चीन-तुर्की की करीबी पर बिफरी निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार, एर्दोगन के देश को दिलाई उइगर-तुर्क मुसलमानों की याद | ACTPnews

चीन-तुर्की की करीबी पर बिफरी निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार, एर्दोगन के देश को दिलाई उइगर-तुर्क मुसलमानों की याद


निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार ने चीन और तुर्की के बीच हाल में हुई बातचीत की कड़ी आलोचना की है। निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार के आरोप के मुताबिक, तुर्की, ईस्ट तुर्किस्तान में उइगर और अन्य तुर्क समुदायों की कीमत पर चीन के साथ अपने सुरक्षा सहयोग को बढ़ा रहा है। जान लें कि निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार की तरफ से यह आलोचना बीते 16 जुलाई को तुर्की की उप विदेश मंत्री बेरिस एकिन्सी और चीन के उप विदेश मंत्री मियाओ देयू के बीच हुई मीटिंग के बाद आई है।

चीन को ‘वन चाइना’ पॉलिसी पर मिला तुर्की का साथ

चीन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, कानून प्रवर्तन और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में चीन और तुर्की सहयोग को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं। इस दौरान, तुर्की ने ‘वन चाइना’ पॉलिसी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। साथ ही, पुष्टि की कि तुर्की की जमीन का इस्तेमाल चीन की ‘संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता’ के विरुद्ध नहीं किया जाएगा।

निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार ने की तुर्की के धोखे की बात

तुर्की और चीन की मिठास पर रिएक्शन देते हुए, निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार ने X पर पोस्ट किए गए एक स्टेटमेंट में कहा कि ये बातचीत उइगर, किर्गिज, कजाख और अन्य तुर्की लोगों के साथ दशकों से चले आ रहे धोखे की कड़ी में एक और स्टेप है। निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार के आरोप के मुताबिक, उइगर समुदाय के लोग ईस्ट तुर्किस्तान में चीन के नरसंहार और औपनिवेशिक कब्जे का शिकार हो रहे हैं।

तुर्की से पूर्वी तुर्किस्तान की आवाज बनने का कर चुके हैं आग्रह

निर्वासित सरकार ने यह भी कहा कि उसके विदेश और सुरक्षा मंत्री, सालेह हुदयार, ने हाल में अटलांटिक काउंसिल की तरफ से आयोजित एक प्रोग्राम के बाद तुर्की के उप-विदेश मंत्री लेवेंट गुमरुकु से मीटिंग की थी। खबरों के अनुसार, इस मीटिंग में सालेह हुदयार ने तुर्की से आग्रह किया कि वह पूर्वी तुर्किस्तान की आवाज बने और चीन के साथ अपना खुफिया और सुरक्षा सहयोग खत्म करे। निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरका के दावे के अनुसार, यह सहयोग 1996 से चल रहा है।

‘तुर्क लोगों की मातृभूमि है पूर्वी तुर्किस्तान’

निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार ने तर्क दिया कि पूर्वी तुर्किस्तान, तुर्क लोगों की मातृभूमि है। चीन ने 1940 के दशक के आखिर में इस क्षेत्र पर अटैक किया, आजाद ईस्ट तुर्किस्तान पर कब्जा कर लिया। निर्वासित ईस्ट तुर्किस्तान सरकार ने कहा, ‘यह डिप्लोमेसी नहीं है। यह अपराध में मिलीभगत है।’ साथ ही, ये भी आरोप लगाया कि चीन से तुर्की के लंबे वक्त से चले आ रहे सहयोग ने ईस्ट तुर्किस्तान की आजादी के आंदोलन की निगरानी और दमन को बढ़ावा दिया है। हालांकि, इससे पहले चीन को यूरोप के देश चेक गणराज्य ने करारा जवाब दिया था और कहा था कि ड्रैगन हमें न बताए कि हम किससे रिश्ते बनाएं।

(इनपुट- ANI)

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