Bangladesh Trump Buffalo Slaughter Banned | ACTPnews

Bangladesh Trump Buffalo Slaughter Banned


34 मिनट पहले

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ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारत इस दशक में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है और यह पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए एक बड़ा अवसर है। कैनबरा में संसद को संबोधित करते हुए अल्बनीज ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया सिर्फ प्रशांत महासागर का देश नहीं, बल्कि हिंद महासागर का भी देश है। इसलिए भारत के साथ रिश्ते ऑस्ट्रेलिया के लिए बेहद अहम हैं। उन्होंने 2022 में हुए आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते का भी जिक्र किया और कहा कि इससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते मजबूत हुए हैं। शिक्षा, संस्कृति और क्रिकेट ने भी दोनों देशों को और करीब लाया है। अल्बनीज ने बताया कि वह पहली बार 1991 में बैकपैकर के तौर पर भारत गए थे और अब तक प्रधानमंत्री बनने के बाद दो बार भारत का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत को सही तरीके से समझना हो तो बस या ट्रेन से यात्रा करनी चाहिए। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा कि वह जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी करने को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि यह दूसरी बार होगा जब वह मोदी की मेजबानी करेंगे। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया के मुताबिक मोदी जुलाई की शुरुआत में वहां का दौरा कर सकते हैं। मोदी आखिरी बार मई 2023 में ऑस्ट्रेलिया गए थे।

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दावा- यूक्रेन युद्ध में रूस के करीब 5 लाख सैनिक मारे गए; अब तक यूक्रेन के 55,000 सैनिकों की मौत

ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी GCHQ ने दावा किया कि रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तक करीब 5 लाख रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं। इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा था कि युद्ध में यूक्रेन के 55 हजार सैनिक मारे गए हैं।

वहीं BBC और स्वतंत्र शोधकर्ताओं ने अब तक 2.23 लाख से ज्यादा रूसी सैनिकों की मौत की पुष्टि की है।

GCHQ प्रमुख ऐनी कीस्ट-बटलर ने अपने पहले सार्वजनिक भाषण में यह आंकड़ा बताया। उन्होंने कहा कि रूस ब्रिटेन और NATO देशों के खिलाफ जासूसी, साइबर हमले और तोड़फोड़ की गतिविधियां चला रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि रूस महत्वपूर्ण ढांचे, सप्लाई चेन और लोकतांत्रिक संस्थाओं को निशाना बना रहा है। हालांकि रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने इन आरोपों से इनकार किया है।

पीएम मोदी अगले महीने फ्रांस और स्लोवाकिया दौरे पर जाएंगे, G7 समिट में हिस्सा लेंगे

पीएम मोदी अगले महीने फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वह फ्रांस में होने वाले जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और दोनों देशों के नेताओं के साथ अहम बैठकें करेंगे।

फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियां-ले-बैंस में 15 से 17 जून तक 52वां जी7 सम्मेलन आयोजित होगा। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को विशेष साझेदार देश के नेता के रूप में आमंत्रित किया है। भारत को 2019 से लगातार जी7 बैठकों में बुलाया जा रहा है और इसकी शुरुआत भी फ्रांस ने ही की थी।

जी7 सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई, व्यापार तनाव, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा और यूक्रेन व पश्चिम एशिया के संघर्ष जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी शामिल होंगे। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी और ट्रम्प के बीच कोई द्विपक्षीय बैठक होगी या नहीं। फरवरी 2025 के बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई है, हालांकि फोन पर कई बार बातचीत हो चुकी है।

मोदी फ्रांस दौरे के बाद स्लोवाकिया भी जाएंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली आधिकारिक यात्रा होगी। भारत और स्लोवाकिया के बीच 1993 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे।

फरवरी में स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी भारत आए थे और उन्होंने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लिया था। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री मोदी से भी मुलाकात हुई थी।

भारत और स्लोवाकिया के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और हाल ही में यह 1.3 अरब यूरो से ज्यादा पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

स्लोवाकिया को यूरोप का डेट्रॉइट भी कहा जाता है, क्योंकि वहां हर साल करीब 10 लाख कारें बनती हैं। वहां फॉक्सवैगन, किया, स्टेलेंटिस और जगुआर लैंड रोवर जैसी बड़ी कंपनियों की फैक्ट्रियां हैं।

बांग्लादेश में ट्रम्प नाम के भैंसे की कुर्बानी पर रोक, नेशनल जू भेजा गया

बांग्लादेश में डोनाल्ड ट्रम्प नाम से मशहूर सफेद भैंसे की ईद पर कुर्बानी पर रोक लगा दी गई। इस भैंसे की सबसे खास बात उसके सिर पर मौजूद सुनहरे बालों का गुच्छा है, जो काफी हद तक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हेयरस्टाइल जैसा दिखता है। इसी वजह से लोगों ने मजाक-मजाक में उसका नाम डोनाल्ड ट्रम्प रख दिया था।

करीब 700 किलो वजन वाला यह भैंसा सोशल मीडिया पर अचानक बहुत मशहूर हो गया। इसकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। लोग दूर-दूर से सिर्फ इस अनोखे भैंसे को देखने के लिए फार्म पर पहुंचने लगे। बच्चे, परिवार और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स उसके साथ फोटो और वीडियो बनाने लगे। पूरी खबर यहां पढ़ें

तुर्किये में विपक्षी पार्टी के प्रमुख पद से बर्खास्त, अब पार्टी में लीडरशिप की लड़ाई; समर्थक सड़क पर उतरे

तुर्किये की मुख्य विपक्षी पार्टी CHP में नेतृत्व को लेकर बड़ा टकराव सामने आया है। कोर्ट ने CHP के पार्टी प्रमुख ओजगुर ओजेल को पद से हटा दिया है। इसके बाद पार्टी के दो प्रमुख नेता ओजगुर ओजेल और कमाल किलिचदारोग्लू में तनाव गहरा गया।

इसके बाद ओजेल ने इजमिर में समर्थकों के साथ विरोध प्रदर्शन रैली निकाली और नई पार्टी बनाने की खबरों को खारिज कर दिया। उन्होंने नेताओं से पार्टी न छोड़ने की अपील की। वहीं प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लेकिन समर्थक घंटों तक डटे रहे।

दरअसल, तुर्किये की कोर्ट ने CHP के 2023 के नेतृत्व चुनाव को रद्द कर दिया। इसी चुनाव में ओजगुर ओजेल पार्टी अध्यक्ष बने थे। कोर्ट के फैसले के बाद उनके विरोधी और पूर्व अध्यक्ष कमाल किलिचदारोग्लू को अंतरिम जिम्मेदारी दे दी गई।

अब ओजेल चाहते हैं कि CHP के 20 लाख सदस्य नया अध्यक्ष चुनें, जबकि किलिचदारोग्लू का कहना है कि पार्टी कांग्रेस और डेलिगेट्स के जरिए ही चुनाव होना चाहिए।

CHP समर्थकों का आरोप है कि राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन की सरकार विपक्ष को कमजोर करने के लिए कानूनी दबाव बना रही है। विपक्ष इस कार्यवाई को लोकतंत्र पर हमला बता रहा है। हालांकि सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।

राजनीतिक एकस्पर्ट्स का मानना है कि CHP का आंतरिक संकट राष्ट्रपति एर्दोआन के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। 2024 के स्थानीय चुनावों में CHP की जीत से एर्दोआन सरकार पर दबाव बढ़ा था।

तुर्किये के कानून के मुताबिक राष्ट्रपति दो लगातार कार्यकाल ही पूरे कर सकते हैं, लेकिन अगर समय से पहले चुनाव होते हैं तो एर्दोआन फिर से चुनाव लड़ सकते हैं।

पूर्व चीनी पुलिस अधिकारी 30 घंटे में समुद्र के रास्ते भागकर दक्षिण कोरिया पहुंचे

पूर्व पुलिस अधिकारी और चीनी सरकार के आलोचक डोंग ग्वांगपिंग 30 घंटे तक समुद्र में सफर करने के बाद दक्षिण कोरिया पहुंच गए। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक 68 वर्षीय डोंग छोटी फुलाई जाने वाली बोट से चीन के शानदोंग प्रांत के वेइहाई शहर से निकले थे।

सोमवार शाम दक्षिण कोरिया के ताएन काउंटी के पास मछुआरों ने उनकी बोट को समुद्र में बहते देखा। इसके बाद दक्षिण कोरियाई कोस्ट गार्ड ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला।

डोंग चीन में सरकारी आलोचना और मानवाधिकार गतिविधियों के कारण कई बार जेल जा चुके हैं। उनके समर्थकों के मुताबिक यह चीन से भागने की उनकी चौथी कोशिश थी। वे अपनी पत्नी और बेटी से दोबारा मिलना चाहते हैं, जिन्हें कनाडा में शरण मिल चुकी है।

चीनी-कनाडाई एक्टिविस्ट शेंग शुए ने बताया कि डोंग 30 घंटे से ज्यादा समय तक समुद्र में रहे। दक्षिण कोरिया पहुंचने से पहले उनकी बोट का इंजन खराब हो गया था। उन्होंने कहा कि डोंग दो दिन तक बिना सोए रहे।

डोंग पहले चीन के हेनान प्रांत के झेंगझोउ में पुलिस अधिकारी थे। 1989 के तियानआनमेन स्क्वायर कार्रवाई की बरसी से जुड़े एक पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था। इसके बाद वे सरकार के आलोचक बन गए।

2014 में तियानआनमेन पीड़ितों की याद में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने पर उन्हें हिरासत में लिया गया। 2015 में वे पत्नी और बेटी के साथ थाईलैंड भाग गए थे और संयुक्त राष्ट्र के जरिए शरण मांग रहे थे। बाद में उनका परिवार कनाडा चला गया, लेकिन थाईलैंड ने डोंग को वापस चीन भेज दिया। इसके बाद उन्हें साढ़े तीन साल की जेल हुई।

2019 में जेल से रिहा होने के बाद डोंग ने कई बार चीन छोड़ने की कोशिश की। उन्होंने ताइवान नियंत्रित किनमेन द्वीप तक तैरकर पहुंचने की कोशिश की थी। बाद में वे अवैध रूप से वियतनाम पहुंचे, लेकिन वहां से गिरफ्तार कर दोबारा चीन भेज दिए गए। इसके बाद उन्हें अवैध सीमा पार करने के आरोप में 11 महीने की जेल हुई थी।

मानवाधिकार संगठनों ने दक्षिण कोरिया से अपील की है कि डोंग को वापस चीन न भेजा जाए। उनका कहना है कि यह मामला चीन में असंतुष्टों की स्थिति को दिखाता है, जहां एक 68 वर्षीय व्यक्ति को स्वतंत्रता और परिवार से मिलने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ी।

सीरिया से लौटी ऑस्ट्रेलियाई महिला पर IS से जुड़ने का आरोप

सीरिया से पिछले साल ऑस्ट्रेलिया लौटी एक 34 वर्षीय महिला पर इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़ने और प्रतिबंधित संघर्ष क्षेत्र में प्रवेश करने का आरोप लगाया गया है। ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस के मुताबिक महिला को गुरुवार को मेलबर्न कोर्ट में पेश किया जाएगा।

पुलिस की असिस्टेंट कमिश्नर हिल्डा सिरेक ने बताया कि महिला पर आतंकवादी संगठन की सदस्यता और घोषित संघर्ष क्षेत्र में प्रवेश करने के आरोप लगाए गए हैं। दोनों अपराधों में अधिकतम 10-10 साल की जेल हो सकती है।

स्थानीय मीडिया के मुताबिक आरोपी महिला की पहचान रेयान एल हौली के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार वह 2013 या 2014 में सीरिया गई थी। 2019 में उसे कुर्द बलों ने हिरासत में लिया था, जिसके बाद उसे सीरिया के अल-होल कैंप में रखा गया।

इस महीने दो समूहों में महिलाएं और बच्चे ऑस्ट्रेलिया पहुंचे थे। ये लोग उत्तर-पूर्वी सीरिया के अल-रोज कैंप में रह रहे थे, जहां 2019 से IS लड़ाकों के परिवारों को रखा गया था।

मंगलवार को सिडनी और मेलबर्न पहुंचे समूह को अल-रोज कैंप में बचे आखिरी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों में माना जा रहा है।

सिरेक ने कहा कि हाल में सीरिया से लौटी सभी वयस्क महिलाओं की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी पर अभी आरोप नहीं लगने का मतलब यह नहीं कि जांच खत्म हो चुकी है।

महीने की शुरुआत में मेलबर्न पहुंची कावसर अहमद और उसकी बेटी जैनब अहमद पर गुलामी और गुलाम रखने के आरोप लगाए गए हैं। कावसर अहमद पर गुलामों की खरीद-फरोख्त का भी आरोप है।

वहीं सिडनी पहुंची जनाई सफार पर घोषित संघर्ष क्षेत्र में प्रवेश करने और IS से जुड़ने का केस दर्ज किया गया है।

सीरिया से लौटी महिलाओं और बच्चों का मुद्दा ऑस्ट्रेलिया में राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। सरकार का कहना है कि उसने उनकी वापसी में कोई मदद नहीं की। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा था, “अगर आपने अपना बिस्तर खुद बनाया है, तो उसी पर सोना होगा।”

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