वॉशिंगटन डीसी/तेहरान6 घंटे पहले
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अमेरिका ईरान पर दोबारा हमले कर सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के 7 दिन में जंग रोकने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रम्प ने अपने सहयोगियों से कहा है कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर से बमबारी शुरू करनी चाहिए।
ईरान ने गुरुवार को जंग रोकने के लिए 7 दिन का एक प्लान पेश किया था। इसके तहत संघर्ष रोकने, सातवें दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात कही गई थी।

ईरान के प्रस्ताव को ठुकराने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को सोशल मीडिया पर यह मैप शेयर किया।
पजशकियान बोले- अमेरिका जिस दिन मानेगा, उसी दिन बातचीत शुरू होगी
ट्रम्प द्वारा प्रस्ताव को ठुकरा देने के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान का बयान भी सामने आया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो उसी दिन दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
पजशकियान ने न्यूयॉर्क से तेहरान रवाना होने से पहले अमेरिकी न्यूज चैनल CBS से बातचीत में कहा कि दोनों देशों के बीच अभी भरोसे की कमी है।

UN हेडक्वाटर में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान। तस्वीर 25 सितंबर की है।
अराघची ने मध्यस्थों के जरिए प्रस्ताव दिया था
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पत्रकारों से कहा था कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका जंग रोकने का प्रस्ताव दिया है। उनके मुताबिक अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से पहले समझौता हो जाए तो यह बेहतर होगा।
अब्बास अराघची ने बताया था कि यह योजना जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के जैसी ही है।
ट्रम्प ने UN में ईरान को धमकी दी थी
22 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण के दौरान ट्रम्प ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उनके सामने दो रास्ते हैं- ईरान के साथ ऐसा समझौता करना, जिससे वह दोबारा मजबूत हो सके, या इस्लामिक रिपब्लिक को खत्म कर देना।
ट्रम्प ने साथ ही कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि चुनाव के बाद ईरान के साथ कोई समझौता हो सकता है।

पजशकियान ने ट्रम्प पर लगाया समझौता तोड़ने का आरोप
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में जून में हुए समझौते के अमल में न आने के लिए ट्रम्प को जिम्मेदार बताया था।
पजशकियान ने कहा था कि दोनों देशों के बीच समझौता हुआ था और ईरान आगे बातचीत के लिए भी तैयार था। उन्होंने दावा किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ईरान ने बंद नहीं किया था, लेकिन इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने बातचीत के बजाय सैन्य कार्रवाई का रास्ता चुना। पजशकियान ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान के सर्वोच्च नेता, वैज्ञानिकों, सैन्य कमांडरों और सरकारी अधिकारियों की हत्या की गई।

पजशकियान ने UN में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की भी तस्वीर दिखाई थी।
ईरान की मांग- अमेरिकी सैन्य कार्रवाई खत्म हो
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल से मुलाकात के दौरान अराघची ने कहा था कि ईरान ने अमेरिका के सामने बातचीत आगे बढ़ाने के लिए अपनी शर्तें रख दी हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा बहाल करने के लिए ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई खत्म होनी चाहिए।
अराघची ने यह भी कहा कि ईरान अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, बातचीत के बीच अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की जंग
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है।
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