नई दिल्ली: FCRA बिल को लेकर सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार FCRA बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के पास भेज सकती है। गौरतलब है कि FCRA बिल का मकसद एक तय अथॉरिटी के जरिए विदेशी योगदान और संपत्ति की निगरानी, मैनेजमेंट और निपटान के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करना है।
मंगलवार को सामने आई अहम जानकारी
सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि सरकार ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026’ (FCRA) को विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज सकती है। यह कदम विपक्ष द्वारा FCRA अमेंडमेंट बिल के प्रावधानों पर जताई गई चिंताओं के बीच उठाया जा रहा है।
FCRA बिल को अभी तक लोकसभा के एजेंडे में विचार और पारित करने के लिए शामिल नहीं किया गया है, लेकिन सरकार ने पहले संकेत दिया था कि इसे 12 अगस्त को लिया जा सकता है। विपक्षी दलों ने इस विधेयक का विरोध किया है।
क्या 12 अगस्त को संसद में FCRA बिल पर चर्चा होगी?
हाल ही में मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कहा था कि 7 अगस्त को हुई चर्चा के बाद, FCRA बिल को 12 अगस्त को संसद में चर्चा और मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा और इसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा।
लालदुहोमा ने संसद भवन परिसर में पत्रकारों से कहा था, “हमने नए FCRA बिल को लेकर अपनी चिंताएं गृह मंत्री के सामने रखीं। उन्होंने हमें भरोसा दिलाया कि यह बिल पिछली तारीख से लागू नहीं होगा।”
कानून बनाने की समय-सीमा के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा था कि शाह ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि बिल पर 12 अगस्त को संसद में चर्चा होगी। प्रस्तावित कानून को 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था।
चूंकि एक तरफ ये खबर सामने आई है कि सरकार FCRA बिल को ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के पास भेज सकती है तो ये देखना दिलचस्प होगा कि इस बिल पर 12 अगस्त को संसद में चर्चा होती है या नहीं होती है।
क्या है इस बिल का मकसद?
इस प्रस्तावित कानून का मकसद विदेशी फंडिंग पाने वाले संगठनों पर निगरानी बढ़ाना है। इसके तहत एक मजबूत अथॉरिटी बनाई जाएगी जो उन NGO की संपत्ति पर नियंत्रण कर सकेगी जिनका FCRA लाइसेंस रद्द हो गया है।
हाल ही में भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका को नसीहत भी दी थी और कहा था ‘FCRA बिल हमारा आतंरिक मामला, उसपर निर्णय संसद लेगी।’
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