Toyota Hilux: Why Houthi Rebels Use This Pickup in Yemen Conflict | ACTPnews

Toyota Hilux: Why Houthi Rebels Use This Pickup in Yemen Conflict


सना52 मिनट पहले

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यमन के लाल सागर तट पर पिछले हफ्ते हूती लड़ाकों का बड़ा काफिला नजर आया। इसमें बड़ी संख्या में टोयोटा हिलक्स पिकअप शामिल थीं। कई गाड़ियों पर मशीनगन और रॉकेट लॉन्चर लगे थे। आम तौर पर सामान ढोने और रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल होने वाली ये गाड़ियां यहां युद्ध में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की तरह नजर आ रही थीं।

हिलक्स का युद्ध में इस्तेमाल नया नहीं है। करीब 45 साल से यह गाड़ी दुनिया के अलग-अलग संघर्षों में विद्रोहियों और आतंकियों के बीच नजर आती रही है।

इसकी मजबूत बनावट, खराब रास्तों पर चलने की क्षमता और पीछे के खुले हिस्से में हथियार लगाने की सुविधा इसे ऐसे गुटों के लिए उपयोगी बनाती है।

इराक में ISIS से लेकर यमन के हूतियों और अफ्रीका के अलग-अलग सशस्त्र गुटों तक, कई संगठनों ने टोयोटा की पिकअप का इस्तेमाल किया है।

हूती लड़ाकों ने मोचा शहर पर कब्जे के लिए कई टोयोटा गाड़ियों का इस्तेमाल किया। (यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।)

हूती लड़ाकों ने मोचा शहर पर कब्जे के लिए कई टोयोटा गाड़ियों का इस्तेमाल किया। (यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।)

आतंकियों को टोयाटा हिलक्स इतनी पसंद क्यों है?

हिलक्स के लड़ाकों और आतंकी संगठनों के बीच इस्तेमाल की एक बड़ी वजह इसकी मजबूती और खराब रास्तों पर आसानी से चलने की क्षमता है।

यह गाड़ी ऐसे इलाकों में भी चल सकती है, जहां सामान्य गाड़ियों का पहुंचना मुश्किल होता है। खासकर रेगिस्तान और ऊबड़-खाबड़ रास्तों में यह गाड़ी उपयोगी साबित होती है।

बीबीसी के कार्यक्रम ‘टॉप गियर’ में भी हिलक्स की मजबूती को परखने के लिए एक प्रयोग किया गया था। इसमें गाड़ी को पेड़ से टकराया गया, कई घंटे समुद्र के पानी में डुबोया गया, ऊंचाई से गिराया गया और भारी वजन के नीचे दबाया गया। इसके अलावा उसे इमारत से टकराया गया और उसमें आग भी लगाई गई। इन सबके बाद भी उसे दोबारा चलाया जा सका।

हिलक्स जैसी गाड़ियों की मरम्मत भी आसान मानी जाती है। इनके स्पेयर पार्ट्स भी आसानी से मिल जाते हैं।

बीबीसी के ‘टॉप गियर’ में टोयोटा हिलक्स की मजबूती परखी गई थी। गाड़ी को कई तरह से नुकसान पहुंचाने के बाद भी इसे दोबारा चलाया जा सका।

बीबीसी के ‘टॉप गियर’ में टोयोटा हिलक्स की मजबूती परखी गई थी। गाड़ी को कई तरह से नुकसान पहुंचाने के बाद भी इसे दोबारा चलाया जा सका।

पिकअप में हथियार लगाकर बना देते हैं ‘टेक्निकल’

टोयोटा हिलक्स जैसी पिकअप के पीछे का हिस्सा खुला होता है। इसमें मशीनगन और दूसरे हथियार लगाए जा सकते हैं। हथियार लगने के बाद ऐसी गाड़ियों को आम तौर पर ‘टेक्निकल’ कहा जाता है।

ये गाड़ियां हल्की होती हैं और खराब रास्तों पर भी चल सकती हैं। इसलिए सशस्त्र गुट इन्हें लड़ाई में इस्तेमाल करते रहे हैं।

‘टेक्निकल’ नाम सोमालिया से आया

हथियारों से लैस पिकअप के लिए ‘टेक्निकल्स’ नाम 1990 के दशक की शुरुआत में सोमालिया में ज्यादा चलन में आया।

उस समय राहत और मदद पहुंचाने वाली संस्थाएं अपने कर्मचारियों और सामान की सुरक्षा के लिए स्थानीय सशस्त्र गुटों को पैसे देती थीं। इसे ‘टेक्निकल असिस्टेंस’ यानी तकनीकी मदद कहा जाता था।

बाद में हथियारों से लैस पिकअप गाड़ियों को ही ‘टेक्निकल्स’ कहा जाने लगा। इसके बाद यह नाम दूसरे युद्धग्रस्त इलाकों में भी इस्तेमाल होने लगा।

यमन में सशस्त्र लड़ाकों के बीच टोयोटा पिकअप का इस्तेमाल लंबे समय से देखा जाता रहा है। यह तस्वीर 2017 में मोचा के पास की है।

यमन में सशस्त्र लड़ाकों के बीच टोयोटा पिकअप का इस्तेमाल लंबे समय से देखा जाता रहा है। यह तस्वीर 2017 में मोचा के पास की है।

1987 के ‘टोयोटा वॉर’ में बदला लड़ाई का तरीका

टोयोटा पिकअप के इस्तेमाल का सबसे चर्चित उदाहरण 1987 का चाड-लीबिया युद्ध है। बाद में इसे ‘टोयोटा वॉर’ यानी ‘टोयोटा युद्ध’ कहा गया।

उस समय लीबिया के पास टैंक, लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर जैसे भारी हथियार थे। इसके मुकाबले चाड के पास बहुत कम हथियार थे।

फ्रांस ने चाड को करीब 400 टोयोटा हिलक्स और लैंड क्रूजर पिकअप दी थीं। इनके साथ एंटी-टैंक और एंटी-एयर मिसाइलें भी थीं।

इन गाड़ियों की रफ्तार और रेगिस्तान में चलने की क्षमता चाड के लिए बड़ा फायदा बनी। वे भारी टैंकों के मुकाबले तेजी से एक जगह से दूसरी जगह जा सकती थीं और जल्दी दिशा बदल सकती थीं।

चाड के लड़ाकों ने इसी का फायदा उठाया। वे लीबिया के धीमे टैंकों के आसपास तेजी से घूमते, हमला करते और दूसरी जगह निकल जाते। फ्रांस की हवाई मदद के साथ चाड ने लीबिया के खिलाफ कई बड़ी जीत हासिल कीं।

इस युद्ध ने दिखाया कि तेज और मजबूत पिकअप गाड़ियां भी भारी सैन्य वाहनों के खिलाफ लड़ाई में बड़ा फायदा दे सकती हैं।

फोटो में लाल रंग की टोयोटा हिलक्स के खुले पिछले हिस्से पर एक बड़ा रॉकेट लॉन्चर लगा दिखाई दे रहा है।

फोटो में लाल रंग की टोयोटा हिलक्स के खुले पिछले हिस्से पर एक बड़ा रॉकेट लॉन्चर लगा दिखाई दे रहा है।

अफ्रीका से पश्चिम एशिया तक पहुंची टोयोटा पिकअप

‘टोयोटा वॉर’ के बाद दूसरे लड़ाकू समूहों ने भी ऐसी पिकअप गाड़ियों की उपयोगिता को समझा। धीरे-धीरे टोयोटा हिलक्स और लैंड क्रूजर जैसी गाड़ियां अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कई संघर्षग्रस्त इलाकों में दिखाई देने लगीं।

तालिबान, अल-कायदा और बाद में आईएस जैसे संगठनों की तस्वीरों और वीडियो में भी टोयोटा की पिकअप गाड़ियां नजर आती रही हैं।

यानी हिलक्स और लैंड क्रूजर सिर्फ आम इस्तेमाल की गाड़ियां नहीं रहीं। कई युद्धग्रस्त इलाकों में ये लड़ाकों और गुरिल्ला गुटों की पहचान का हिस्सा बन गईं।

सीरिया के साल 2014 में रक्का प्रांत में इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने परेड निकाली थी।

सीरिया के साल 2014 में रक्का प्रांत में इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने परेड निकाली थी।

आतंकियों तक इतनी टोयोटा पहुंचती कैसे हैं?

सवाल यह है कि जब टोयोटा सीधे आतंकियों या विद्रोहियों को वाहन बेचने से इनकार करती है, तो उनके पास इतनी बड़ी संख्या में हिलक्स और लैंड क्रूजर पहुंचती कैसे हैं?

2015 में आईएस के तेजी से फैलने के दौरान अमेरिकी आतंकवाद रोधी अधिकारियों ने टोयोटा से इसी बारे में जवाब मांगा था। वे जानना चाहते थे कि आतंकी संगठन इतनी बड़ी संख्या में नई हिलक्स और लैंड क्रूजर कैसे हासिल कर रहा है।

टोयोटा ने कहा था कि उसकी नीति ऐसे संभावित खरीदारों को वाहन बेचने की अनुमति नहीं देती, जो उनका इस्तेमाल अर्धसैनिक या आतंकी गतिविधियों में कर सकते हैं।

लेकिन शोरूम से बिकने के बाद किसी गाड़ी का पूरा सफर ट्रैक करना मुश्किल होता है। पुरानी गाड़ियां चोरी होकर, बिचौलियों के जरिए या अनौपचारिक खरीद-बिक्री के रास्ते कई हाथों से गुजर सकती हैं।

इसी वजह से किसी वाहन के निर्माता के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि आखिर उसकी गाड़ी कुछ समय बाद किसके पास पहुंची।

सीरिया के उत्तरी रक्का प्रांत में सैन्य परेड के दौरान IS के लड़ाके टोयोटा पिकअप गाड़ियों में नजर आए। फोटो- जून 2014

सीरिया के उत्तरी रक्का प्रांत में सैन्य परेड के दौरान IS के लड़ाके टोयोटा पिकअप गाड़ियों में नजर आए। फोटो- जून 2014

इराक में बिक्री बढ़ने पर उठे थे सवाल

टोयोटा के आंकड़ों के मुताबिक, इराक में हिलक्स और लैंड क्रूजर की बिक्री 2011 में करीब 6,000 से बढ़कर 2013 में 18,000 हो गई थी। 2014 में यह संख्या करीब 13,000 रही।

यह वही दौर था जब आईएस ने सीरिया से इराक में बड़ा हमला शुरू किया था और उसका कब्जा बगदाद के बाहरी इलाकों तक पहुंच गया था।

हालांकि, बिक्री बढ़ने से यह साबित नहीं होता कि ये गाड़ियां सीधे आईएस तक पहुंचीं। लेकिन इसने यह सवाल जरूर खड़ा किया कि संघर्ष से पहले इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियां आखिर किन लोगों ने खरीदीं और बाद में वे कहां गईं।

ऐसा ही एक मामला अमेरिकी प्लंबर की फोर्ड पिकअप का सामने आया था। उसकी गाड़ी बाद में सीरिया में आईएस लड़ाकों के इस्तेमाल में दिखाई दी। खास बात यह थी कि गाड़ी के दरवाजे पर प्लंबर का नाम और फोन नंबर भी लिखा हुआ था।

यह फोटो टोयोटा लैंड क्रूजर की ‘टेक्निकल’ गाड़ी की है, यानी एक सामान्य पिकअप को हथियारबंद लड़ाकू वाहन में बदला गया है।

यह फोटो टोयोटा लैंड क्रूजर की ‘टेक्निकल’ गाड़ी की है, यानी एक सामान्य पिकअप को हथियारबंद लड़ाकू वाहन में बदला गया है।

हूतियों के पास हिलक्स कैसे पहुंची अभी पता नहीं

यमन के लाल सागर तट पर हूती लड़ाकों के पास दिखाई दे रही हिलक्स को लेकर भी यही सवाल है। इन गाड़ियों को उन्होंने कैसे हासिल किया, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

यह पता नहीं है कि उन्होंने इन्हें पुरानी गाड़ियों के रूप में खरीदा, बिचौलियों के जरिए हासिल किया, दूसरे देशों से मंगाया या किसी दूसरे रास्ते से अपने कब्जे में लिया।

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