रामायण मेकर्स ने जन्माष्ठमी में रावण का पोस्टर शेयर किया:जमकर हुई आलोचना; क्या ये मेकर्स की प्रमोशनल स्ट्रेटेजी, जानिए नेगेटिव पब्लिसिटी से कैसे होता है फायदा-नुकसान | ACTPnews

रामायण मेकर्स ने जन्माष्ठमी में रावण का पोस्टर शेयर किया:जमकर हुई आलोचना; क्या ये मेकर्स की प्रमोशनल स्ट्रेटेजी, जानिए नेगेटिव पब्लिसिटी से कैसे होता है फायदा-नुकसान

रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म रामायण के मेकर्स ने जन्माष्ठमी के दिन रावण का पोस्टर शेयर कर दिया, जिसके चलते उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। कुछ यूजर्स इस चूक से हैरान हैं, तो वहीं कुछ का मानना है कि चर्चा में आने के लिए मेकर्स जानबूझकर ऐसी गलतियां करते हैं। सवाल ये है कि अगर मेकर्स जानबूझकर ऐसी गलती करें, तो नेगेटिव पब्लिसिटी से उन्हें क्या फायदा मिलेगा। दरअसल, फिल्मों से जुड़ी ट्रोलिंग या विवाद अगर सिर्फ चर्चा पैदा करता है तो फिल्म को फायदा मिल सकता है, लेकिन अगर विवाद इतना बढ़ जाए कि दर्शकों की धारणा फिल्म के खिलाफ हो जाए, तो नुकसान भी हो सकता है। एक नजर जानिए, कैसे पड़ता है नेगेटिव पब्लिसिटी का फिल्म पर असर- रामायण मेकर्स ने पोस्ट किया रावण का पोस्टर ये पोस्टर फिल्म रामायण के पेज से शुक्रवार शाम को पोस्ट किया गया था। साथ लिखा गया था, देव लोक, पृथ्वी लोक, पाताल लोक, तीनों लोकों में एख ही राज होगा, रावण राज। पोस्टर आते ही सोशल मीडिया पर मेकर्स की आलोचना शुरू होने लगी। लोगों ने इस पर कई सवाल खड़े किए। पोस्टर से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं पहला सवाल- क्या मेकर्स जानबूझकर, पब्लिसिटी बटोरने और चर्चा में आने के लिए ऐसा कर रहे हैं? दूसरा सवाल- क्या फिल्म से जुड़ी सोशल मीडिया टीम ने गलती से पोस्टर शेयर किया? क्या 4 हजार करोड़ के मेगा बजट की इस फिल्म की रिसर्च टीम इतनी कमजोर है, जिन्हें ये भी नहीं पता कि जन्माष्ठमी में क्या पोस्ट करना चाहिए? इन सवालों के जवाब जानिए- नेगेटिव पब्लिसिटी से फिल्मों को कैसे फायदा होता है? 1. फिल्म की फ्री पब्लिसिटी किसी फिल्म का ट्रेलर, गाना या स्टार उतनी चर्चा न पैदा करे, जितनी कोई विवाद पैदा कर देता है। तो मेकर्स को इसका फायदा मिलता है। मीडिया कवरेज और सोशल मीडिया बहस फिल्म का नाम लगातार लोगों के सामने रखती है। 2. लोगों की उत्सुकता बढ़ती है अगर फिल्म लगातार विवादों में रहती है, तो दर्शक के मन में सवाल उठता है कि आखिर फिल्म में ऐसा क्या है कि इतना विवाद हो रहा है? यही उत्सुकता कई बार टिकट खरीदने की वजह बन जाती है। इसे इन फिल्मों के उदाहरण से समझिए- ‘द कश्मीर फाइल्स’ (2022):फिल्म की रिलीज से पहले और बाद में इसके कंटेंट और राजनीतिक इंटरप्रेटेशन को लेकर जबरदस्त बहस हुई। विवाद ने फिल्म को लगातार हैडलाइन में बनाए रखा। नतीजा यह हुआ कि कम बजट की फिल्म को कई लोगों ने देखा, जिससे फिल्म हिट हुई। अगर फिल्म से जुड़ा कोई विवाद न होता, तो फिल्म चर्चा में न आती। ‘पद्मावत’ (2018): फिल्म को लेकर राजपूत संगठनों का विरोध, कर्णी सेना का आंदोलन, शूटिंग के दौरान तोड़फोड़ और रिलीज रोकने की मांग तक हुई। विवाद इतना बड़ा हुआ कि फिल्म की रिलीज से पहले ही इसका नाम देशभर में चर्चा का विषय बन गया। लगातार टलने वाली फिल्म जब रिलीज हुई, तो लोग विवाद समझने के लिए ही बढ़-चढ़कर फिल्म देखने गए, जिससे फिल्म के कलेक्शन में फायदा हुआ। ‘द केरला स्टोरी’ (2023): फिल्म के कथानक और उसके आंकड़ों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद हुआ। कुछ राज्यों में इसे लेकर विरोध और प्रतिबंध की खबरें आईं, जबकि दूसरी तरफ समर्थकों ने इसे देखने की अपील की। इससे फिल्म को जबरदस्त एक्सपोजर मिला और फिल्म हिट रही। नेगेटिव पब्लिसिटी हमेशा काम नहीं करती? कंट्रोवर्सी तभी फायदा देती है जब दर्शकों की उत्सुकता, फिल्म के खिलाफ बनी नेगेटिविटी से ज्यादा मजबूत हो। इसके उलट कुछ फिल्मों में विवाद ने दर्शकों को फिल्म से दूर भी किया। ‘लक्ष्मी’ (2020): फिल्म के टाइटल और कथित धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोपों को लेकर विवाद हुआ। बॉयकॉट की मांग हुई और सोशल मीडिया पर आलोचना हुई। फिल्म विवाद से चर्चा में रही, लेकिन विवाद इतना बड़ा नहीं था, जो उत्सुकता पैदा कर सके। ‘आदिपुरुष’ (2023): फिल्म के डायलॉग, VFX और रामायण के किरदारों को मॉडर्नाइजेशन कर दिखाने को लेकर रिलीज के बाद भारी आलोचना हुई। यहां नेगेटिव पब्लिसिटी, फिल्म के कॉन्सेप्ट से आगे निकल गई। दर्शकों का एक बड़ा हिस्सा फिल्म की आलोचना करने लगा और वर्ड ऑफ माउथ खराब हुआ। लगातार हो रही है रामायण की आलोचना कास्टिंग पर विवादः बीफ विवाद में रहे रणबीर कपूर को रामायण में भगवान श्री राम का किरदार दिए जाने की लंबे समय से आलोचना हो रही है। इसके अलावा ठीक से हिंदी नहीं बोलने वालीं साई पल्लवी के सीता बनने पर भी विवाद है। रकुलप्रीत सिंह के शूर्पणखा वाले ‘ग्लैमरस लुक’ पर मीम बन रहे। ट्रेलर में स्टारकास्ट के पहनावे पर सवालः फिल्म का ट्रेलर आने के बाद कैकेयी का किरदार निभा रहीं लारा दत्ता के पहनावे पर सवाल उठाए जा रहे हैं। फैंस का मानना है कि लारा दत्ता फिल्म में किसी मॉडर्न डेली सोप की बहु के गेटअप में लग रही हैं। फिल्म के VFX, बजट की भी आलोचनाः ट्रेलर लॉन्च होने के बाद फिल्म के ग्राफिक्स की आलोचना की जा रही थी। इस पर रणबीर कपूर ने सफाई में कहा कि स्मार्टफोन और खराब इंटरनेट कनेक्शन पर लोग ट्रेलर देखकर विजुअल इफेक्ट्स को जज कर रहे हैं। मेकर्स ने दर्शकों से फिल्म को IMAX 3D में देखने का आग्रह किया है। रामलीला महासंघ ने उठाए सवालः श्री रामलीला महासंघ ने फिल्म के डायरेक्टर नितेश तिवारी और प्रोडक्शन कंपनी को एक पत्र लिखकर चेतावनी दी है। महासंघ के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने मांग की है कि इस दिवाली पर देश-विदेश में रिलीज होने से पहले यह फिल्म उनके प्रतिनिधिमंडल को दिखाई जाए। महासंघ का कहना है कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक फिल्म में ऐसे कई सीन हो सकते हैं, जो हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं। अगर विवादित सीन नहीं हटाए गए तो सिनेमाघरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। महासंघ ने अपने पत्र में साल 2023 में आई फिल्म ‘आदिपुरुष’ का उदाहरण दिया है। अर्जुन कुमार ने याद दिलाया कि भूषण कुमार के प्रोडक्शन और प्रभास-सैफ अली खान स्टारर इस फिल्म के कई दृश्यों पर सनातन समाज और रामलीला से जुड़े लोगों ने कड़ा विरोध जताया था। उस फिल्म में सोने की लंका को काला दिखाया गया था और महाज्ञानी रावण व उसकी सेना का चित्रण मंगोल लुटेरों की तरह किया गया था। इस भारी विरोध के कारण करोड़ों के बजट में बनी वह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई थी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *