आज का एक्सप्लेनर:अमित मालवीय की छुट्टी क्यों हुई, गोयल-ईरानी की एंट्री के मायने; नितिन नवीन की नई टीम से जुड़े 6 सवालों के जवाब | ACTPnews

आज का एक्सप्लेनर:अमित मालवीय की छुट्टी क्यों हुई, गोयल-ईरानी की एंट्री के मायने; नितिन नवीन की नई टीम से जुड़े 6 सवालों के जवाब

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में IT सेल इंचार्ज अमित मालवीय को जगह नहीं मिली। वे 2015 से लगातार इस पद पर थे। राम माधव को उपाध्यक्ष और स्मृति ईरानी को महासचिव बनाया गया है। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल को पार्टी ने राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बना दिया है, जिससे उनके मोदी कैबिनेट से विदाई की चर्चा शुरू हो गई है। बीजेपी की नई टीम से जुड़े ऐसे ही बड़े फैसलों के पीछे की कहानी और उसके असर को डिकोड करेंगे, आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बीजेपी IT सेल इंचार्ज अमित मालवीय की छुट्टी क्यों हुई? जवाबः बीजेपी में IT सेल की शुरुआत 2007 में प्रोद्युत बोरा की अगुवाई में हुई थी। 2010 में अरविंद गुप्ता को कमान मिली और उन्होंने 2014 लोकसभा चुनाव में इसका खूब इस्तेमाल किया। 2015 में अमित शाह बीजेपी अध्यक्ष बने, तो अमित मालवीय को IT सेल की कमान सौंपी। मालवीय ने IT सेल को बीजेपी की बेहद ताकतवर और विवादित विंग में बदल दिया। 11 साल बाद अमित मालवीय को हटाए जाने के पीछे हालिया CJP प्रोटेस्ट बड़ी वजह माना जा रहा है। जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी ने NEET पेपर लीक को लेकर अनशन शुरू किया। सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ नैरेटिव बना। सरकार बैकफुट पर दिखने लगी। पीएम मोदी को खुद इंस्टाग्राम पर आकर मोर्चा संभालना पड़ा। इसे बीजेपी IT सेल की नाकामी के तौर पर देखा गया। सीनियर जर्नलिस्ट विजय त्रिवेदी के मुताबिक, ‘जेन-जी विरोध और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे बड़ी वजह बीजेपी का युवाओं से कम्युनिकेशन गैप था। अमित मालवीय अपना काम सही तरीके से नहीं कर सके। इसलिए हटाया गया।’ पॉलिटिकल एनालिस्ट रशीद किदवाई का मानना है कि अगर प्रदर्शन के चलते अमित मालवीय को हटाया गया है, तो ये ‘शूट द मैसेंजर’ जैसा है। अभी बीजेपी में कंटेंट की कमी है। देश में युवाओं में परेशानी है। पेपर लीक हो रहे हैं। ऐसे माहौल में कुछ ठोस कदम उठाने होंगे। अमित मालवीय की जगह 58 साल के दीपक महस्के IT सेल के नए संयोजक बनाए गए हैं। दीपक छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रवक्ता रह चुके हैं। बिहार, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए सोशल मीडिया स्ट्रैटजी और डेटा एनालिसिस कर चुके हैं। 2023 में नितिन नवीन छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के प्रभारी थे। तब दीपक महस्के ने नितिन नवीन के साथ काम किया था। उस वक्त दीपक IT सेल का काम देख रहे थे। दीपक को बीजेपी IT सेल में काम करने का करीब 15 साल का अनुभव है। दीपक महस्के के साथ पहली बार 4 नए सोशल मीडिया सह-संयोजक भी नियुक्त किए गए हैं- महाराष्ट्र से प्रीति गांधी, दिल्ली से शिवानंद द्विवेदी, उत्तराखंड से आलोक भट्ट और हरियाणा से अरुण यादव। यानी बीजेपी IT सेल को डिसेंट्रलाइज भी कर रही है। सवाल-2: स्मृति ईरानी-राम माधव की संगठन में एंट्री के क्या मायने हैं? जवाबः लिस्ट के 65 नामों में दो लोगों की काफी चर्चा है… राम माधव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष स्मृति ईरानी, राष्ट्रीय महासचिव सवाल-3: पीयूष गोयल की संगठन में एंट्री, क्या मंत्री पद छिनेगा? जवाबः केंद्र सरकार में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बीजेपी संगठन में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। बीजेपी में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की अनौपचारिक परंपरा रही है। यानी पार्टी के किसी बड़े पद पर रहते हुए आमतौर पर कोई नेता सरकार में मंत्री पद नहीं संभालता। 2014 में मोदी सरकार बनने से पहले भी पीयूष गोयल बीजेपी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष थे। सरकार बनते ही उन्हें कोयला मंत्रालय का जिम्मा मिला और वे संगठन से सरकार में शिफ्ट हो गए थे। अब 12 साल बाद वे दोबारा कोषाध्यक्ष बने हैं। ऐसे में उनकी मंत्री पद से विदाई की अटकलें तेज हो गई हैं। रशीद किदवाई मानते हैं कि मोदी-शाह की बीजेपी में कोई कयासबाजी नहीं चलती है। कैबिनेट फेरबदल की सुगबुगाहट है। तो कुछ भी हो सकता है। सवाल-4: शिक्षामंत्री पद से इस्तीफे दे चुके धर्मेंद्र प्रधान को संगठन में जगह क्यों नहीं मिली? जवाबः NEET पेपर लीक के बाद चर्चा थी कि धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदल जा सकता है या संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और दबाव के बाद प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। इस्तीफे को अभी एक महीना भी नहीं हुआ है। इतनी जल्दी संगठन में जिम्मेदारी मिलने से गलत नैरेटिव बनता। इस्तीफे को महज दिखावा समझा जाता। छात्र फिर नाराज हो सकते थे। प्रधान को नई जिम्मेदारी देने से पहले बीजेपी पिछला मामला पूरी तरह से ठंडा होने का इंतजार करेगी। इसके अलावा प्रधान को संगठन में पद देने का मतलब होता कि कैबिनेट में उनकी वापसी नहीं होगी। अभी सरकार ये रास्ता खुला रखना चाहती है। कैबिनेट फेरबदल में उन्हें कोई दूसरा मंत्रालय मिल सकता है। प्रधान संबलपुर से सांसद हैं और ओडिशा बीजेपी में उनकी अच्छी पकड़ है। 2024 में पहली बार बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में प्रधान की रणनीति की सबसे बड़ी भूमिका मानी जाती है। इसलिए उन्हें ओडिशा की राजनीति में भी वापस भेजा जा सकता है। सवाल-5: क्या इस घोषणा के बाद मोदी कैबिनेट में भी फेरबदल हो सकता है? जवाबः बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम बनने के बाद अब मोदी कैबिनेट विस्तार की चर्चा है। नई लिस्ट से आने से कैबिनेट फेरबदल के कुछ संकेत मिल रहे हैं… अनुराग ठाकुर: संगठन की लिस्ट में नाम नहीं है। ऐसे में मंत्रिमंडल में जाने की संभावना बढ़ गई है। पार्टी का प्रखर और मजबूत युवा चेहरा हैं। पीयूष गोयल: 12 साल से मोदी कैबिनेट में हैं। अभी केंद्रीय वाणिज्य मंत्री हैं और अब पार्टी के कोषाध्यक्ष भी। ऐसे में बीजेपी की ‘एक व्यक्ति-एक पद’ की पॉलिसी के तहत एक पद छोड़ना पड़ सकता है। तेजस्वी सूर्या: युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, लेकिन अब संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं है। 2019 से बेंगलुरू दक्षिण से सांसद हैं। प्रखर वक्ता और युवा चेहरा हैं। ऐसे में कैबिनेट में जगह मिल सकती है। राघव चड्ढा: चर्चा थी कि AAP से बीजेपी में आए 8 राज्यसभा सांसदों में से किसी को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। संदीप को राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया है। ऐस में राघव के मंत्री बनने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। सवाल-6: बीजेपी की नई टीम से क्या कोई बड़ा शिफ्ट दिख रहा है?
जवाबः नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के 209 दिन बाद बनी नई टीम में कई दिलचस्प बातें हैं… ————
ये भी खबर पढ़िए… भाजपा की नई टीम में सिर्फ 18% महिलाएं: 65 सदस्यों में 51 नए चेहरे, वसुंधरा सबसे उम्रदराज, युवा मोर्चा अध्यक्ष से 38 साल बड़ी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया है। इसमें 65 सदस्य हैं। इनमें से 12, यानी 18% महिला सदस्य हैं। 14 सदस्यों को दोबारा जिम्मेदारी दी गई है, जबकि 51 नए सदस्य हैं। पूरी खबर पढ़िए…



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