चेन्नई49 मिनट पहले
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अन्नामलाई 2011 में IPS अफसर बने थे। 2019 में इस्तीफा देकर राजनीति में आए।
तमिलनाडु BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने शुक्रवार को भाजपा छोड़ दी। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन को इस्तीफा सौंपा। उन्होंने इसे मंजूर भी कर लिया है।
अन्नामलाई ने 3 दिन पहले दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई भाजपा से बिना टकराव वाली सम्मानजनक विदाई चाहते थे।
इसके बाद वे तमिलनाडु में ‘राष्ट्रवादी-तमिल दर्शन’ आधारित गैर-राजनीतिक आंदोलन शुरू करेंगे, जिसे जनभावनाओं के आधार पर बाद में राजनीतिक दल में बदला जा सकता है।
अन्नामलाई 7 जून को अपने कोर समर्थकों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद आगे की रणनीति का ऐलान कर सकते हैं। युवा वोटबैंक में उनकी पकड़ को देखते हुए उनके अगले कदम पर राजनीतिक दलों की नजर है। यह भी चर्चा है कि RSS चाहता है कि अन्नामलाई सार्वजनिक जीवन में सक्रिय बने रहें।
तीन दिन पहले मुलाकात, फिर इस्तीफा
2 जून: अन्नामलाई और शाह की मुलाकात

के अन्नामलाई ने 2 जून को दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।
5 जून: अन्नामलाई का इस्तीफा मंजूर
अन्नामलाई और बीजेपी में अनबन, पहले मिल गए थे 4 संकेत…
- विधानसभा चुनाव से पहले BJP ने अन्नामलाई की जगह नैनार नागेंद्रन को तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष बनाया था।
- तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अन्नामलाई ने चुनाव भी नहीं लड़ा था।
- अन्नामलाई ने CBSE की तीन-भाषा नीति को मौजूदा सत्र से लागू करने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय से इसे 2029-30 शैक्षणिक सत्र से लागू करने की मांग की थी।
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, AIADMK के साथ BJP के गठबंधन को लेकर अन्नामलाई सहमत नहीं थे। हालांकि बाद में उन्होंने NDA के लिए चुनाव प्रचार किया था।
भाजपा को कितना नुकसान, 3 संभावनाएं…
- राज्य में युवाओं की पकड़ कमजोर होना: अन्नामलाई ने खुद को युवा, आक्रामक और साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में स्थापित किया। सोशल मीडिया और शहरी मध्यम वर्ग में उनकी अच्छी पकड़ है। युवाओं में भाजपा की पकड़ कमजोर हो सकती है।
- तमिलनाडु में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा खोना: पिछले 4-5 साल में अन्नामलाई ही राज्य में भाजपा का मुख्य चेहरा रहे। उनके बाद वैसी लोकप्रियता वाला दूसरा नेता फिलहाल नहीं दिख रहा है।
- DMK विरोधी वोटों का बिखराव: अन्नामलाई DMK के सबसे मुखर आलोचक रहे हैं। उनके हटने से विपक्षी राजनीति में भाजपा की धार कुछ कमजोर पड़ सकती है।
लेकिन नुकसान सीमित भी रह सकता है, 2 वजह…
- भाजपा का वोट पूरी तरह अन्नामलाई पर निर्भर नहीं: तमिलनाडु में भाजपा का एक हिस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के आधार पर वोट करता है।
- NDA गठबंधन सहारा दे सकता है: AIADMK जैसे सहयोगी दल साथ रहे तो भाजपा का संगठनात्मक नुकसान कुछ हद तक संतुलित हो सकता है।
अन्नामलाई ने 2020 में भाजपा जॉइन की, 6 साल बाद इस्तीफा

अन्नामलाई ने 25 अगस्त 2020 को BJP जॉइन की थी। उस समय वे कर्नाटक कैडर के पूर्व IPS अधिकारी थे। पार्टी में शामिल होने के तुरंत बाद तमिलनाडु BJP का उपाध्यक्ष बनाया गया था।
2021 को उन्हें तमिलनाडु BJP का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अप्रैल 2025 तक इस पद पर रहे। तमिलनाडु में BJP के संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने का अभियान चलाया।
एन मन्न, एन मक्कल (मेरी धरती, मेरे लोग) यात्रा निकाली, जिसके जरिए राज्यभर में जनसंपर्क किया। 2021 विधानसभा चुनाव में अरवाकुरिची सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।
DMK सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को लगातार उठाया। 2024 लोकसभा चुनाव में कोयंबटूर सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।
तमिलनाडु में BJP को सिर्फ 1 सीट मिली
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में BJP सिर्फ 1 सीट जीत पाई, जबकि एक्टर विजय की 2 साल पुरानी पार्टी TVK को 108 सीटें मिलीं। ये DMK (59) और AIDMK (47) की कुल सीटों से ज्यादा है।

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