राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोही होने का इल्ज़ाम लगाया। कहा, 2023 के बाद जितने भी चुनाव हुए सब फर्जी हैं, बीजेपी ने जितने भी चुनाव जीते, सब ‘वोट चोरी’ से जीते, 2023 के बाद जितने भी कानून बने वो सब असंवैधानिक हैं क्योंकि जिस सरकार ने कानून बनाए वो ‘वोट चोरी’ से बनी। राहुल गांधी ने दावा किया कि वो जो बातें तीन साल से कह रहे हैं, अब दो चुनाव आयुक्तों ने भी मान ली। राहुल ने कहा कि सबके खिलाफ anti-incumbency होती है लेकिन मोदी के खिलाफ जनता में कोई नाराजगी नहीं दिखती। इसकी एक ही वजह है कि ज्ञानेश कुमार ‘वोट चोरी’ में बीजेपी की मदद कर रहे हैं।
बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस का चुनावी इतिहास खोलकर रख दिया। कहा, जिस जमाने में कांग्रेस चुनाव जीतती थी, तब voter ID नहीं होते थे, बूथ लूटे जाते थे। जबसे CCTV कैमरे लगे, Voter card बने वोटों की लूट बंद हुई और कांग्रेस के लिए चुनाव जीतना मुश्किल हो गया। सुधांशु त्रिवेदी ने गिनाया कि कांग्रेस 92 बार चुनाव हारी है और अब अपनी हार को छुपाने के बहाने बना रही है। राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस मुख्यत: ज्ञानेश कुमार को धमकाने के लिए थी। राहुल गांधी ने तो ये गिनाया कि पिछले तीन साल में उन्होंने ‘वोट चोरी’ के बारे में क्या-क्या कहा, पर वो कोई नई बात नहीं कह पाए। राहुल ने 10 बार, 10 तरह से कहा कि हमें पता है, हमारे पास information है, पर तीन-चार महीने में बताएंगे। अभी क्यों नहीं बताते? इंतजार किस बात का? असल में वोट चोरी का कोई प्रमाण नहीं है।
The Indian Express की रिपोर्ट दो चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच internal मतभेद के बारे में है। उसमें कहीं नहीं कहा गया है कि ज्ञानेश कुमार ने या सरकार ने चुनाव में धांधली की, उल्टा दोनों Election Commissioners ने तो ये कहा कि ज्ञानेश कुमार सरकार की भी नहीं सुनते। Form-6 बदलने से पहले उन्हें सरकार से पूछना चाहिए था, जो उन्होंने नहीं पूछा।
बीजेपी की तरफ से सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी को याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल में 49 साल से, ओडिशा में 26 साल से, उत्तर प्रदेश में 37 साल से और गुजरात में 31 साल से कांग्रेस की सरकार नहीं है। तो क्या ये ‘वोट चोरी’ की वजह से हुआ? ये भी बेकार की बात है कि बीजेपी पर anti-incumbency का असर नहीं हुआ। 2014 से लेकर अब तक बीस चुनाव ऐसे हैं, जो बीजेपी, anti-incumbency की वजह से हारी लेकिन राहुल गांधी बिना किसी सबूत के, बार-बार ‘वोट चोरी’ ‘वोट चोरी’ का रट लगाते हैं।
इसे कहते हैं, थोथा चना, बाजे घना…
यूपी चुनाव: कांग्रेस सपा के पीछे क्यों पड़ी है?
उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार की शुरुआत की। अखिलेश के स्वागत के लिए बुलडोजर भी लाए गए थे। बुलडोजर से ही अखिलेश को मालाएं पहनाई गई। अखिलेश यादव राहुल गांधी के चुनाव क्षेत्र रायबरेली में थे। कांग्रेस का कोई नेता उनकी रैली में नजर नहीं आया। गठबंधन को लेकर कांग्रेस और सपा के नेताओं के बीच तल्खी नजर आ रही है। यही तल्खी अखिलेश के भाषण में दिखी। अखिलेश ने कहा कि कोई भी पार्टी या नेता ये न समझे कि वो सीट मांगेंगे और गठबंधन में उन्हें सीट मिल जाएगी। वो उसी पार्टी को वही सीट देंगे, जिस पर उसकी जीत की गारंटी होगी।
अखिलेश की रथयात्रा को लेकर कांग्रेस और सपा नेताओं के बीच जुबानी जंग छिड़ गई। कांग्रेस की तरफ से इमरान मसूद और आसिम वकार बैटिंग कर रहे हैं तो सपा ने इकरा हसन, एस. टी. हसन और आशु मलिक को मैदान में उतारा। इकरा हसन ने कांग्रेस नेताओं को हद में रहने की नसीहत दी। कहा, कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी हो सकती है लेकिन यूपी में तो अखिलेश यादव के पीछे ही चलना पड़ेगा। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबदुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा कि अखिलेश ने अपने रथ का रंग भी भगवा कर लिया, इसलिए अब मुसलमानों को इस रथ यात्रा से दूर रहना चाहिए।
किसी को अखिलेश का ‘भगवा रथ’ पर बैठना बुरा लगा तो किसी को उनका पोस्टर पसंद नहीं आया। लेकिन असली बात इक़रा हसन ने कही। इकरा ने कहा कि यूपी में तो कांग्रेस को अखिलेश यादव के पीछे ही चलना होगा। इसकी दो वजहें हैं, पिछले कई दिन से इमरान मसूद और आसिम वकार जैसे कांग्रेस नेता सपा पर वार कर रहे हैं और ये साफ है कि वो इस तरह का हमला अपने दम पर तो नहीं करेंगे। दूसरी बात ये कि रायबरेली में कांग्रेस सारे चुनाव सपा की मदद से जीतती आई है। कहने को तो ये कांग्रेस का गढ़ है पर राहुल गांधी भी लोकसभा का चुनाव अखिलेश यादव की मदद से जीते थे। इसलिए हैरानी हुई कि रायबरेली में जब अखिलेश ने कैंपेन लॉन्च किया, तो कांग्रेस का कोई नेता दिखाई नहीं दिया। उल्टे, कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि यहां से यात्रा शुरू करने से पहले राहुल से पूछ लेना चाहिए था।
लगता है, ये तकरार सिर्फ प्रेशर बनाने के लिए है, चुनाव आते-आते सुलझ जाएंगी। सपा और कांग्रेस का फोकस मुस्लिम वोट पर है लेकिन योगी की नजर सनातनियों की एकता पर है।
बिहार में महिलाओं पर जुल्म: पुलिस कहां सोई पड़ी है?
बिहार से फिर बुरी खबरें आईं, जमुई के बाद दरभंगा, बांका और समस्तीपुर में भी बेटियों के साथ सरेआम बदसलूकी की घटनाएं हुईं। समस्तीपुर के कर्पूरीग्राम में एक नाबालिग लड़की को कुछ गुंडों ने सड़क पर घेर लिया। उसके साथ बदसलूकी की, इस शर्मनाक करतूत का वीडियो बनाया। लड़की ने डर के कारण इस घटना की शिकायत पुलिस से नहीं की लेकिन गुंडों ने ये वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया।
जब मामला सामने आया तो पुलिस को पता लगा ये वारदात 15 सितंबर की है। वीडियो के आधार पर गुंडों की पहचान राहुल कुमार, अवधेश पासवान, रामबाबू सहनी और विकास कुमार के तौर पर हुई। पुलिस ने कुछ ही घंटों में चारों को गिरफ्तार कर लिया। समस्तीपुर पुलिस का कहना है कि जो लोग मूकदर्शक बनकर देख रहे थे, उनकी धरपकड़ कर उसने पूछताछ की जाएगी।
बांका में मंदार पर्वत घूमने आई एक लड़की के साथ बदसलूकी की गई, लड़की के साथ मारपीट की गई। गुंडों ने अपनी इस शर्मनाक करतूत का वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। अब पुलिस अपराधियों की खोज कर रही है। मुद्दा बेटियों की सुरक्षा का है, तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर वार किया। कहा कि बिहार में कानून और व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, अपराधी बेलगाम हो गए हैं, कानून का डर खत्म हो गया है। चिराग पासवान ने कहा, लगता है बिहार में पुलिस का इक़बाल खत्म हो गया है। पुलिस को अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करना चाहिए, बहन-बेटियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता। लेकिन जेडीयू के नेता और मंत्री अशोक चौधरी ने शर्मनाक बात कही। उन्होंने कहा, ऐसी घटनाएं तो अमेरिका और जापान में भी होती है।
बीजेपी नेता और मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा, ये सब सरकार को बदनाम करने की साजिश है, कुछ लोग साजिशन बेटियों के साथ गलत हरकत करते हैं, उसका वीडियो बनाते हैं, फिर उसे सोशल मीडिया पर डालते हैं, ताकि सरकार को निशाना बनाया जा सके। इस तरह के मामलों में भी अगर कोई सरकार का बचाव करने की कोशिश करता है तो ये अपराधियों का समर्थन करने जैसा है। ये निहायत ही शर्मनाक है कि जमुई के बाद समस्तीपुर और बांका में भी बिहार की बेटी के साथ घिनौना गुनाह हुआ। यहां भी पुलिस को वीडियो पोस्ट होने के बाद ही घटना की जानकारी मिली। इसके दो मतलब हैं। एक तो अपराधियों के दिल में पुलिस का कोई डर नहीं है, दूसरा, जो लड़कियां इस अपराध का शिकार हुईं, वो डर के कारण पुलिस में रिपोर्ट नहीं करतीं। इसलिए चिराग पासवान का ये सवाल सही है कि पुलिस के इक़बाल का क्या हुआ?
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