मुजफ्फराबाद 1 घंटे पहले
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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सोमवार को विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग होगी। पिछले कई महीनों से यहां विरोध प्रदर्शन, हिंसा, गिरफ्तारियां और सरकारी कार्रवाई जारी है।
यह विवाद उन 12 विधानसभा सीटों को लेकर है, जो भारतीय के जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान जाकर बसे शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं।
इमरान खान की पार्टी PTI और विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही JAAC ने चुनाव के बहिष्कार का फैसला किया है। वहीं पाकिस्तान के पूर्व PM नवाज शरीफ ने PoK का प्रधानमंत्री बनने की इच्छा जताई है।

चुनाव से पहले क्यों भड़का पूरा इलाका?
इन प्रदर्शनों का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) कर रही है। सरकार ने 5 जून को प्रस्तावित प्रदर्शन से कुछ दिन पहले ही इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया।
इसके बाद संगठन के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ नेता भूमिगत हो गए, जबकि कुछ अब भी पुंछ डिवीजन के मुख्यालय रावलाकोट में धरना स्थलों से आंदोलन चला रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है। कई जगह लगातार धरने और सड़क जाम हुए हैं।
स्थिति इतनी खराब हो गई कि बैंक लगातार दो सप्ताह तक बंद रहे। अधिकांश क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं अब भी बंद हैं। भारत की सीमा से सटा पुंछ डिवीजन, जहां सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन हुए, कई सप्ताह तक लगभग पूरी तरह सील रहा। इससे वहां आटा और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई।
दूसरी ओर सरकार और अदालत का कहना है कि इन सीटों को केवल संविधान संशोधन के जरिए ही हटाया जा सकता है।

PoK में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ जून में प्रदर्शन करते स्थानीय लोग। (यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।)
चुनाव तीन चरणों में क्यों हो रहे हैं?
45 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव मूल रूप से 27 जुलाई को होने थे। लेकिन लगातार तनाव के कारण चुनाव तीन चरणों में कराने का फैसला लिया गया।
वोटिंग की तारीख
27 जुलाई- मीरपुर डिवीजन
2 अगस्त- मुजफ्फराबाद डिवीजन और शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटें
10 अगस्त- पुंछ डिवीजन, जहां सबसे अधिक तनाव बना हुआ है।
JAAC का कोई नेता चुनाव नहीं लड़ रहा है। संगठन ने अपने समर्थकों से चुनाव का बहिष्कार करने की अपील की है।
12 शरणार्थी सीटों पर सबसे ज्यादा विवाद
PoK विधानसभा में कुल 45 निर्वाचित सीटें हैं। इनमें 12 सीटें भारतीय प्रशासित जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान आकर बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं।
यही 12 सीटें पूरे विवाद की जड़ हैं। सरकार कहती है कि ये सीटें ऐतिहासिक और संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा हैं।
JAAC का कहना है कि जो लोग पाकिस्तान के दूसरे शहरों में रहते हैं, उन्हें PoK की सरकार बनाने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
उनका कहना है कि इन 12 सीटों की वजह से स्थानीय मतदाताओं की राय का असर कम हो जाता है और अक्सर केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी को फायदा मिलता है।
JAAC का कहना है कि इन 12 सीटों का फायदा PML-N और PPP जैसी पार्टियां उठाती हैं।

इन सीटों की शुरुआत कब हुई?
- इसकी शुरुआत 1960 में लागू चुनावी व्यवस्था से हुई थी।
- 1964 के कानून में इसे और मजबूत किया गया।
- 1970 के कानून में भी इसे बरकरार रखा गया।
- 1974 के अंतरिम संविधान में इसे औपचारिक संवैधानिक दर्जा मिला।
- 2018 में संविधान के 13वें संशोधन के जरिए इसे फिर से पुष्टि दी गई।
नवाज शरीफ और बिलावल ने झोंकी पूरी ताकत
इन चुनावों के महत्व का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पीएमएल-एन और पीपीपी दोनों ने अपने शीर्ष नेताओं को प्रचार में उतारा।
पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ लंबे समय बाद पीओके में सक्रिय नजर आए। उनके साथ पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज भी प्रचार में पहुंचीं। चुनावी सभाओं में नवाज शरीफ ने मेट्रो और मोटरवे जैसी विकास परियोजनाओं का वादा किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से यह भी कह दिया कि अगर पार्टी चाहे तो मरियम नवाज भी प्रधानमंत्री बन सकती हैं। यह बयान मीडिया की सुर्खियां बन गया।
दूसरी ओर पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी पूरे दमखम के साथ चुनाव प्रचार किया। गिलगित-बाल्टिस्तान चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के बाद पीपीपी को उम्मीद है कि पीओके में भी उसे फायदा मिलेगा।
नवाज शरीफ ने PoK को दूसरा घर बताया
चुनावी माहौल के बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के प्रमुख नवाज शरीफ ने मुजफ्फराबाद की एक चुनावी रैली में बड़ा वादा किया।
उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से उन्हें PoK का प्रधानमंत्री बनाने का आग्रह करेंगे, ताकि वे खुद क्षेत्र के विकास की निगरानी कर सकें।
नवाज ने कहा कि PoK उनके लिए पंजाब जितना ही प्रिय है। उन्होंने दावा किया कि उनके पूर्वज कश्मीर से थे और इसलिए यह इलाका उनके लिए दूसरे घर जैसा है।
इस चुनाव में PML-N का मुख्य मुकाबला पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से माना जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस्लामाबाद में दोनों दल केंद्र सरकार में सहयोगी हैं, लेकिन PoK में वे एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं।

2021 में इमरान खान की पार्टी ने बनाई थी सरकार
PoK विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। पिछला चुनाव 2021 में हुआ था, जिसमें इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने।
हालांकि, अगले कुछ वर्षों में PoK की राजनीति लगातार अस्थिर रही। मई 2022 में नियाजी ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद PTI ने सरदार तनवीर इलियास को प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में अदालत की अवमानना के मामले में PoK हाईकोर्ट ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया, जिससे उन्हें पद छोड़ना पड़ा।
इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। हालांकि, बाद में उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को एक स्वतंत्र नेता के तौर पर पेश किया। नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उनकी सरकार भी गिर गई। इसके बाद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर ने प्रधानमंत्री पद संभाला।















