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BSF Rescues Bangladeshi Nationals in Murshidabad


कोलाकात6 मिनट पहले

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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास BSF ने गंगा में डूब रहे 10 बांग्लादेशियों को बचाया। इनमें 30 दिन का एक बच्चा और तीन महिलाएं शामिल थीं।

यह घटना शनिवार शाम खंडुआ बॉर्डर पोस्ट के पास हुई। 71वीं बटालियन के जवानों ने परेशानी में फंसे लोगों को देखा और स्पीडबोट से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। बंगाल के इस इलाके में मानसून के वक्त गंगा कई इलाकों में 100 फीट तक गहरी हो जाती है।

अधिकारियों के मुताबिक, सभी लोग बांग्लादेश के चपाई नवाबगंज से जोहरपुर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नाव अचानक पलट गई और वे नदी में गिरकर भारतीय सीमा की ओर बहने लगे।

नदी के रास्ते अवैध क्रॉसिंग जानलेवा

बारिश के दिनों में गंगा नदी का बहाव बहुत तेज हो जाता है, जिससे टूटी-फूटी नावें तुरंत पलट सकती हैं।

यहां नदी के रास्ते में कोई तारबंदी नहीं होती, इसलिए लोग दिशा भटक जाते हैं। साथ ही, तेज बहाव और रात के अंधेरे में किसी हादसे के वक्त मदद पहुंचना भी बहुत मुश्किल होता है।

जवानों ने स्पीडबोट से मदद की

बचाए गए बांग्लादेशियों ने बताया कि वे जोहरपुर गांव के रहने वाले हैं। BSF ने स्पीडबोट की मदद से उनके पास पहुंचकर सभी को बाहर निकाला।

BSF जवानों ने सभी को प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद उन्हें सरकारी अस्पताल ले जाया गया। हालत स्थिर होने के बाद BSF ने सभी बांग्लादेशियों को बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के अधिकारियों को सौंप दिया।

भारत और बांग्लादेश के बीच CBMP

भारत और बांग्लादेश के सीमा सुरक्षा बलों के बीच एक साझा समझौता है, जिसे समन्वित सीमा प्रबंधन योजना (CBMP) कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सीमा पर घुसपैठ, मानव तस्करी और हथियारों व नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना और आपसी तालमेल से शांति बनाए रखना है।

इसके तहत दोनों बल संवेदनशील इलाकों में मिलकर गश्त करते हैं और किसी भी आपात स्थिति या मानवीय संकट में एक-दूसरे की मदद करते हैं।

खासकर मानसून के दौरान यह चौकसी बेहद जरूरी हो जाती है, क्योंकि गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच जाता है और तेज बहाव के कारण छोटी व टूटी-फूटी नावें पलक झपकते ही पलट जाती हैं।

नदी वाले इलाकों में तारबंदी करना नामुमकिन होता है, जिससे भटकने का खतरा बना रहता है और रात के अंधेरे व तेज उफान में बचाव दल का समय पर पहुंचना भी बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

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