नई दिल्ली9 मिनट पहले
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8 जुलाई को पीएम मोदी के ऑस्ट्रेलिया पहुंचने पर उनका वंदे मातरम् गीत बजाकर स्वागत किया गया था।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रगान जन-गण-मन और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को नए निर्देश जारी किए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि नियमों में पहले से तय है कि किन कार्यक्रमों में दोनों को गाना या बजाना जरूरी है।
मंत्रालय ने कहा कि एक ही कार्यक्रम में दोनों में से पहले वंदे और फिर जन-गण-मन होगा। जिन राज्यों में राज्य गीत होता है, वहां भी सीक्वेंस का पालन करना होगा। 9 जुलाई को सभी राज्यों और मंत्रालयों को पत्र भेजा गया, जिसकी जानकारी शुक्रवार को सामने आई है।
सभी राज्यों से कहा गया है कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत हमेशा उनके असली शब्दों, सही उच्चारण और तय नियमों के अनुसार ही गाया और बजाया जाए। इसके लिए दोनों की ऑफिशियल कॉपी मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड की गई है।

28 जनवरी को पहली बार आदेश आया
- इससे पहले 28 जनवरी को भी सरकार ने सभी राज्यों को यही आदेश दिया था। इसमें मुताबिक सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत में राष्ट्रगीत बजाया जाएगा।
- वंदे मातरम् के समय हर व्यक्ति को खड़ा होना होगा। राष्ट्रगीत के सभी 6 अंतरे गाए जाएंगे। इनकी कुल अवधि 3.10 मिनिट है। पहले दो अंतरे गाए जाते थे।
- सिनेमा हॉल को नए नियमों से दूर रखा गया है। यानी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम बजाना और खड़ा रहना अनिवार्य नहीं होगा।
- अगर किसी न्यूजरील या डॉक्यूमेंट्री फिल्म के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत बजाया जाता है, तो दर्शकों को उस दौरान खड़ा होना जरूरी नहीं होगा।
बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था
भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।
1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गई थीं।
वंदे मातरम एक संस्कृत वाक्यांश है, जिसका मतलब है- हे मां, मैं तुम्हें नमन करता हूं। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम भारत को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने के लिए संघर्ष कर रहे स्वतंत्रता सेनानियों का नारा बन गया था।

गणतंत्र दिवस परेड में वंदे मातरम की झांकी निकली थी
दिल्ली में कर्तव्य पथ पर मुख्य परेड में इस साल 77वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य परेड की थीम वंदे मातरम रखी गई थी। परेड में संस्कृति मंत्रालय ने वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने का जश्न मनाने वाली झांकी निकाली थी। इस झांकी को मंत्रालयों और विभागों की कैटेगरी में बेस्ट झांकी का अवॉर्ड मिला।

26 जनवरी 2026 को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड के दौरान संस्कृति मंत्रालय की झांकी की तस्वीर।
वंदे मातरम् पर संसद में हुआ था विवाद
- वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र में इस पर विशेष चर्चा हुई थी। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार बंगाल चुनाव को देखते हुए इसे मुद्दा बना रही है।
- भाजपा ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति के तहत वंदे मातरम् के कुछ हिस्से हटाने का आरोप लगाया। इसके समर्थन में 1937 में जवाहरलाल नेहरू द्वारा सुभाष चंद्र बोस को लिखी चिट्ठी का हवाला दिया।भाजपा का दावा था कि चिट्ठी में नेहरू ने वंदे मातरम् की कुछ पंक्तियों पर मुस्लिम समुदाय की आपत्ति का जिक्र किया था। बहस के दौरान जेपी नड्डा ने राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान और तिरंगे के बराबर दर्जा देने की मांग की।
- पीएम मोदी ने लोकसभा में कहा था, ‘कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए और वंदे मातरम के टुकड़े कर दिए। नेहरू को लगता था कि इससे मुसलमानों को चोट पहुंच सकती है।’
- पीएम ने कहा, ‘वंदे मातरम के साथ विश्वासघात क्यों हुआ। वो कौन सी ताकत थी, जिसकी इच्छा बापू की भावनाओं पर भी भारी पड़ी। मोदी ने एक घंटे की स्पीच में 121 बार वंदे मातरम बोला था।
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