Nepal Coin Map Controversy | Cabinet Rejects New Design & Demands Monastery | ACTPnews

Nepal Coin Map Controversy | Cabinet Rejects New Design & Demands Monastery


8 मिनट पहलेलेखक: काठमांडू से रमेश पोख्रेल

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नेपाल सरकार ने एक रुपए के सिक्के से विवादित राष्ट्रीय नक्शा हटाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। इस नक्शे में भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है।

नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने पहले प्रस्ताव रखा था कि एक रुपए के सिक्के पर छपे नेपाल के विवादित नक्शे की जगह मुस्तांग के ऐतिहासिक मठ की तस्वीर लगाई जाए। इस नक्शे को सिक्के पर से हटाने की खबर जैसे ही बाहर आई, इसका विरोध होने लगा।

इसके बाद मंत्रालय ने नेपाल राष्ट्र बैंक को निर्देश दिया कि डिजाइन में बौद्ध मठ के साथ नेपाल का राष्ट्रीय नक्शा भी शामिल किया जाए। इसके बाद संशोधित प्रस्ताव दोबारा मंजूरी के लिए भेजा जाए।

तस्वीर नेपाल के 1 रुपए के सिक्के की है, जिस पर विवादित नक्शा उकेरा गया है।

तस्वीर नेपाल के 1 रुपए के सिक्के की है, जिस पर विवादित नक्शा उकेरा गया है।

मौजूदा सरकार बनने से पहले ही प्रस्ताव तैयार हुआ

अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्ताव मौजूदा सरकार बनने से पहले तैयार होना शुरू हो गया था। इसका मकसद नेपाल की मुद्रा पर देश की अलग-अलग सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को जगह देना था।

नेपाल राष्ट्र बैंक के एक अधिकारी ने कहा,

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नेपाल के कई नोटों और सिक्कों पर पहले से ही पशुपतिनाथ मंदिर और जानकी मंदिर जैसे हिंदू धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की तस्वीरें हैं। यह महसूस किया गया कि बौद्ध विरासत को पर्याप्त जगह नहीं मिली है। इसलिए घर मठ को चुना गया क्योंकि इसका ऐतिहासिक महत्व बहुत बड़ा है। साथ ही इससे मुस्तांग में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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लो घेकर मठ नेपाल के अपर मुस्तांग में स्थित है। माना जाता है कि इसकी स्थापना आठवीं शताब्दी में गुरु पद्मसंभव (गुरु रिनपोछे) ने की थी। इतिहासकार इसे नेपाल के सबसे पुराने बौद्ध मठों में से एक ही नहीं, बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में भी गिनते हैं।

तस्वीर नेपाल के अपर मुस्तांग क्षेत्र में स्थित लो घेकर मठ की है। इसे नेपाल के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में गिना जाता है।

तस्वीर नेपाल के अपर मुस्तांग क्षेत्र में स्थित लो घेकर मठ की है। इसे नेपाल के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में गिना जाता है।

1 रुपए को बनाने में 2 रुपए से ज्यादा खर्च

नेपाल राष्ट्र बैंक कैबिनेट के निर्देश के मुताबिक नया डिजाइन तैयार करेगा, जिसमें राष्ट्रीय नक्शा और लो घेकर मठ दोनों होंगे। सरकार की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही नए सिक्के की ढलाई शुरू होगी।

नेपाल राष्ट्र बैंक एक रुपए के सिक्के की धातु और वजन बदलने की तैयारी भी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस समय एक रुपए का एक सिक्का बनाने में दो रुपए से भी ज्यादा खर्च आता है। इसलिए इसका उत्पादन आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन गया है। नए डिजाइन में सिक्के का वजन भी कम किया जाएगा, जिससे निर्माण लागत घटेगी।

10 रुपए के सिक्के का डिजाइन भी बदलेगा

इसके अलावा 10 रुपए के सिक्के पर दैलेख के भुर्ति देवल मंदिर समूह को शामिल करने का प्रस्ताव भी विचार चल रहा है।

नेपाल राष्ट्र बैंक 10 रुपये के सिक्के का डिजाइन भी बदलने पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार इस सिक्के पर दैलेख जिले के भुर्ति देवल मंदिर समूह की तस्वीर हो सकती है। यह 22 मंदिरों का समूह है, जिसका निर्माण 14वीं और 15वीं शताब्दी में खास मल्ल शासकों के समय हुआ था।

नेपाल में मुद्रा के डिजाइन बदलने का इतिहास भी पुराना है। राजशाही के दौर में नोटों और सिक्कों पर राजा महेंद्र, राजा बीरेन्द्र और राजा ज्ञानेन्द्र की तस्वीरें छपी होती थीं। लेकिन वर्ष 2006 के राजनीतिक बदलाव के बाद इनकी जगह माउंट एवरेस्ट, वन्यजीव, राष्ट्रीय स्मारक और सांस्कृतिक प्रतीकों को शामिल किया गया।

नेपाल में सिक्के को अपनाने की मंजूरी कैसे मिलती है

  • नेपाल राष्ट्र बैंक अधिनियम और नेपाल राष्ट्र बैंक नोट एवं सिक्का नियमावली के मुताबिक किसी भी नए नोट या सिक्के के डिजाइन को लागू करने से पहले कई चरणों वाली मंजूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
  • सबसे पहले नोट और सिक्का डिजाइन समिति डिजाइन तैयार करती है। इस समिति में गवर्नर, डिप्टी गवर्नर, इतिहासकार, पुरातत्वविद, भाषाविद और अन्य विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
  • इसके बाद डिजाइन को नेपाल राष्ट्र बैंक का निदेशक मंडल मंजूरी देता है। फिर इसे वित्त मंत्रालय के माध्यम से अंतिम मंजूरी के लिए मंत्रिपरिषद के पास भेजा जाता है।
  • कैबिनेट की मंजूरी के बिना किसी नए या बदले हुए डिजाइन वाले नोट या सिक्के को जारी नहीं किया जा सकता।

2020 के नक्शे के बाद उठा विवाद

भारत-नेपाल सीमा विवाद 2020 में हुई थी। भारत ने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे तक सड़क का उद्घाटन किया। नेपाल ने इसका विरोध करते हुए मई 2020 में नया राजनीतिक नक्शा जारी किया, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र का हिस्सा दिखाया।

इसके बाद जून 2020 में नेपाल की संसद ने संविधान संशोधन कर इस नक्शे को आधिकारिक मान्यता दे दी। तब से यही नक्शा सरकारी दस्तावेजों, स्कूल की किताबों, पासपोर्ट, 100 रुपए के नोट और 1 व 2 रुपए के सिक्कों पर इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद सरकार ने नए 1 रुपए के सिक्के की डिजाइन में भी इसी आधिकारिक नक्शे को बनाए रखने का फैसला किया।

भारत ने नेपाल के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई थी। भारत का कहना है कि कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा भारतीय क्षेत्र हैं और सीमा विवाद का समाधान दोनों देशों के बीच बातचीत से होना चाहिए, न कि एकतरफा नक्शा बदलकर।

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