Election Commission New Rules | Agenda Disclosure & IT System Review | ACTPnews

चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू वविवेक जोशी की बैठक की तस्वीर जारी की। - Dainik Bhaskar


नई दिल्ली28 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को CEC ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू वविवेक जोशी की बैठक की तस्वीर जारी की।

चुनाव आयोग ने शनिवार को बैठक के बाद अपने कामकाज से जुड़े कई नियमों में बदलाव किए है। आयोग की बैठक में 9 फैसले लिए गए। इनमें वोटरों की सुनवाई, IT सिस्टम, अधिकारियों की विदेश यात्रा और आयोग की बैठकों की प्रक्रिया से जुड़े बदलाव शामिल हैं।

अंदरूनी मतभेद के दावों के बीच आयोग की बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, दोनों निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे। आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसले सर्वसम्मत से हुए थे।

आयोग का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई।

आयोग का दावा- संधू-जोशी ने प्रतिनियुक्त अधिकारी के आदेश पर आपत्ति जताई थी

आयोग ने शनिवार को प्रेस रीलिज जारी कर बताया कि संधू और जोशी की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी से जुड़े थे। इंडियन एक्सप्रेस का दावा था कि संधू और जोशी ने उस आदेश पर आपत्ति जताई थी, जिससे मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और रिकॉर्ड अपडेट करने की शक्ति केंद्रीय स्तर पर सिमटने की आशंका थी।

आयोग ने कहा कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य-पुनर्वितरण आदेश कभी लागू ही नहीं हुए। आयोग ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को दिए गए सभी निर्देशों का सावधानी से पालन होगा। ईसीआईनेट की जांच के लिए एक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी, जिसमें आईआईटी/आईआईआईटी का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ होगा।

फॉर्म-6 को लेकर भी आयोग ने दी सफाई

SIR में नाम नहीं आया तो आवेदन कर सकेंगे

आयोग के मुताबिक, SIR में जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, वे लगातार वोटर लिस्ट अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत संबंधित ERO के पास नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसमें युवा और पहली बार वोट देने वाले लोग भी शामिल हैं। आयोग ने CEO, DEO और ERO को ऐसे लोगों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

SIR के दौरान अब तक 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13.37 करोड़ नाम कम हुए हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक देश में कुल 96.88 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं, यानी करीब 14.1% वोटर्स के नाम SIR में काटे गए।

इन सवालों पर अभी स्थिति साफ नहीं

नए फैसलों के बावजूद ऑनलाइन फॉर्म-6 में माता-पिता से जुड़ा सवाल क्यों जोड़ा गया, यह स्पष्ट नहीं किया गया है। यह भी नहीं बताया गया कि इसे किसने जोड़ा और क्या अब इसे हटाया गया है।

पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से जुड़े करीब 16 लाख नामों के खिलाफ अपील किसके आदेश पर दाखिल हुई, इस सवाल का भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है।

इसके अलावा, गोवा में मतदाता का नाम बहाल करने वाला सॉफ्टवेयर फीचर क्यों शुरू नहीं हुआ और IT विभाग के कुछ अधिकारियों को लेकर उठे सवालों पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी भी नए फैसलों में नहीं है।

———————————

यह खबर भी पढ़ें…

रिपोर्ट- SIR पर 2 चुनाव आयुक्तों ने 14 बार आपत्ति जताई:आयोग बोला- यह सामान्य प्रक्रिया; राहुल ने कहा- वोट चोरी में शामिल, तो नहीं बख्शेंगे

चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद का विवाद 23 सितंबर को प्रकाशित द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आरोप लगाया कि कई फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए। दोनों ने 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई। इनमें 16 अप्रैल को चार आपत्तियां शामिल थीं। इनकी प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और संबंधित काम की निगरानी करने वाले कुछ उप चुनाव आयुक्तों को भी भेजी गई थीं। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *