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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी25 मिनट पहले
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ट्रम्प ने सोमवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात करते हुए लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने गुस्से में नेतन्याहू को ‘पागल’ कह दिया और उन पर एहसान न मानने का आरोप लगाया।
रिपोर्ट के अनुसार, लेबनान पर हमले के बाद ईरान ने सोमवार को चेतावनी दी थी कि अगर इजराइली कार्रवाई जारी रही तो वह अमेरिका के साथ चल रही बातचीत छोड़ सकता है। इससे नाराज ट्रम्प ने नेतन्याहू को फोन किया।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रम्प ने गुस्से में कहा-
तुम पागल हो गए हो क्या? आखिर तुम कर क्या रहे हो। मेरा एहसान मानो। अगर मैं नहीं होता तो तुम जेल में होते। मैं तुम्हें बचा रहा हूं। लेकिन अब हर कोई तुमसे नाराज है। हर कोई इजराइल से भी नाराज है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रम्प खास तौर पर इस बात से परेशान थे कि लेबनान में बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे जा रहे हैं और एक हिजबुल्लाह कमांडर को निशाना बनाने के लिए पूरी इमारतें गिराई जा रही हैं।

लेबनान के दक्षिणी शहर टायर में 1 जून को इजराइली हवाई हमले के बाद बचावकर्मी घटनास्थल पर काम करते हुए।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स…
1. कुवैत में अमेरिकी ठिकाने पर हमला: ईरान ने कुवैत में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाकर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं जिसे हवा में ही रोक लिया गया। ईरान ने कहा कि उसे जवाबी कार्रवाई का अधिकार है।
2. अमेरिका-ईरान की बातचीत फिर शुरू: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से पटरी पर लौटती दिख रही है। CNN के मुताबिक दोनों देशों के बीच संपर्क और बातचीत दोबारा आगे बढ़ रही है।
3. लेबनान पर हमले से ईरान नाराज: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ सीजफायर की शर्तों में लेबनान शामिल है। उस पर हमला पूरे समझौते का उल्लंघन माना जाएगा।
4. ईरान के द्वीपों पर अमेरिकी हमला: अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसने ईरान के गोरुक शहर और केश्म द्वीप पर आत्मरक्षा में हमले किए है। इसे पिछले हफ्ते केश्म द्वीप के ऊपर गिराए गए अमेरिकी एमक्यू-1 ड्रोन का जवाब बताया जा रहा है।
5. ईरान डील में परमाणु मुद्दों का साफ जिक्र: ट्रम्प ने कहा कि उनके प्रस्तावित ईरान समझौते में परमाणु मुद्दों का साफ और विस्तार से जिक्र किया गया है। इससे पहले कई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि परमाणु मुद्दों को लेकर दोनों देश बाद में बातचीत करेंगे।
ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
लाइव अपडेट्स
25 मिनट पहले
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ओमान पर अमेरिका या ईरान में से किसी एक को चुनने का दबाव
अमेरिका ईरान युद्ध में तटस्थ रुख अपनाने वाले ओमान से अमेरिका अब संतुष्ट नहीं है और उस पर किसी एक पक्ष को चुनने का दबाव बना रहा है। यह दावा द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में किया गया है।
अमेरिकी और अरब अधिकारियों के अनुसार, वॉशिंगटन अब ओमान पर दबाव डाल रहा है कि वह किसी एक पक्ष का साथ चुने और ईरान के साथ अपने राजनयिक संबंध खत्म करे।
हाल के दिनों में राष्ट्रपति ट्रम्प ने ओमान पर प्रतिबंध लगाने और यहां तक कि बमबारी करने की भी चेतावनी दी थी। यह चेतावनी उस खुफिया रिपोर्ट के बाद आई जिसमें कहा गया था कि ईरान और ओमान ने मिलकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की संभावनाओं पर चर्चा की थी।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक ओमान का अमेरिका और ईरान के बीच संतुलन बनाना लगातार कठिन होता जा रहा है। यदि ओमान अमेरिका का खुलकर साथ देता है तो उसे उसी तरह के प्रतिशोध का सामना करना पड़ सकता है जैसा ईरान ने युद्ध के दौरान दूसरे खाड़ी देशों के खिलाफ किया था।
ईरान के प्रति ओमान के रवैये की आलोचना केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे प्रमुख क्षेत्रीय साझेदार भी कर रहे हैं। उनका मानना है कि ओमान के तेहरान के साथ करीबी संबंध हैं।
अरब अधिकारियों के अनुसार, ओमान ने कई बार अमेरिका और अन्य देशों द्वारा जारी उन संयुक्त बयानों में शामिल होने से इनकार किया जिनमें ईरानी हमलों की निंदा की गई थी।
अधिकारियों ने बताया कि ओमानी बंदरगाहों पर ड्रोन हमलों के बाद भी ओमान ने सार्वजनिक रूप से ईरान को जिम्मेदार नहीं ठहराया और केवल घटनाओं की पुष्टि तक खुद को सीमित रखा।
संघर्ष के दौरान ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद ऐसे एकमात्र खाड़ी नेता थे जिन्होंने अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारी और नए सर्वोच्च नेता बने मोजतबा खामेनेई को बधाई दी थी।
43 मिनट पहले
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IAEA चीफ बोले- ईरान की परमाणु क्षमता बहुत बढ़ी है, अब नए समझौते की जरूरत

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के चीफ राफेल ग्रॉसी ने कहा है कि 2015 में हुए परमाणु समझौते के बाद से ईरान की परमाणु तकनीक और क्षमता काफी बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच अगर नया समझौता होता है, तो वह पुराने समझौते जैसा नहीं हो सकता।
ग्रोसी ने कहा कि 2015 में जो परमाणु समझौता हुआ था, वह उस समय की स्थिति के हिसाब से था। अब हालात बदल चुके हैं और इसलिए एक नए तरह के समझौते की जरूरत है।
51 मिनट पहले
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‘अली खामेनेई की तरह जनता से बात करें नए सुप्रीम लीडर’

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा अली खामेनेई।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि मौलवी अब्दुल्ला हाजी सादेगी ने मंगलवार को कहा कि देश की जनता को युद्धकालीन हालात के बारे में नियमित जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई भी संकट के समय सीधे जनता को संबोधित करते थे और उन्हें भरोसा दिलाते थे।
हाजी सादेगी ने कहा, “पिछले साल 12 दिन चले युद्ध के दौरान अली खामेनेई खुद माइक्रोफोन लेकर लोगों से बात करते थे और उन्हें यकीन दिलाते थे। हम यह नहीं कह रहे कि सीक्रेट जानकारियां सार्वजनिक कर दी जाएं, लेकिन लोगों को हालात की जानकारी जरूर मिलनी चाहिए ताकि दुश्मन इसका फायदा न उठा सके।”
सादेगी का यह बयान ऐसे समय आया है जब नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पद संभालने के बाद से मोजतबा खामेनेई न तो किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखाई दिए हैं और न ही उनकी कोई तस्वीर या ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी की गई है।
06:04 AM2 जून 2026
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रिपोर्ट- यूरोप में और परमाणु हथियार तैनात कर सकता है अमेरिका
अमेरिका यूरोप के कुछ और नाटो देशों में अपने परमाणु हथियार तैनात करने पर विचार कर रहा है। फाइनेशियल टाइम्स की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से इसकी जानकारी दी गई है।
फिलहाल यूरोप के 6 नाटो देशों में ऐसे अमेरिकी परमाणु हथियार मौजूद हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमानों से इस्तेमाल किया जा सकता है। इन देशों में बेल्जियम, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, तुर्किये और ब्रिटेन शामिल हैं।
हालांकि इन हथियारों का अंतिम कंट्रोल अमेरिका के पास ही है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका अब इस व्यवस्था को और देशों तक बढ़ाने के लिए तैयारी में है। हालांकि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।
रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि किन नए देशों में परमाणु हथियार तैनात किए जा सकते हैं। अमेरिका और नाटो ने भी अभी इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
05:37 AM2 जून 2026
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इजराइल डे परेड में नहीं पहुंचे न्यूयॉर्क मेयर, 62 साल में पहली बार ऐसा हुआ

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने 31 मई को हुई इजराइल डे परेड में हिस्सा नहीं लिया। पिछले 62 साल में पहली बार ऐसा हुआ है कि शहर के मेयर ने इजराइल डे परेड में हिस्सा नहीं लिया। इसकी वजह डेमोक्रेटिक नेता जोहरान ममदानी का फिलिस्तीनी अधिकारों के समर्थन वाला रुख माना जा रहा है।
न्यूयॉर्क की फिफ्थ एवेन्यू पर हर साल निकाली जाने वाली इजराइल डे परेड, 1948 में इजराइल की स्थापना का जश्न मनाने के लिए आयोजित की जाती है। यह कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिकी राजनीति में काफी अहम माना जाता रहा है।
आम तौर पर न्यूयॉर्क के मेयर, गवर्नर और दूसरे बड़े राजनीतिक नेता इसमें शामिल होते रहे हैं, क्योंकि शहर में बड़ी यहूदी आबादी है और इस समुदाय का राजनीतिक प्रभाव भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
लेकिन इस बार मेयर की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक बहस छेड़ दी है। जोहरान ममदानी फिलिस्तीनियों के अधिकारों के समर्थन और गाजा युद्ध पर इजराइल की आलोचना करने वाले नेताओं में शामिल रहे हैं। उनके रुख को लेकर पहले से ही न्यूयॉर्क की राजनीति में चर्चा चल रही है।
05:13 AM2 जून 2026
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अमेरिकी सांसद बोलीं- इजराइल को दी जाने वाली मदद रोकी जाए

इल्हान ओमर डेमोक्रेटिक पार्टी की अहम नेता हैं। वे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में मिनेसोटा राज्य की सांसद हैं।
अमेरिकी सांसद इल्हान ओमर ने इजराइल की लेबनान में सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है और अमेरिका से इजराइल को दी जाने वाली सैन्य सहायता तुरंत बंद करने की मांग की है।
ओमर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा-
इजराइल ने बार-बार यह सबक सीखा है कि वह नरसंहार और अन्य अत्याचार लगभग बिना किसी जवाबदेही के कर सकता है।

ओमर ने कहा कि इजराइल अब गाजा में अपनाई गई रणनीति को लेबनान में भी लागू कर रहा है। उन्होंने कहा कि लेबनान में इजराइल जंग के कारण हजारों लोगों की मौत हुई है और 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
इल्हान ओमर लंबे समय से अमेरिकी कांग्रेस में उन नेताओं में शामिल रही हैं जो इजराइल की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। गाजा युद्ध और अब लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई को लेकर भी उन्होंने कई बार बाइडेन और ट्रम्प सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
04:26 AM2 जून 2026
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नेतन्याहू पर अमेरिका के आगे झुकने का आरोप

इजराइल के कई नेताओं ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस फैसले की आलोचना की है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के आग्रह के बाद लेबनान पर प्रस्तावित हमलों को रोक दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्वीर ने सोशल मीडिया पर नेतन्याहू से ट्रम्प को ‘ना’ कहने और हिजबुल्लाह पर हमला जारी रखने की अपील की।
यशार पार्टी के नेता गादी आइजेनकोट ने ट्रम्प के लेबनान पर हमला न करने के आदेश को अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू वही व्यक्ति हैं जो हमेशा दूसरों को यह सिखाते रहे हैं कि इजराइली प्रधानमंत्री को अमेरिकी राष्ट्रपति को जरूरत पड़ने पर ‘ना’ कहना आना चाहिए।
विपक्ष के नेता याइर लापिड ने भी नेतन्याहू की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ऐसा व्यवहार कर रहे हैं मानो इजराइल अमेरिका का कोई राज्य हो।
03:57 AM2 जून 2026
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फ्रांस ने इजराइली हमले को लेकर UNSC में इमरजेंसी बैठक बुलाई
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सोमवार को बुलाई गई आपात बैठक में अमेरिका को छोड़कर लगभग सभी देशों ने इजराइल से दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटाने और देश के खिलाफ आगे सैन्य कार्रवाई से बचने की अपील की।
सुरक्षा परिषद की बैठक में फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन ने इजराइल की कार्रवाई की तीखी आलोचना की। दूसरी ओर अमेरिका ने अपनी टिप्पणियों में मुख्य रूप से ईरान और हिजबुल्लाह को जिम्मेदार ठहराया।
फ्रांस के अनुरोध पर हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई जब इजराइल ने लेबनान में हमले तेज कर दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र की सीनियर अफसर मार्था अमा अक्या पोबी ने सुरक्षा परिषद से कहा कि ब्लू लाइन के उत्तर में इजराइली सेना की मौजूदगी लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का स्पष्ट उल्लंघन है।
03:39 AM2 जून 2026
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ईरान बोला- इजराइल नहीं रुका तो बाब अल मंडेब का हाल होर्मुज जैसा होगा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कुद्स फोर्स के कमांडर इस्माइल कानी ने चेतावनी दी है कि अगर इजराइल, लेबनान और गाजा में अपने सैन्य अभियान जारी रखता है तो ईरान के सहयोगी समूह कई नए इलाकों में इजराइल के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर सकते हैं।
फार्स न्यूज के अनुसार, कानी ने कहा कि हालात ऐसे मोड़ पर पहुंच सकते हैं जहां बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात की स्थिति समान हो जाए। उनका इशारा इस ओर था कि अगर एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में व्यवधान पैदा होता है तो दूसरे मार्ग में भी वैसी ही स्थिति बन सकती है।

03:12 AM2 जून 2026
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ईरान ने होर्मुज पार कर रहे जहाज पर हमला किया

ईरान के हमले के बाद जहाज के एक हिस्से को नुकसान पहुंचा।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को दावा किया कि उसकी नौसेना ने इराक के उम्म कसर बंदरगाह के पास मौजूद कंटेनर जहाज MCC सारिस्का V को क्रूज मिसाइल से निशाना बनाया। MCC सारिस्का V पनामा के झंडे के तहत पंजीकृत कंटेनर जहाज है।
IRGC ने कहा कि यह हमला ओमान सागर में ईरान की ओर जा रहे गाम्बिया के झंडे वाले मालवाहक जहाज लियान स्टार पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में किया गया। आईआरजीसी के मुताबिक लियान स्टार पर अमेरिका ने हमला किया था, इसलिए जवाबी कार्रवाई के तहत एमएससी सारिस्का वी को निशाना बनाया गया।
03:09 AM2 जून 2026
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ट्रम्प बोले- इस हफ्ते ईरान से समझौता संभव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगले एक हफ्ते के भीतर होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर समझौता हो सकता है। उन्होंने सोमवार को एबीसी न्यूज से कहा कि अगर समझौता हो जाता है तो यह सैन्य जीत से भी बड़ी उपलब्धि होगी।
ट्रम्प ने कहा कि बातचीत अभी जारी है और कूटनीतिक समाधान की संभावना बनी हुई है। किसी समझौते को अंतिम मंजूरी देने से पहले उन्हें अभी कुछ और मामलों पर सहमति चाहिए। दक्षिणी लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई का जिक्र करते हुए ट्रम्प ने कहा, “आज थोड़ी समस्या पैदा हुई थी, लेकिन मैंने उसे बहुत जल्दी संभाल लिया।”
02:20 AM2 जून 2026
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अमेरिका में तेल स्टॉक 2 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा
युद्ध का असर तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। ट्रम्प सरकार अब तक अमेरिका के इमरजेंसी तेल भंडार से करीब 5.8 करोड़ बैरल कच्चा तेल जारी कर चुकी है। यह कुल रणनीतिक भंडार का लगभग 14% है। कच्चा तेल रिलीज करने का मकसद ईरान युद्ध के कारण पैदा हुई आपूर्ति की समस्या को कम करना है।
अमेरिका के पास लुइसियाना और टेक्सास की भूमिगत गुफाओं में अधिकतम 71.4 करोड़ बैरल तेल रखने की क्षमता है। मार्च 2026 में संकट शुरू होने से पहले इसमें करीब 41.5 करोड़ बैरल तेल था, जो अब घटकर 35.71 करोड़ बैरल रह गया है। यह जनवरी 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है।

कैलिफोर्निया में मैराथन पेट्रोलियम की रिफाइनरी में बने तेल भंडारण टैंक।
अमेरिका अपने इस रिजर्व को लंबे समय तक खाली नहीं रख सकता, क्योंकि यह नेशनल सिक्योरिटी का मामला है। संकट टलने के बाद ट्रम्प सरकार को बाजार से दोबारा महंगा तेल खरीदकर इस खजाने को भरना होगा, जिससे अमेरिकी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।
दरअसल, तेल जारी करने का यह सिर्फ अमेरिका का फैसला नहीं है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के 32 सदस्य देशों ने मिलकर 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारने का सामूहिक फैसला किया। यह इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा इमरजेंसी ऑयल रिलीज है।
अमेरिका जो तेल जारी कर रहा है, वह इसी वैश्विक डील का हिस्सा है। आमतौर पर इतने बड़े युद्ध और सप्लाई रुकने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू जाती हैं, लेकिन इस कदम की वजह से कीमतें नियंत्रण से बाहर नहीं गईं।
हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह केवल एक टेंपरेरी बफर (अस्थायी राहत) है। यदि जून के आखिर तक यह समुद्री रास्ता नहीं खुला, तो तेल की कीमतें तेजी से भाग सकती हैं।
02:00 AM2 जून 2026
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हिजबुल्लाह ने अमेरिका के सीजफायर प्रस्ताव को माना
हिजबुल्लाह ने अमेरिका के उस प्रस्ताव को मान लिया है जिसमें इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम कराने की बात कही गई है। इसकी पुष्टि लेबनान के अधिकारियों को भी मिल गई है।
प्रस्ताव के तहत बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर इजराइली हवाई हमले रोके जाएंगे। इसके बदले हिजबुल्लाह भी इजराइल पर हमले नहीं करेगा।
वॉशिंगटन में मौजूद लेबनान के दूतावास ने कहा कि अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो बाद में युद्धविराम का दायरा बढ़ाकर पूरे लेबनान में लागू किया जा सकता है।
इससे पहले ट्रम्प ने कहा था कि उन्होंने हिजबुल्लाह लीडरशिप से बातचीत की है। हिजबुल्लाह इस बात पर सहमत हो गया है कि दोनों पक्ष गोलीबारी बंद करेंगे।
01:47 AM2 जून 2026
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ट्रम्प ने नेतन्याहू को फटकारा, कहा- मैं न होता तो जेल में होते
ट्रम्प ने सोमवार को नेतन्याहू से फोन पर हुई तीखी बातचीत में लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई को लेकर कड़ी नाराजगी जताई। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने नेतन्याहू को सीधे फटकार लगाते हुए कहा, “क्या तुम पागल हो गए हो… तुम आखिर कर क्या रहे हो?”
रिपोर्ट के अनुसार, यह बातचीत उस समय हुई जब ईरान ने चेतावनी दी थी कि अगर लेबनान में सैन्य कार्रवाई जारी रही तो वह अमेरिका के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत रोक सकता है। इसके बाद ट्रम्प ने मामले में सीधे हस्तक्षेप किया।
एक अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस को बताया कि ट्रम्प इजराइल के एक्शन को जरूरत से ज्यादा आक्रामक मान रहे हैं। उन्हें इस बात पर भी आपत्ति थी कि एक हिजबुल्लाह कमांडर को निशाना बनाने के लिए पूरी इमारतें तबाह की जा रही थीं।
ट्रम्प ने नेतन्याहू से कहा कि इन हरकतों की वजह से दुनिया में इजराइल के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। ट्रम्प ने कहा, “अब हर कोई तुमसे नफरत करता है। इस वजह से हर कोई इजराइल से नफरत करता है।”
हालांकि बातचीत के बाद नेतन्याहू के कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि इजराइल की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने अंत में कहा, “ठीक है, ठीक है, बस यह सुनिश्चित करिए कि सब कुछ संभाल लिया जाए।”
01:42 AM2 जून 2026
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नेतन्याहू बोले- लेबनान में हमले जारी रहेंगे

लेबनान के दक्षिणी शहर टायर में सोमवार को हुए इजराइली हवाई हमले के बाद बचावकर्मी मलबे के बीच राहत और बचाव कार्य करते हुए।
नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान में योजना के मुताबिक कार्रवाई जारी रखेगी। वहीं रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि लेबनान में कोई युद्धविराम नहीं हुआ है। हालांकि इससे पहले ट्रम्प ने कहा था कि इजराइल, लेबनान पर हमले नहीं करेगा।
01:29 AM2 जून 2026
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जापान, सऊदी और यूरोप की शांति की अपील
जापान ने ईरान से अमेरिका के साथ समझौते के लिए अधिक लचीला रुख अपनाने की अपील की है। जापान ने चेतावनी दी है कि होर्मुज मार्ग बंद रहने से वैश्विक सप्लाई चेन ठप होगी, जिससे दुनियाभर में मंदी आ सकती है।
यूरोपियन यूनियन (EU) ने इजराइल से सैन्य कार्रवाई रोकने और लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की अपील की है। सऊदी अरब ने भी कुवैत पर ईरानी हमले की कड़ी निंदा की है।
01:25 AM2 जून 2026
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ईरान ने मिडिल ईस्ट में 20 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचाया

16 जनवरी को ली गई सैटेलाइट तस्वीरों में कतर के अल उदैद एयर बेस पर अमेरिकी वायुसेना के पांच हवाई ईंधन भरने वाले KC-135 विमान खड़े दिखाई दिए।
युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने मिडिल ईस्ट के आठ देशों में स्थित 20 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर नुकसान पहुंचाया है।
सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि हमले पहले बताए गए आकलन से अधिक व्यापक और सटीक थे।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका के लगभग 40,000 से अधिक सैनिक तैनात हैं। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जिन प्रमुख क्षेत्रों और देशों में मौजूद 20 ठिकानों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है, उनमें,
इराक: अल-असद एयरबेस और इरबिल बेस पर सबसे बड़े हमले हुए।
सीरिया: अल-तनफ और कोनोको गैस फील्ड
जॉर्डन: टावर 22 बॉर्डर पोस्ट
खाड़ी के अन्य देश: इसके अलावा कुवैत, कतर, यूएई और बहरीन में मौजूद सपोर्ट लॉजिस्टिक्स बेस और सऊदी अरब के आसपास के सैन्य ढांचे भी ड्रोन या मिसाइल की रेंज और छिटपुट हमलों की जद में आए।
01:21 AM2 जून 2026
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पिछले 3 हफ्ते में 70 कॉमर्शियल जहाज होर्मुज से गुजरे

अमेरिका ने पिछले तीन सप्ताह में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले 70 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिखाने में मदद की है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक जहाजों को ऐसे समुद्री रास्तों से निकाला जा रहा है जो ईरान के तट से काफी दूर हों।
रक्षा विश्लेषकों के मुताबिक, ये जहाज ओमान के तट के करीब वाले रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा की स्थिति इतनी खराब है कि अगर कोई जहाज ईरान की मंजूरी के बिना उसके करीब से गुजरता है, तो उस पर ईरानी ड्रोन या मिसाइलों से हमले का खतरा लगभग तय है।
इस खतरे से बचने के लिए ज्यादातर जहाजों ने अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपोंडर यानी लोकेशन संकेतक बंद कर दिए। इसे समुद्री भाषा में डार्क पैसेज कहा जाता है। ऐसा करने से सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए दुश्मन को उनकी सटीक लोकेशन नहीं मिलती।













