supreme court Waste Dumping Action | ACTPnews

supreme court Waste Dumping Action


नई दिल्ली27 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने ठोस कचरा प्रबंधन नियम के पालन पर राज्यों की रिपोर्ट आने के बाद सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि कचरे की अवैध ट्रांसपोर्ट और अवैध डंपिंग करने वालों की पहचान की जाए। जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि ऐसे वाहनों और उनके मालिकों या ऑपरेटरों पर सख्त कार्रवाई करें।

कोर्ट ने कहा कि हर जिले की वेबसाइट पर ठोस कचरा प्रबंधन के लिए अलग पेज बनाया जाए। कलेक्टर इस पेज पर कचरा प्रबंधन की मौजूदा स्थिति, किए जा रहे सुधार और पुराने कचरे की तस्वीरें अपलोड कराएंगे और रिपोर्ट देंगे। सालों से जमा पुराने कचरे के निपटारे की समयसीमा नहीं बढ़ेगी।

जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एसवीएन की बेंच ने कचरा प्रबंधन नियमों की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट की कमेटी बनाई है। इसमें केंद्र के पांच मंत्रालयों के सचिव शामिल होंगे, जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव संयोजक होंगे। यह देशभर में नियमों के पालन की निगरानी करेगी, निर्देश देगी और अनुपालन समीक्षा करेगी।

कोर्ट ने रेलवे से पूछा- कचरा कैसे संभालेंगे

यह आदेश भोपाल के डॉ. सुभाष चंद्र पांडेय की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कचरा प्रबंधन की अहमियत बताते हुए महात्मा गांधी के कथन ‘जो शारीरिक श्रम किए बिना खाता है, वह चोरी का अन्न खाता है’ का जिक्र किया।

कोर्ट ने पहली बार रेलवे को दायरे में लिया। कहा- रेलवे स्टेशनों, ट्रैक और प्लेटफॉर्म में रोज बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। मॉनिटरिंग कमेटी रेलवे से जवाब लेकर बताए- अभी क्या व्यवस्था है, आगे क्या कदम उठाएंगे।

मामले में कोर्ट की बड़ी टिप्पणी-आदेश

  • कचरा प्रबंधन को सिर्फ सरकारी योजना मानकर नहीं चलाया जा सकता, बल्कि लोगों की आदतें बदलने पर काम करना होगा।
  • इसके लिए स्कूलों में भी इसकी पढ़ाई शामिल करनी चाहिए। अगर बच्चों को सही और काम की जानकारी दी जाए, तो वे अपने घर में भी लोगों को समझा सकते हैं। कलेक्टर स्कूलों और घरों को जोड़कर जागरूकता अभियान चलाएं और उन्हें उदाहरण के तौर पर तैयार करें।
  • हर इंसान कचरा फैलाता है, लेकिन सभी चाहते हैं कि सफाई का काम सिर्फ सफाई कर्मचारी ही करें। अभी लोगों पर केस करने से बचा जा रहा है, ताकि पहले कचरा प्रबंधन का अच्छा और असरदार सिस्टम तैयार किया जा सके।
  • कानून ऐसा होना चाहिए, जिससे लोग खुद नियम मानने के लिए प्रेरित हों, सिर्फ सजा के डर से नहीं। लेकिन कानून इतना ढीला भी नहीं होना चाहिए कि लोग उसे गंभीरता से लेना ही छोड़ दें।

स्वच्छ भारत मिशन के अफसरों के तबादले पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन पर काम कर रहे अधिकारियों को लक्ष्य पूरा होने तक उनके पद से नहीं हटाया जाना चाहिए। कोर्ट के मुताबिक, काम सही तरीके से चलता रहे, इसलिए अधिकारियों का लगातार बने रहना जरूरी है।

अगर किसी अधिकारी को हटाना जरूरी हो, तो राज्य सरकार को पहले सुप्रीम कोर्ट की निगरानी कमेटी से अनुमति लेनी होगी और ठोस कारण बताने होंगे, जैसे खराब कामकाज या खास परिस्थिति।

सुप्रीम कोर्ट में पिछली 2 सुनवाई

19 फरवरी 2026: कोर्ट ने संविधान के ‘अनुच्छेद 21’ का हवाला देते हुए कहा था कि प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ वातावरण में जीना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा था कि देश में रोज 1.70 लाख टन से अधिक ठोस कचरा बन रहा है, जिसका वैज्ञानिक निस्तारण नहीं हो रहा।

29 अप्रैल 2026: इस आदेश में कोर्ट ने प्रशासनिक और वित्तीय अड़चनों को दूर करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया था कि वे 5 मई की सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से वर्चुअली पेश हों और अपनी पूरी कार्ययोजना व जवाब कोर्ट के सामने रखें।

——————————

ये खबर भी पढ़ें…

मध्य प्रदेश में कचरा मैनेजमेंट में कलेक्टरों को सीधी कार्रवाई की पावर, ऑन स्पॉट लगेगा जुर्माना, SC ने सभी राज्यों से मांगा रोडमैप

सुप्रीम कोर्ट में भोपाल की आदमपुर कचरा खंती में बार-बार लग रही आग की सुनवाई ने देशभर की वेस्ट मैनेजमेंट व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोर्ट ने संकेत दिए कि कचरा प्रबंधन के लिए एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत कलेक्टरों को सीधे अधिकार देने और मोबाइल कोर्ट चलाने का प्लान तैयार किया जाएगा, ताकि मौके पर ही कार्रवाई और जुर्माना हो सके। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *