आतंक पर बेनकाब हुए तो याद आया कश्मीर, शहबाज ने पानी को लेकर दी गीदड़भभकी; जमकर उगला जहर | ACTPnews

आतंक पर बेनकाब हुए तो याद आया कश्मीर, शहबाज ने पानी को लेकर दी गीदड़भभकी; जमकर उगला जहर


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर कश्मीर राग अलापा है। शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि यह पक्का करने के लिए कि दक्षिण एशिया कभी भी 2025 जैसे टकराव की स्थिति में न पहुंचे, कश्मीर मुद्दे का एक न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान जरूरी है। अपने 23 मिनट के भाषण में शरीफ ने कश्मीर विवाद और इंडस वॉटर ट्रीटी खत्म करने पर भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला। शहबाज शरीफ ने भारत के खिलाफ एक बार फिर प्रोपेगैंडा फैलाने की कोशिश की। साथ ही गीदड़भभकी भी दी। शरीफ ने इंडस वॉटर ट्रीटी को लेकर कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रास्ता बदलने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा।

शहबाज ने अलापा कश्मीर का राग

शहबाज शरीफ ने UNGA में कश्मीर का राग भी अलापा। उन्होंने इस विवाद के “न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान” की मांग की। शरीफ ने कहा कि कश्मीरी लोग संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनी देखरेख में “स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह” कराने के वादे को पूरा करने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कश्मीरियों की कई पीढ़ियों ने “अवैध कब्ज़े, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं, जबरदस्ती गायब किए जाने, यौन हिंसा और सामूहिक सजा” का सामना किया है। शरीफ ने कहा, “लेकिन इसके लिए कश्मीर विवाद का न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान जरूरी है। आठ दशकों से, कश्मीरी लोग संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनी देखरेख में स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह कराने के अपने गंभीर वादे को पूरा करने का इंतजार कर रहे हैं। कई पीढ़ियों ने अवैध कब्ज़े, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं, जबरदस्ती गायब किए जाने, यौन हिंसा और सामूहिक सजा का सामना किया है।”

पाकिस्तानी पीएम ने आगे दावा किया कि जनसांख्यिकीय बदलावों और अन्य उपायों के जरिए जम्मू-कश्मीर की कानूनी स्थिति को बदलने की कोशिशें की गई हैं। उन्होंने कहा, “हाल ही में, जनसांख्यिकीय बदलाव और अन्य अवैध उपायों के जरिए जम्मू-कश्मीर की कानूनी स्थिति को बदलने की कोशिशें की गई हैं। बेबस कश्मीरी माता-पिता अपने उन बेटों और बेटियों के लिए तड़पते हैं जो कभी वापस नहीं लौटते। उनके घर कर्फ्यू और गहरे दुख के साये में खामोश पड़े हैं।” उन्होंने कहा, “बहुत से लोगों के लिए कोई समाधान नहीं है, बस पूरी ज़िंदगी उन कब्रों को खोजने में बीत जाती है जिन पर कोई नाम नहीं होता। इस मंच से, मैं अपने कश्मीरी भाई-बहनों को पूरे अधिकार के साथ भरोसा दिलाता हूं कि हम उन्हें तब तक अपना पूरा राजनयिक, राजनीतिक और नैतिक समर्थन देते रहेंगे जब तक उन्हें आत्मनिर्णय का उनका अटूट अधिकार नहीं मिल जाता। कश्मीर हमेशा से पाकिस्तान की जीवन-रेखा (जुगुलर वेन) रहा है और हमेशा रहेगा।” 

पानी को लेकर दी गीदड़भभकी

शहबाज शरीफ ने कहा, “दक्षिण एशिया में स्थिरता का एक और आधार अब दबाव में है। सिंधु नदी प्रणाली का साझा पानी न केवल पाकिस्तान के लोगों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए जीवन-रेखा है। मौजूदा संधि को रोके रखने का भारत का एकतरफा फैसला पूरी तरह से गैर-कानूनी है। असल में, उसके दावों और कामों, दोनों को ही UN के विशेषज्ञों और हाल ही में कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन ने भी खारिज कर दिया है। हमारा यह सही पक्ष कि संधि अभी भी मान्य, बाध्यकारी और पूरी तरह से लागू है, बिना किसी शक के साबित हो चुका है। पानी का इस्तेमाल कभी भी हथियार के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। नदियों को देशों को जोड़ना चाहिए, न कि उन्हें बांटना चाहिए। इसलिए, पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, उसमें बाधा डालने या उसका रास्ता बदलने की किसी भी कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। भारत को इस बारे में कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।”

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