पंजाब के मंडी गोबिंदगढ़ के दो भाइयों ने ऐसा फर्जी कारोबार खड़ा किया, जिसमें न कोई माल खरीदा गया, न बेचा गया, फिर भी कागजों पर हजारों करोड़ रुपए का टर्नओवर दिखा दिया गया। आरोप है कि दोनों भाइयों ने गरीब और जरूरतमंद लोगों के आधार, पैन और वोटर आईडी जुटा
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इन कंपनियों के जरिए 720 करोड़ रुपए के फर्जी बिल काटे गए, सरकार से 108 करोड़ रुपए का फर्जी टैक्स लाभ लिया गया और आखिरकार 25 बैंक खातों से 3089 करोड़ रुपए नकद निकाल लिए गए। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे खेल का भंडाफोड़ किसी मुखबिर ने नहीं, बल्कि अलग-अलग कंपनियों में इस्तेमाल हो रहे एक ही मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी ने किया।
घोटाले का यह खेल 2018 में शुरु हुआ और 2024 तक चलता रहा। बैंक अफसरों ने 2024 में गड़बड़ी की जानकारी डीजीजीआई को दी। 9 अक्टूबर 2024 को डीडीजीआई ने रेड की और घोटाले के मास्टरमाइंड दोनों भाइयों को गिरफ्तार किया। 9 महीने जेल में रहने के बाद उनकी जमानत हो गई।
इसके बाद ईडी ने इसकी जांच शुरू की और पूरे सबूत जुटाने के बाद 19 जून 2026 को लुधियाना पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी। पुलिस कमिश्नर के आदेश पर उसी दिन 5 आरोपियों अमित गोयल, मनीष कुमार, गौरव अग्रवाल, गुरदीप सिंह, बलवंत सिंह व कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ थाना जमालपुर में FIR दर्ज की।
स्टेप बाय स्टेप जानिए पूरा मामला…
अध्याय-1: गरीबों के दस्तावेजों से खड़ी हुईं 27 कंपनियां
ED ने पुलिस को दी शिकायत में पूरी जानकारी दी है कि दोनों भाई किस तरीके से फर्जी कंपनियां बना रहे थे। उन्होंने बताया कि अमित गोयल और मनीष कुमार ने आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब लोगों को निशाना बनाया। मामूली पैसों का लालच देकर या नौकरी लगाने के नाम पर उनके पैन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज (KYC) हासिल कर लिए।
इन्हीं दस्तावेजों पर उन्होंने 25 कंपनियां रजिस्टर्ड करवा लीं। जबकि, दो कंपनियां अमित गोयल ने अपने पैन पर बनाईं। आरोपियों ने यह खेल 2018 में शुरू किया।

अध्याय-2: बिना माल बेचे 720 करोड़ के बिल
कागजों पर खड़ी की गईं इन 27 शेल कंपनियों के जरिए देश की कई अन्य बड़ी लाभार्थी कंपनियों को फर्जी इनवॉइस यानी बिना माल की डिलीवरी के सिर्फ बिल जारी किए गए। इन बिलों की कुल कीमत 720.97 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।
शिकायत के अनुसार, बिना माल खरीदे जो फर्जी बिल लाभार्थी कंपनियों को दिए गए थे, उनके आधार पर उन कंपनियों ने सरकार से 108.49 करोड़ रुपए का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर लिया। जो टैक्स सरकारी खजाने में जाना चाहिए था, वह इन कंपनियों ने आपस में बांट लिया।
अध्याय 3: पैसा कैसे घूमता था

अध्याय 4: आखिर मोबाइल नंबर ने कैसे फंसा दिया?
आरोपी बैंकों में करोड़ों रुपए का लेनदेन करने लगे तो बैंककर्मियों को इस पर शक होने लगा। मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा तो उन्होंने उन खातों को मॉनिटर करना शुरू किया। बैंकों ने जब खातों को मॉनिटर किया और उनका रिकार्ड देखा तो पता चला कि इन सभी खातों में एक ही मोबाइल नंबर और एक ही ईमेल आईडी रजिस्टर थी।
बैंक अधिकारियों को इस वित्तीय लेन–देन पर शक हुआ और उन्होंने डीजीजीआई को इसकी सूचना दी। डीजीजीआई ने जब मामले की पड़ताल की तो लेन–देन करने वाली कंपनियां फर्जी निकली और डीजीजीआई ने दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया।
छापेमारी में फर्जी निकले रिकॉर्ड में दर्ज पते
DGGI लुधियाना जोनल यूनिट ने जब कागजों में दर्ज कंपनियों के पतों पर छापेमारी की, तो वहां जमीन पर कोई गोदाम या ऑफिस नहीं मिला। कंपनियां सिर्फ फाइलों में चल रही थीं। DGGI ने फिर मुख्य आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी करके सर्च ऑपरेशन चलाया।
अध्याय 5: छापे मारकर टीमों ने सामान बरामद किया

अध्याय 6: ED को मोबाइल में क्या मिला?
जांच एजेंसियों ने जब मोबाइल और लैपटॉप का डिलीट डेटा रिकवर किया तो करोड़ों रुपए के फर्जी इनवॉइस, वॉट्सऐप चैट और लेन-देन के रिकॉर्ड सामने आए। इससे एजेंसियों को समझ आ गया कि पूरा नेटवर्क सिर्फ कागजों पर कारोबार दिखाकर नकदी घुमा रहा था।

अध्याय 7: अब तक क्या कार्रवाई हुई?
- DGGI ने रेड कर दोनों भाइयों को पकड़ा: लुधियाना पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार DGGI को खुफिया तंत्र से इस फ्रॉड की जानकारी मिली तो उन्होंने ट्रैप लगा दिया। DGGI के अफसरों ने 2024 में दोनों भाइयों के इस शातिर खेल को पकड़ लिया और 9 अक्टूबर 2024 को रेड करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
- दोनों भाई 9 महीने जेल में रहे: दोनों भाई लगभग 9 महीने जेल में रहे। इसके बाद दोनों आरोपियों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2025 को नियमित जमानत पर रिहा किया गया। अदालत ने उनकी आवाजाही पर कई कड़ी शर्तें लगाईं।
- कारण बताओ नोटिस जारी किया: शिकायत के अनुसार, DGGI लुधियाना ने 21 फरवरी 2025 को आरोपियों और उनकी फर्मों को एक विस्तृत कारण बताओ नोटिस जारी कर रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की और इसकी परतें खोलनी शुरू कीं।

- ED के सामने गुनाह कबूला: ED के अफसरों का दावा है कि अमित कुमार गोयल ने स्वीकार किया कि वह साल 2018 से एक सक्रिय एंट्री ऑपरेटर के रूप में काम कर रहा था, जो बिना माल की सप्लाई के सिर्फ बिल बेचता था और कमीशन काटकर नकदी वापस करता था।
- जमालपुर थाने में ताजा FIR दर्ज: ED के सहायक निदेशक सूरज कुमार यादव ने लुधियाना के पुलिस कमिश्नर को इस मामले में एक शिकायत दी। पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा ने थाना जमालपुर पुलिस को इस मामले में FIR दर्ज करने के आदेश दिए। पुलिस ने FIR में धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (दस्तावेजों की जालसाजी), 468 और 471 लगाई गई हैं। FIR में अमित कुमार गोयल, मनीष कुमार, गौरव अग्रवाल (बाबा बालक नाथ और जेएसजी स्टील रोलिंग मिल्स से जुड़ा), गुरदीप सिंह (मेसर्स सिंह ट्रेडिंग कंपनी) और बलवंत सिंह (मेसर्स बलवंत एंड संस) के नाम शामिल किए हैं।


SHO बोले- ED से रिकॉर्ड मांगा गया
इस मामले में लुधियाना के थाना फोकल पॉइंट के SHO प्रमोद राज ने बताया कि ईडी से इस मामले का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है। जैसे ही ईडी रिकॉर्ड उपलब्ध करवाएगी, उसके बाद आरोपियों को पकड़ने के लिए रेड की जाएगी।
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