GDP के आंकड़ों से ‘वोट चोरी’ तक… क्या यूपी चुनाव के लिए अभी से राहुल गांधी का ‘नैरेटिव’ शुरू? Coffee Par Kurukshetra में देखें पूरी चर्चा | ACTPnews

GDP के आंकड़ों से ‘वोट चोरी' तक... क्या यूपी चुनाव के लिए अभी से राहुल गांधी का 'नैरेटिव' शुरू? Coffee Par Kurukshetra में देखें पूरी चर्चा


‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’ में इस बार चर्चा का केंद्र भारत की अर्थव्यवस्था और GDP के आंकड़े रहे। कार्यक्रम में GDP की 7.8 प्रतिशत ग्रोथ को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर विस्तार से चर्चा हुई। बातचीत में पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के उस दावे का जिक्र किया गया, जिसमें मौजूदा तिमाही की वास्तविक GDP ग्रोथ 2.6 प्रतिशत बताए जाने और महंगाई को समायोजित करने के बाद ग्रोथ शून्य रहने की बात कही गई। इस दौरान कार्यक्रम में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा के साथ गेस्ट के रूप में वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय, राजनीतिक विश्लेषक अमिताभ तिवारी और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर मौजूद रहे।

मेहमानों ने GDP की गणना के लिए बेस ईयर बदलने के मुद्दे को भी समझाया। चर्चा में बताया गया कि पहले GDP की गणना 2011-12 के बेस पर होती थी, जिसे अब 2022-23 के बेस पर किया गया है। बेस बदलने के साथ पुराने आंकड़ों को भी संशोधित किया जाता है। इसी को लेकर यह तर्क सामने आया कि पिछले साल की ग्रोथ कम होने से इस साल का उछाल ज्यादा दिखाई दे रहा है।

सुभाष चंद्र गर्ग के पुराने कार्यकाल और दावों पर भी चर्चा

कार्यक्रम में सुभाष चंद्र गर्ग के प्रशासनिक करियर का भी जिक्र हुआ। बताया गया कि वह राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी रहे और राजस्थान में करीब तीन दशक तक काम किया। केंद्र सरकार में कृषि सहित अलग-अलग मंत्रालयों में काम करने के बाद वह विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक भी रहे। इसके बाद वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में उनकी भूमिका रही।

चर्चा के दौरान उनके और तत्कालीन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच मतभेदों का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, मेहमानों ने उनके अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को स्वीकार करते हुए उनके आर्थिक दावों पर सवाल उठाए।

‘आंकड़ों की जादूगरी’ पर मेहमानों में तकरार

GDP के आंकड़ों को लेकर कार्यक्रम में यह सवाल भी उठा कि क्या पुराने आंकड़ों को जानबूझकर कम करके मौजूदा ग्रोथ को ज्यादा दिखाया गया। इसके जवाब में कहा गया कि GDP सीरीज बदलने का फैसला फरवरी 2026 में हुआ था और यह प्रक्रिया पहले से तय थी। इसलिए इसे बाद में आई परिस्थितियों से जोड़कर देखना उचित नहीं बताया गया।

चर्चा में ऑटोमोबाइल बिक्री और GST कलेक्शन जैसे दूसरे आर्थिक संकेतकों का भी उल्लेख हुआ। मेहमानों का तर्क था कि अर्थव्यवस्था का आकलन केवल एक आंकड़े से नहीं किया जाना चाहिए।

वोटर लिस्ट और ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर भी बहस

कार्यक्रम का दूसरा बड़ा मुद्दा वोटर लिस्ट और राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोप रहे। महाराष्ट्र में SIR के दौरान करीब दो करोड़ नामों के आंकड़े को लेकर चर्चा हुई। मेहमानों ने कहा कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए, मृतक हैं, डुप्लीकेट हैं या जिनका सत्यापन नहीं हो पाया।

चर्चा में यह भी कहा गया कि ड्राफ्ट रिपोर्ट अंतिम सूची नहीं है और लोगों को अपनी आपत्तियां दर्ज कराने तथा छूटे नामों को शामिल कराने का अवसर दिया जाता है।

मतदाता सूची में नाम जांचना नागरिक की भी जिम्मेदारी

मेहमानों ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी केवल चुनाव आयोग की नहीं है। राजनीतिक दलों और आम नागरिकों की भी इसमें भूमिका है। लोगों को खुद यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मतदाता सूची में उनका नाम मौजूद है और वह अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें।

कार्यक्रम में यह तर्क भी सामने आया कि हर गलती को चुनावी धांधली कहना सही नहीं है। व्यवस्था में कमियां हो सकती हैं और उन्हें सुधारने की प्रक्रिया भी हो सकती है।

राहुल गांधी की राजनीति और कांग्रेस के संगठन पर सवाल

चर्चा के दौरान राहुल गांधी की राजनीति और कांग्रेस की चुनावी स्थिति पर भी मेहमानों ने अपनी राय रखी। उनके अनुसार राहुल गांधी अलग-अलग समय पर EVM, वोटर लिस्ट और अन्य मुद्दों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। साथ ही यह दावा किया गया कि राहुल गांधी की व्यक्तिगत चर्चा भले बढ़ रही हो, लेकिन कांग्रेस का संगठन कई राज्यों में कमजोर हुआ है।

कार्यक्रम के अंत में चर्चा इसी सवाल पर पहुंची कि आने वाले समय में राहुल गांधी और कांग्रेस किन मुद्दों को आगे बढ़ाते हैं। मेहमानों ने कहा कि राजनीति में मुद्दे बदलते रहते हैं और अगले दिन का राजनीतिक विमर्श भी नए मुद्दे के साथ सामने आ सकता है।

डिटेल में पूरी चर्चा देखने के लिए सबसे ऊपर दिए गए वीडियो पर क्लिक करें।

(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)

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