक और उदाहरण है। मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि ‘सतलुज’ को बिना किसी देरी के दोबारा उपलब्ध कराया जाए। इतिहास का ईमानदारी से सामना किया जाना चाहिए, न कि उसे चुप्पी और सेंसरशिप के जरिए दबाया जाना चाहिए।

——————-

ये खबर भी पढ़ें…

दिलजीत दोसांझ का खुलासा-कभी दुनिया छोड़ना चाहता था: सोशल मीडिया पर लाइव आए; कहा-मां के प्यार ने बदल दिया फैसला

मशहूर पंजाबी सिंगर और ग्लोबल स्टार दिलजीत दोसांझ हमेशा अपने खुशमिजाज और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। लेकिन हाल ही में उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर लाइव आकर एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसने उनके लाखों फैंस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। (पढ़ें पूरी खबर)



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed