Nepal Uses China Thermal Cameras for India Border Surveillance | ACTPnews

यहीं से भारत और नेपाल की सीमाएं अलग-अलग होती हैं।


उत्तराखंड से लगी सीमा पर नेपाल ने निगरानी के लिए चीन निर्मित थर्मल कैमरे लगाने शुरू कर किए।

उत्तराखंड से लगी भारत-नेपाल सीमा पर नेपाल ने चीन निर्मित थर्मल कैमरे लगाने शुरू कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि ये कैमरे भारतीय सीमा के भीतर करीब 10 किलोमीटर तक की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने में सक्षम हैं। इतना ही नहीं, इन कैमरों के संचालन के लिए

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उत्तराखंड में भारत और नेपाल के बीच करीब 275 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। सीमा की सुरक्षा भारत की ओर से सशस्त्र सीमा बल (SSB) और नेपाल की ओर से आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) के जिम्मे है। पिछले कुछ वर्षों में नेपाल ने सीमा क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लगातार मजबूत किया है। इसी क्रम में गड्ढा चौकी से लेकर कालापानी तक नई बॉर्डर आउट पोस्ट (BOP) विकसित की जा रही हैं, जहां आधुनिक निगरानी उपकरणों की तैनाती की जा रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा क्षेत्र में बढ़ रही यह तकनीकी निगरानी भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण विषय बन सकती है।

यहीं से भारत और नेपाल की सीमाएं अलग-अलग होती हैं।

अब समझिए भारत की क्यों बढ़ी चिंता…

1. चीन के नेटवर्क से होगा संचालन

नेपाल सीमा पर लगाए जा रहे नाइट विजन थर्मल कैमरे चीन में निर्मित बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इन कैमरों का संचालन चीनी इंटरनेट नेटवर्क के माध्यम से किया जाएगा। कैमरों की क्षमता दिन और रात दोनों समय लंबी दूरी तक गतिविधियों की निगरानी करने की है। सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि निगरानी तंत्र का डेटा चीन के सर्वरों या नेटवर्क से होकर गुजरता है तो भारतीय सीमा क्षेत्र से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं की गोपनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। यही वजह है कि इस परियोजना को केवल सीमा सुरक्षा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सामरिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है।

2. 2016 में चीन से समझौता हुआ था

नेपाल लंबे समय से अपनी सीमा चौकियों को आधुनिक तकनीक से लैस करने की योजना पर काम कर रहा था। इसी उद्देश्य से वर्ष 2016 में नेपाल और चीन के बीच तकनीकी सहयोग को लेकर समझौता हुआ था। इसके बाद भारत-नेपाल सीमा पर कैमरे लगाने के लिए विभिन्न स्थानों का सर्वे कराया गया। नेपाल सरकार ने वर्ष 2019 में परियोजना के सर्वे, चयन और तकनीकी अध्ययन के लिए करीब एक करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की थी। झूलाघाट समेत कई सीमावर्ती क्षेत्रों में संभावित स्थानों का आकलन उसी समय कर लिया गया था।

3. कालापानी विवाद के बाद बढ़ा ढांचा

वर्ष 2020 में कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को लेकर भारत-नेपाल के बीच विवाद सामने आने के बाद नेपाल ने सीमा क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी थीं। नेपाल ने कालापानी से सटे छांगरू गांव में एपीएफ का बटालियन मुख्यालय स्थापित किया। इसके अलावा डुमलिंग, जौलजीबी, लाली, झूलाघाट, पंचेश्वर, रूपालीगढ़ और तातोपानी सहित कई स्थानों पर 15 से अधिक बॉर्डर आउट पोस्ट बनाई गईं। अब इन्हीं चौकियों को थर्मल कैमरों और अन्य हाईटेक निगरानी प्रणालियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे सीमा पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सके।

उत्तराखंड को नेपाल से जोड़ने वाला अंतरराष्ट्रीय झूलापुल।

उत्तराखंड को नेपाल से जोड़ने वाला अंतरराष्ट्रीय झूलापुल।

नेपाल से इन जिलों की लगती है उत्तराखंड की सीमा

उत्तराखंड में भारत और नेपाल के बीच 275 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। भारतीय क्षेत्र में यह सीमा पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिलों से होकर गुजरती है, जबकि नेपाल की ओर दार्चुला, बैतड़ी, डडेलधुरा और कंचनपुर जिले इससे जुड़े हैं। दोनों देशों के बीच आवागमन के लिए बनबसा में मोटर पुल और टनकपुर में बैराज मौजूद है। इसके अलावा पिथौरागढ़ जिले में 10 झूलापुल दोनों देशों को जोड़ते हैं। धारचूला के छारछुम में एक नया मोटर पुल भी बनकर तैयार हो चुका है, जिससे सीमा पार संपर्क और सुगम हुआ है।

सैन्य विशेषज्ञ बोले- चीन के कैमरे चिंता का विषय

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल एसपी गुलेरिया का कहना है कि भारत-नेपाल के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से बेहद मजबूत रहे हैं और दोनों देशों के बीच खुली सीमा होने के बावजूद कभी कड़ी निगरानी व्यवस्था की विशेष आवश्यकता महसूस नहीं की गई। हालांकि हाल के वर्षों में नेपाल द्वारा सीमा क्षेत्र में सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और चीन की तकनीक के इस्तेमाल को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्रों में स्थापित निगरानी उपकरणों की तकनीकी क्षमता और उनके डेटा नेटवर्क का आकलन सुरक्षा के नजरिए से महत्वपूर्ण है। यदि कैमरों का संचालन वास्तव में चीनी नेटवर्क के माध्यम से हो रहा है, तो इससे सीमा क्षेत्र से जुड़ी संवेदनशील जानकारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ सकते हैं।

भारत-नेपाल सीमा पर आने-जाने वाले लोगों से पूछताछ और पहचान संबंधी जानकारी जुटाते एसएसबी एवं पुलिस के जवान।

भारत-नेपाल सीमा पर आने-जाने वाले लोगों से पूछताछ और पहचान संबंधी जानकारी जुटाते एसएसबी एवं पुलिस के जवान।

जानिए भारत ने क्या कदम उठाए…

1. झूलापुलों पर हर आवाजाही का डिजिटल रिकॉर्ड

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित अंतरराष्ट्रीय झूलापुलों और प्रमुख प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। झूलाघाट समेत कई स्थानों पर फेस आईडी कैमरों के जरिए सीमा पार करने वाले लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां आने-जाने वालों की पहचान, गतिविधियों और आवाजाही के पैटर्न पर नजर रख रही हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि का तुरंत पता लगाया जा सके।

2. SSB-पुलिस की संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर

सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए सशस्त्र सीमा बल (SSB) और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त गश्त तेज कर दी है। सीमावर्ती गांवों, अंतरराष्ट्रीय पुलों और संवेदनशील मार्गों पर नियमित निगरानी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां स्थानीय लोगों से भी लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और खुफिया सूचनाएं जुटाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित सुरक्षा चुनौती से समय रहते निपटा जा सके।

3. स्कैनिंग मशीनों से जांच, घुसपैठ रोकने पर फोकस

झूलाघाट और धारचूला जैसे प्रमुख सीमा चौकियों पर सामान की जांच के लिए स्कैनिंग मशीनें लगाई गई हैं। सीमा पार ले जाए जा रहे सामान की गहन जांच के साथ यात्रियों के दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का फोकस तस्करी, मानव तस्करी, नशीले पदार्थों की आवाजाही और अवैध घुसपैठ जैसी गतिविधियों को रोकने पर है। इसके लिए सीमा क्षेत्र में चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।

काठमांडू का मेयर रहते हुए बालेन शाह ने ग्रेटर नेपाल का नक्शा अपने ऑफिस में लगाया था। इसमें हिमाचल के पश्चिमी कांगड़ा से लेकर पश्चिम बंगाल में पूर्वी तीस्ता के एरिया को ग्रेटर नेपाल का हिस्सा बताया गया है।

काठमांडू का मेयर रहते हुए बालेन शाह ने ग्रेटर नेपाल का नक्शा अपने ऑफिस में लगाया था। इसमें हिमाचल के पश्चिमी कांगड़ा से लेकर पश्चिम बंगाल में पूर्वी तीस्ता के एरिया को ग्रेटर नेपाल का हिस्सा बताया गया है।

नेपाल के PM बालेन शाह के बयान पर मचा था विवाद

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कहा था कि केवल भारत ने ही नेपाली क्षेत्रों पर अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कुछ भारतीय इलाकों पर कब्जा किया हुआ है। उन्होंने इस पूरे मामले की भारत और नेपाल द्वारा संयुक्त रूप से जांच कराने की बात कही थी।

बयान सामने आते ही नेपाल में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और कई सांसदों ने बालेन शाह से अपने दावे के समर्थन में सबूत पेश करने या बयान वापस लेने की मांग की। इसके बाद नेपाल की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया, जबकि भारत-नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में भी इस बयान को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई थीं।

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