ट्विशा की 12 मई को भोपाल में संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी। पति समर्थ 7 दिन की पुलिस रिमांड पर है। (फाइल फोटो)
मॉडल-एक्टर ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच अब CBI ने अपने हाथ में ले ली है। एजेंसी ने सोमवार को भोपाल पुलिस की FIR को री-रजिस्टर कर पति समर्थ सिंह और सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया। CBI की स्पेशल क्राइम यूनिट की टीम दिल्ली से भो
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CBI ने दहेज मृत्यु की धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस जांच में 20 लाख रुपए अतिरिक्त दहेज मांगने की बात सामने आई थी। इसी आधार पर एजेंसी ने FIR दर्ज की। मामले में SIT प्रमुख रजनीश कश्यप कौल को फरियादी बनाया गया है।
इधर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आरोपी सास गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी किया है। राज्य सरकार और ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दो दिन में जवाब मांगा है। याचिका में ट्रायल कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत को चुनौती दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 27 मई को होगी।
सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि गिरिबाला सिंह जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। वहीं, उनके वकील मृगेंद्र सिंह ने कोर्ट में कहा कि यह आरोप गलत है और उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए समय चाहिए।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी आरोप लगाया कि ट्विशा की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह जांच में बाधा डाल रही हैं। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि मामले की जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित की जाएगी।
उधर, भोपाल जिला कोर्ट ने पुलिस प्रतिवेदन पेश नहीं होने पर मामले की सुनवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत ने पुलिस को अगली तारीख तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
समर्थ सिंह को एसआईटी की टीम उसके घर लेकर पहुंची। स्पॉट वेरिफिकेशन कराया गया।
समर्थ सिंह और गिरिबाला से ढाई घंटे पूछताछ
सोमवार शाम करीब 7:30 बजे SIT की टीम समर्थ सिंह को बाग मुगलिया एक्सटेंशन स्थित उसके घर लेकर पहुंची। यहां समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह से करीब ढाई घंटे तक पूछताछ की गई और स्पॉट वेरिफिकेशन कराया गया।
भोपाल पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं में केस दर्ज किया था। 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा के परिवार का आरोप है कि ससुराल पक्ष ने उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया, जबकि ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा ड्रग्स की आदी थीं।
सुप्रीम कोर्ट बोला- दोनों पक्ष बयानबाजी से बचें
इधर, सुप्रीम कोर्ट ने खुद नोटिस लेते हुए सोमवार को इस केस की सुनवाई की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि मीडिया पीड़ित या दूसरे परिवार के बयानों के पीछे न भागे और मामले को कानून के मुताबिक आगे बढ़ने दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठने से वे दुखी हैं।
दरअसल ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। ट्विशा की मौत को ससुराल पक्ष आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने पति और ससुरालवालों पर हत्या का आरोप लगाया है। इस केस से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने खुद नोटिस लिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने ज्यूडिशियरी पर लगे आरोप को नोटिस में लिया
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि मीडिया में छपी एक खबर में ज्यूडिशियरी की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए। यह बताया गया कि ट्विशा का पति एक वकील है और मां पूर्व जिला जज हैं। सवाल यह था कि क्या जांच में अनुचित प्रभाव डाला जा सकता है। यह भी कहा गया कि कोर्ट की संलिप्तता के कारण निष्पक्ष जांच नहीं हो पाई। इसलिए हमने खुद एक्शन लेते हुए कार्यवाही शुरू की।

कोर्ट रूम LIVE
- CJI सूर्यकांत: इस केस में दो या तीन पहलू थे। एक तो दूसरे पोस्टमॉर्टम से जुड़ा था, जो अब पूरा हो चुका है। कुछ चीजों की वजह से हमें थोड़ी तकलीफ हुई है। हम अपने मीडिया के दोस्तों से गुजारिश करेंगे कि वे पीड़ित परिवार या दूसरे परिवार के बयानों के पीछे न भागें। चीजों को कानून और प्रक्रिया के हिसाब से ही आगे बढ़ने दें।
- CJI सूर्यकांत: मृतक की सास एक रिटायर्ड जिला जज हैं। यह अफसोस की बात है कि ऐसा कहा जा रहा है कि कोर्ट निष्पक्ष सुनवाई की इजाजत नहीं दे रही है। हमें इस पर कोई शक नहीं है कि पीड़ित और आरोपी, दोनों ही जांच में सहयोग करेंगे। हमें अपनी राज्य एजेंसियों या CBI पर भी कोई शक नहीं है, जो भी जांच करेगा, वह निश्चित रूप से जांच को उसके अंजाम तक पहुंचाएगा और सच का पता लगाएगा।
- आरोपी के वकील सिद्धार्थ दवे: मेरा बयान अगले ही दिन अखबारों में छप गया।
- SG तुषार मेहता: रिटायर्ड जज एक चैनल से दूसरे चैनल पर घूम-घूमकर मृतका की बदनामी ही कर रही हैं। यह मामला अब CBI को सौंप दिया गया है। इसे सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए, लेकिन मीडिया और उसके दखल की वजह से ही कई बातें सामने भी आई हैं।
- CJI सूर्यकांत: हमारी एकमात्र चिंता यही है कि कोई भी पक्ष मीडिया में जाकर बयानबाजी न करे। यह मामला हम तक सिर्फ मीडिया के जरिए ही आया था।
- ट्विशा के पिता के वकील सिद्धार्थ लूथरा: FIR दर्ज करवाने में तीन दिन की देरी हुई। सबूतों को सुरक्षित रखने में भी लापरवाही बरती गई। सास तो अपने खुद के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स ही पेश कर रही हैं।
- CJI सूर्यकांत: हम आप सभी से गुजारिश कर रहे हैं कि आप कोई भी बयान जल्दबाजी में या समय से पहले न दें।

पुलिस कमिश्नर बोले- समर्थ से पूछताछ कर रहे
भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि ट्विशा के पति समर्थ सिंह से लगातार पूछताछ की जा रही है। उसके बयानों का क्रॉस वेरिफिकेशन हो रहा है। पुलिस बैंक डिटेल्स, कॉल रिकॉर्ड और फरारी के दौरान उसे मदद करने वालों की जानकारी जुटा रही है।
पूर्व जज गिरिबाला सिंह से भी उनके घर जाकर पूछताछ की गई। यहां के सीसीटीवी फुटेज से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। निर्देश मिलते ही केस डायरी सीबीआई को सौंप दी जाएगी।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने में लगेगा समय
दिल्ली एम्स की टीम ने रविवार को ट्विशा की डेडबॉडी का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया था। भोपाल एम्स में करीब 3 घंटे चली प्रक्रिया के बाद टीम भोपाल से रवाना हो गई थी। फोटो-वीडियो और लिखित निष्कर्षों के साथ लौटेगी।
दिल्ली एम्स के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार गुप्ता ने बताया कि ट्विशा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने में अभी कुछ समय लगेगा। हिस्टोपैथोलॉजी और विसरा का एनालिसिस किया जाना बाकी है।

केस से जुड़े 5 बड़े सवाल
1. डबल लिगेचर मार्क पर सवाल
पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ट्विशा के गले पर दो समानांतर लिगेचर मार्क दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फंदा गर्दन पर दो बार लिपटा प्रतीत होता है। इसके बावजूद मौत का कारण सुसाइड बाय हैंगिंग दर्ज किया गया। मायकेवालों का दावा है कि फांसी के सामान्य मामलों में ऐसे निशान कम मिलते हैं।
2. फंदे की बरामदगी में देरी पर सवाल
पहले पोस्टमॉर्टम के समय कथित फंदा न तो डॉक्टरों को सौंपा गया था और न पुलिस ने जब्त किया था। परिजन के सवाल उठाने के बाद 15 मई को फंदा बरामद किया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे मामलों में फंदा आमतौर पर शव के साथ जांच के लिए भेजा जाता है। इस देरी से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं।

घर का वह हिस्सा, जहां ट्विशा की डेडबॉडी मिली।
3. शरीर पर मिले चोट के निशानों की जांच
मायकेवालों के मुताबिक, ट्विशा के शरीर पर चोटों के कई निशान दर्ज हैं। बाएं हाथ की कोहनी और कलाई के बीच कई घाव भी मिले हैं। पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि ये चोटें किसी ठोस वस्तु के प्रभाव से हो सकती हैं।
रिपोर्ट में चोटों की गहराई पर सीमित जानकारी दी गई है।
4. हायॉइड बोन सुरक्षित मिलने पर सवाल
विशेषज्ञों के अनुसार, फांसी के कई मामलों में हायॉइड बोन या थायरॉयड कार्टिलेज प्रभावित होती है। पहले पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में यह हिस्सा सुरक्षित बताया गया है। रिपोर्ट में टिशू में रक्त के निशान दर्ज हैं, लेकिन हड्डी सुरक्षित रहने पर विस्तृत टिप्पणी नहीं है। दूसरी पोस्टमॉर्टम जांच में इस पहलू की भी समीक्षा होगी।

5. लंबाई के अंतर और मेडिकल पैनल पर सवाल
पहले पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में ट्विशा की लंबाई को लेकर भी सवाल उठे हैं। एम्स भोपाल की रिपोर्ट में लंबाई 166 सेंटीमीटर दर्ज है, जबकि परिजन 172 सेंटीमीटर बता रहे हैं। वकील अंकुर पांडेय ने रिपोर्ट की सटीकता पर सवाल उठाए हैं।

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