5 घंटे पहले
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पोलिंग बूथ पर वोट डालने पहुंचे मतदाता- फाइल फोटो
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल समेत 124 पूर्व नौकरशाहों ने भारत की चुनावी प्रक्रिया के समर्थन में देश की जनता के नाम लेटर लिखा है।
पूर्व राजदूतों और रिटायर्ड IAS अधिकारियों ने लिखा, “हम यह पत्र इसलिए लिख रहे हैं, क्योंकि आजकल हमारे चुनावों के लिए बिना किसी सबूत के ‘धांधली’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस शब्द को बार-बार दोहराने से लोकतंत्र में लोगों का वह भरोसा कमजोर होता है।”
यह पत्र ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग और मतदाता सूची के SIR को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। विपक्ष के साथ कॉकरोच जनता पार्टी ने प्रदर्शन कर रही है। 8 अक्टूबर को ज्ञानेश कुमार के सपोर्ट में 42 पूर्व जजों ने लेटर लिखा था।

बूथ कैप्चरिंग से फर्जी वोटिंग तक का जिक्र
लेटर में पूर्व अधिकारियों ने चुनावों में गड़बड़ी के पुराने तरीकों का जिक्र किया। उन्होंने वह दौर देखा है, जब बूथ पर हथियार लेकर पहुंचना, बाहुबलियों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करना, फर्जी वोट डालना, बैलेट बॉक्स चुराना और लोगों को मतदान से रोकना जैसी घटनाएं होती थीं। पत्र में कहा गया कि बूथ कैप्चरिंग की समस्या इतनी व्यापक थी कि संसद ने 1989 में इसे अपराध घोषित किया।
सुप्रीम कोर्ट के जजों के बयान भी चर्चा में
- 4 अक्टूबर: जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा- वोटिंग से रोकने वाली प्रक्रिया मनमानी: सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज जस्टिस उज्जल भुइयां ने 4 अक्टूबर को NALSAR यूनिवर्सिटी में कहा था कि लाखों भारतीय नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मूल रूप से मनमानी है।

- 5 अक्टूबर- पूर्व CJI गवई बोले- विचाराधीन मामले पर बयान मर्यादा के खिलाफ: पूर्व जस्टिस गवई ने कहा कि किसी लंबित मामले पर सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज को सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। यह न्यायिक मर्यादा के खिलाफ है। दिल्ली हाईकोर्ट के दो रिटायर्ड जजों ने भी ऐसा बयान देने से पहले हजार बार सोचना चाहिए था।
- 8 अक्टूबर- पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज वी. गोपाला गौड़ा बोले- SIR पर फैसला वापस लिया जाए: पूर्व जज वी. गोपाला गौड़ा ने कहा- ‘SIR पर आया फैसला वापस लिया जाना चाहिए। यह गैरकानूनी, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। सुप्रीम कोर्ट को इलेक्शन कमीशन से सभी रिकॉर्ड मंगाने चाहिए। इससे पता चलेगा कि SIR का फैसला पूरे आयोग ने बहुमत वाले चुनाव आयुक्तों की सहमति और मंजूरी से लिया था या नहीं।’
2000 नागरिक SIR रोकने लेटर लिख चुके
इससे पहले सितंबर में 2,000 से ज्यादा नागरिकों ने एक ओपन लेटर में कोर्ट से SIR रोकने की अपील की थी। उन्होंने इसकी वैधता और प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच होने तक अभियान रोकने की मांग की थी।
CJI सूर्यकांत को लिखे लेटर में साइन करने वालों ने वोटर लिस्ट के मैनेजमेंट और ECINet प्लेटफॉर्म से जुड़ी गड़बड़ियों की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी।
लेटर पर दस्तखत करने वालों में पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत, पूर्व आईएएस अधिकारी अदिति मेहता, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, इतिहासकार आदित्य मुखर्जी और अभिनेता प्रकाश राज सहित शिक्षाविद, वकील, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।
SIR और चुनाव पैनल से जुड़ी याचिकाएं लंबित
SIR प्रक्रिया से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इसके अलावा चुनाव पैनल से जुड़े नए कानून की वैधता पर भी सुनवाई बाकी है। इस नए कानून में मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन पैनल से CJI को बाहर रखा गया है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर की सुनवाई में उन्हें निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से तो इनकार किया, लेकिन चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि अगर फैसले बिना सहमति के लिए पाए गए, तो उन्हें वापस लिया जा सकता है। पढ़ें पूरी खबर…
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ज्ञानेश कुमार के सपोर्ट में 42 पूर्व जजों का लेटर, SIR को सही बताया

चुनाव आयोग और SIR को लेकर जारी विवाद के बीच 42 पूर्व जजों ने CEC ज्ञानेश कुमार का समर्थन किया है। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं पर बिना सबूत आरोप लगाने से बचने की अपील की।
पूर्व जजों ने एक लेटर पर साइन किए हैं। इसमें कहा गया है कि शिकायतें लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से उठाई जानी चाहिए। उन्होंने SIR प्रक्रिया को भी सही बताया है। पूरी खबर पढ़ें














