Supreme Court Vs High Court; Judgement Pronouncement Deadline Order Update | ACTPnews

Supreme Court Vs High Court; Judgement Pronouncement Deadline Order Update


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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाईकोर्ट्स को निर्देश दिया है कि किसी भी मामले का फैसला रिजर्व रखने के बाद उसे 3 महीने में सुना दिया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो रजिस्ट्रार जनरल मामले को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने रखेंगे।

CJI सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि फैसलों में देरी होने से जो नुकसान होता है, उसकी भरपाई नहीं की जा सकती।

मामलों पर बहस और दलीलें खत्म होने के बाद फैसला रिजर्व रखने की तारीख सभी हाईकोर्ट अपनी वेबसाइट पर भी फ्लैश करेंगे।

बेंच ने कहा कि जमानत याचिकाओं के आदेश भी उसी दिन सुनाए जाएं। अगर किसी केस में फैसला रिजर्व रखा जाता है, तो उन्हें अगले दिन जरूर सुनाया और अपलोड किया जाए।

दरअसल, शुक्रवार को पिला पहन और झारखंड सरकार से जुड़ा एक मामला CJI की बेंच में सुनवाई के लिए पहुंचा था।

दावा किया गया कि कई हाईकोर्ट फैसले लंबे समय तक रिजर्व रखते हैं। मामलों में लगातार हो रही देरी से निपटने के लिए बेंच ने ये निर्देश जारी किए।

फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के बाकी निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश देते हुए कहा कि निचली अदालतों को जमानत से जुड़े मामलों में फैसला सुनाने की जानकारी हाईकोर्ट्स को देनी होगी। फैसलों का एक्शन लिया जाने वाला हिस्सा खुली अदालतों में सुनाया जाए। बाकी का आदेश 7 दिन में अपलोड किया जाए।

फैसले के मुख्य हिस्सा, अगर 15 दिनों के भीतर अपलोड नहीं किया जाता है, तो इसके लिए आवेदन किया जा सकता है। यदि 30 दिनों के भीतर भी कारण अपलोड नहीं किए जाते हैं, तो मामले को वापस लेने और सुनवाई के लिए किसी दूसरी बेंच में लिस्टेड किए जाने का आवेदन दिया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग

सुप्रीम कोर्ट में इस समय 92,385 पेंडिंग मामले हैं। कोविड के बाद ई-फाइलिंग बढ़ने से मामलों की संख्या लगातार बढ़ी है। केंद्र सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को राज्यसभा में बताया था कि देशभर के कोर्ट में कुल 5.49 करोड़ से ज्यादा केस पेंडिंग हैं। इसमें 90,897 मामले सुप्रीम कोर्ट और देश के 25 हाईकोर्ट में 63,63,406 मामले पेंडिंग थे।

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