जावेद अख्तर (मशहूर गीतकार और लेखक). मुंबई10 घंटे पहले
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जावेद अख्तर कहते हैं- दुनिया में 8 अरब ईगो और 8 अरब प्रयास हो रहे हैं। उसमें कभी आपको रास्ता मिल पाता है, तो कभी नहीं भी मिलता। – फाइल फोटो
जीवन संघर्ष यानी लाइफ स्ट्रगल को इस तरह से समझिए कि इस ग्रह पर लगभग 8 अरब लोग रहते हैं और हर इंसान की कोशिश एक अलग तरह की है। हर कोई जो चाह रहा है, वह बाकियों से जरा-सा अलग है। किसी को भी आप पूछिए तो उसकी अपनी महत्वाकांक्षा है। जो उसका सपना है, वह बाकियों से थोड़ा-सा अलग है।
इसका मतलब यह है कि एक मेला है, जिसमें 8 अरब लोग अलग-अलग दिशाओं में चल रहे हैं। ये 8 अरब लोग एक ही जगह पर हैं, लेकिन इनकी दिशा थोड़ी-सी अलग है।
इस घमासान में आपको रास्ता मिल जाए और आप जहां जाना चाहते हैं वहां तक पहुंच जाएं, ये कोई हंसी-खेल नहीं है, क्योंकि बाकी लोग भी चल रहे हैं लेकिन वे उस दिशा में नहीं जा रहे हैं जिधर आपको जाना है। वो कहीं और जा रहे हैं। हर आदमी कहीं और जा रहा है। जीवन के इस मेले में कभी-कभी ऐसा होगा कि आपको अपनी मर्जी का रास्ता मिल जाए।
जैसे कि दस-बारह आदमी उसी दिशा में जा रहे हों, जो आपकी भी दिशा है तो आप तेजी से इस घमासान से निकल जाएंगे। कहीं ऐसा होगा कि लोग दूसरी तरफ जा रहे होंगे तो आप नहीं निकल पाएंगे; आप फंस जाएंगे। समाज में लोगों की कोशिश और ईगो की वजह से ये नए-नए पैटर्न बन जाते हैं।
दुनिया में 8 अरब ईगो और 8 अरब प्रयास हो रहे हैं। उसमें कभी आपको रास्ता मिल पाता है, कभी नहीं भी मिलता, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि यदि आप प्रयास में लगे ही रहें, तो आपको रास्ता मिल ही जाएगा। हो सकता है कि रास्ता मिलने में थोड़ी देर लग जाए।
और अगर लोगों की इस भीड़ में आप पीछे छूट गए तो ये सिर्फ बदनसीबी ही होगी। जिंदगी में सफलता रास्ते में आने वाली चट्टानों से टकराती है और अपना रास्ता तलाश लेती है। मुश्किल वक्त में आपको यह तय करना पड़ता है कि आप टूटेंगे या अपने लिए कोई रास्ता निकालेंगे।
यही है लाइफ स्ट्रगल। जब आपको कोई रास्ता नहीं मिलता, तो अकसर लगता है कि शायद मेरा ही नसीब खराब है। आपको रास्ता नहीं मिल रहा होता है तब ऐसा महसूस होता है। जबकि किसी को फुर्सत नहीं है आपका नसीब खराब करने की।
हर कोई अपनी दिशा में, अपने रास्ते जा रहा है। आप बेवजह अपने को इम्पोर्टेंस दे रहे हैं और सोच रहे हैं कि दुनिया आपको तंग कर रही है। जबकि सच यह है कि दुनिया को परवाह ही नहीं है आपकी।
हो सकता है आप भी किसी के रास्ते की अड़चन बन रहे होंगे जो आपको पता नहीं है। आप सोचने लगें कि कोई ऊपर सातवें आसमान में एक बूढ़ा आदमी बैठा है, जिसकी लम्बी सफेद दाढ़ी है जो सबकुछ कमांड करता है। उससे अगर मैं मांगूं तो वह रास्ता बनवा देगा, लेकिन सवाल है कि किस-किस का रास्ता बनवाएगा वो? भौतिक रूप से ये संभव नहीं है।
एक ही चीज संभव है कि आप कोशिश करते रहिए कि आपको वो रास्ता मिले। जब आप प्रयास में लगे ही रहेंगे तो आप हमेशा फंसे थोड़ी ही रहेंगे। मिल ही जाएगा रास्ता। फिर थोड़ी दूर तक जल्दी-जल्दी निकल जाएंगे।
अगर फिर फंस जाएं तो फिर कोशिश कीजिएगा। यही है जिंदगी। जिंदगी इस मेले में ही रहने का नाम है। इस मेले में रास्ता ढूंढने का नाम है। इस मेले में हर आदमी जहां अलग-अलग दिशाओं में जा रहा है, वहां आप अपनी दिशा तय करें कि आप कहां जाना चाहते हैं और किसी भी तरह से, चाहे मर-खप के, अपना रास्ता बनाएं।
यही स्ट्रगल है और इसे ही हम लाइफ स्ट्रगल, जीवन संघर्ष कहते हैं। संघर्ष हमारी जिंदगी का कोई अलग हिस्सा नहीं है, बल्कि वह जिंदगी का ही हिस्सा है।
(संपादन और समन्वय- अरविंद मण्डलोई)














