Kiren Rijiju on New York Protest | ACTPnews

भागवत ने शनिवार को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में स्पीच दी थी। - Dainik Bhaskar


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नई दिल्ली27 मिनट पहले

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भागवत ने शनिवार को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में स्पीच दी थी।

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने न्यूयॉर्क में RSS प्रमुख मोहन भागवत के कार्यक्रम स्थल के बाहर भारतीय झंडे के अपमान को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यह प्रदर्शन शनिवार को मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर हुआ था।

रिजिजू ने रविवार रात X पर घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा- हमने हमेशा कहा है कि RSS, BJP या सरकार की आलोचना करने की आजादी है, लेकिन हमारे झंडे और मेरे देश का अपमान मत करो। यह बहुत महंगा पड़ेगा।

रिजिजू की ओर से शेयर किए गए वीडियो में मैडिसन स्क्वायर के बाहर एक प्रदर्शनकारी भारतीय झंडे को अपने पैर में बांधकर अपमान करता नजर आया। फिर कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों ने तिरंगे के कई टुकड़े कर दिए। फिर खालिस्तान समर्थक नारे भी लगाए।

भागवत बोले- भारत के DNA में एकता और विविधता

वहीं, शनिवार को मैडिसन स्क्वायर में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में 6,000 से ज्यादा भारतीय-अमेरिकी और अलग-अलग धर्मों के नेता शामिल हुए। भागवत ने अपने संबोधन में विविधता में एकता को भारत के DNA का हिस्सा बताया।

उन्होंने कहा- सोचने की क्षमता इंसान के लिए एक वरदान है। सही सोच इंसान को भगवान के करीब ले जाती है, जबकि गलत सोच उसे जानवरों के करीब ले जाती है।

भागवत के संबोधन से पहले अलग-अलग धर्मों के नेताओं ने भी एकता, विविधता, करुणा और एक-दूसरे की मदद का संदेश दिया। कार्यक्रम में रब्बी जैकब ब्लूमेंथल, रिवर साइड चर्च की वरिष्ठ मंत्री रेव. एड्रिएन थॉर्न और वॉशिंगटन डीसी की मस्जिद मुहम्मद के अध्यक्ष एवं इमाम तालिब एम. शरीफ समेत कई धर्मगुरु शामिल हुए।

भागवत के भाषण की 5 बड़ी बातें…

1. धर्म सिर्फ पूजा नहीं, जीवन को संतुलित रखने का नियम: भागवत ने कहा कि भारत में जिस सिद्धांत को धर्म कहा जाता है, उसे सिर्फ धर्म या पूजा के तौर पर नहीं समझना चाहिए। धर्म वह व्यवस्था है जो ब्रह्मांड और जीवन को संभालती है। यह जीवन की अलग-अलग स्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।

2. सिर्फ भौतिक सुख से जिंदगी में संतुष्टि नहीं मिलती: भागवत ने कहा कि पैसा, सामान और दूसरी भौतिक सुविधाएं हमेशा खुशी नहीं दे सकतीं। भौतिक सुख अस्थायी होता है और बहुत ज्यादा सुविधाएं होने के बावजूद संतुष्टि की कमी रह सकती है।

3. अमेरिका कर्मभूमि है, उसके प्रति सच्चे रहें: अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से भागवत ने कहा कि आपकी पहली जिम्मेदारी अपनी कर्मभूमि के प्रति है, उसके प्रति वफादार रहना चाहिए।

4. जीवन में सीधे संन्यास नहीं, हर पड़ाव की अपनी जिम्मेदारी: भागवत ने कहा कि इंसान के जीवन में चार चरण होते हैं- ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास। पहले सीखना, फिर परिवार और समाज को संभालना और बाद में अपने अनुभव अगली पीढ़ी को देना जरूरी है।

5. व्यक्ति, समाज और पर्यावरण साथ आगे बढ़ें: भागवत ने कहा कि प्रगति के लिए न व्यक्ति को दबाना चाहिए और न समाज को। व्यक्ति, समाज और पर्यावरण की भलाई साथ-साथ होनी चाहिए।

RSS के शताब्दी वर्ष के मौके पर भागवत का 3 देशों का दौरा

भागवत 25 अगस्त को न्यूयॉर्क गए थे। यह उनके 17 दिन के तीन देशों के दौरे का पहला पड़ाव है। भागवत का यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के ग्लोबल आउटरीच कार्यक्रम के तहत हो रहा है। RSS के 100 साल पूरे होने के मौके पर देश-विदेश में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अमेरिका के बाद भागवत कनाडा और ब्रिटेन जाएंगे।

न्यूयॉर्क मेयर ने भागवत के कार्यक्रम का विरोध किया था

भागवत के कार्यक्रम से पहले न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा था कि वह RSS की इस रैली का समर्थन नहीं करते। जब ममदानी से पूछा गया कि क्या RSS का कार्यक्रम रद्द किया जाना चाहिए, तो उन्होंने कहा- मुझे नहीं पता कि किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर के पास है या नहीं।

अमेरिकी आयोग भी RSS पर बैन की मांग कर चुका

भागवत के अमेरिका दौरे से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने RSS पर बैन लगाने की मांग की थी। आयोग ने 19 अगस्त को अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को हाई लेवल राजनयिक सुविधाएं नहीं देने और उनसे आधिकारिक मुलाकात नहीं करने की अपील भी की।

हालांकि, भारत ने USCIRF की इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 20 अगस्त को आयोग को ‘पक्षपाती संस्था’ बताया था। उन्होंने कहा कि USCIRF लंबे समय से भारत को लेकर गलत और भड़काऊ बयान देता रहा है, इसलिए उसकी बातों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।

2018 में भी अमेरिका गए थे भागवत

मोहन भागवत इससे पहले सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे। उन्होंने शिकागो में 7 से 9 सितंबर 2018 तक आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस में हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम में 60 देशों से करीब 2,500 प्रतिनिधि शामिल हुए थे। भागवत ने कांग्रेस के उद्घाटन सत्र में मुख्य भाषण दिया था।

2018 के इस दौरे की उपलब्ध रिपोर्टों में भागवत की किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या उन्हें किसी औपचारिक राजनयिक सम्मान दिए जाने का जिक्र नहीं मिलता। उनका दौरा मुख्य रूप से वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस और उससे जुड़े कार्यक्रमों पर केंद्रित था।

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