ऑस्कर 2027 में भारत की ओर से जाएगी ‘गोंधल’, सिर्फ 84 लाख कमाने वाली मराठी फिल्म की कहानी है खास, IMDb पर है 8.9 रेटिंग | ACTPnews

ऑस्कर 2027 में भारत की ओर से जाएगी ‘गोंधल', सिर्फ 84 लाख कमाने वाली मराठी फिल्म की कहानी है खास, IMDb पर है 8.9 रेटिंग


ऑस्कर 2027 में भारत की तरफ से कौन-सी फिल्म दावेदारी पेश करेगी, इसका फैसला हो चुका है। मराठी सिनेमा के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। कोई बॉलीवुड नहीं बल्कि फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने मराठी फिल्म ‘गोंधल’ को ऑस्कर 2027 के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना है। फिल्म का चयन होने के बाद अब यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। अपनी कहानी और विषय को लेकर चर्चा में रही इस फिल्म से अब देशभर के सिनेमा प्रेमियों की उम्मीदें जुड़ गई हैं। ऑस्कर की रेस में भारत की ओर से ‘गोंधल’ का पहुंचना क्षेत्रीय सिनेमा की बढ़ती ताकत और उसकी कहानियों की व्यापक स्वीकार्यता को भी दर्शाता है। अब यह फिल्म बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। खास बात यह है कि इस साल देश की अलग-अलग भाषाओं में बनी 33 फिल्मों ने ऑस्कर के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच चयन समिति ने ‘गोंधल’ को आगे भेजने का फैसला किया। अब ‘गोंधल’ के सामने अगली चुनौती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाने की है। भारत की ओर से चुने जाने के बाद फिल्म की यात्रा अब ऑस्कर की आगे की चयन प्रक्रिया तक पहुंचेगी।

‘गोंधल’ फिल्म की कहानी क्या है?

मराठी फिल्म ‘गोंधल’ की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि में होने वाले पारंपरिक गोंधल अनुष्ठान के बीच आकार लेती है। फिल्म की मुख्य किरदार सुमन एक ऐसे विवाह में फंस जाती है, जिसमें उसे आर्थिक रूप से संपन्न आनंद से शादी करनी पड़ती है, जबकि उसका दिल गोंधली कलाकार साहेबा के लिए धड़कता है। इस रिश्ते से बाहर निकलने के लिए सुमन एक खतरनाक योजना बनाती है। वह आनंद के चचेरे भाई सरजेराव की उसके प्रति दीवानगी का फायदा उठाती है और उसे ऐसे अपराध की ओर धकेलती है, जिसे वह खुद अंजाम नहीं दे सकती। फिल्म में गोंधल की रातभर चलने वाली परंपरा, संगीत और धार्मिक अनुष्ठान कहानी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। प्रेम, लालच, सत्ता, छल और आजादी की चाह के बीच कहानी धीरे-धीरे एक मनोवैज्ञानिक थ्रिलर का रूप लेती है।

‘गोंधल’ की कास्ट और डायरेक्टर

मराठी फिल्म ‘गोंधल’ का निर्देशन संतोष डावखर ने किया है। उन्होंने ही फिल्म की कहानी और पटकथा भी लिखी है। फिल्म में किशोर कदम, इशिता देशमुख, योगेश सोहोनी और निषाद भोईर प्रमुख भूमिकाओं में हैं। इनके अलावा सुरेश विश्वकर्मा, अनुज प्रभु, माधवी जुवेकर, ऐश्वर्या शिंदे, कैलाश वाघमारे, पूनम पाटील और विठ्ठल काले जैसे कलाकार भी अहम किरदारों में नजर आते हैं। बता दें, इस फिल्म को IMDb पर 8.9 रेटिंग मिली है, जिससे जाहिर है कि फिल्म की कहानी शानदार है। क्रिटिक्स ने भी इस फिल्म को काफी सराहा है।

रिलीज और बॉक्स ऑफिस

‘गोंधल’ को 14 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज किया गया था। करीब दो घंटे लंबी यह फिल्म मराठी भाषा में बनी है। फिल्म का संगीत दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा ने दिया है। बॉक्स ऑफिस की बात करें तो फिल्म का प्रदर्शन बहुत बड़ा व्यावसायिक हिट साबित नहीं हुआ। सैकनिल्क के आंकड़ों के मुताबिक ‘गोंधल’ ने भारत में करीब 84 लाख रुपये नेट और लगभग 90 लाख रुपये ग्रॉस का कलेक्शन किया। हालांकि फिल्म को बाद में फिल्म फेस्टिवल सर्किट में काफी पहचान मिली। संतोष डावखर को 56वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में ‘गोंधल’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का सिल्वर पीकॉक पुरस्कार मिला।

33 फिल्मों की रेस में ‘गोंधल’ ने बनाई जगह

ऑस्कर 2027 में भारत की तरफ से कौन-सी फिल्म दावेदारी पेश करेगी, इसका फैसला हो चुका है। मराठी सिनेमा की थ्रिलर फिल्म ‘गोंधल’ को भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर चुना गया है। अब यह फिल्म बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। खास बात यह है कि इस साल देश की अलग-अलग भाषाओं में बनी 33 फिल्मों ने ऑस्कर के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच चयन समिति ने ‘गोंधल’ को आगे भेजने का फैसला किया।

हिंदी की सबसे ज्यादा फिल्में शामिल

ऑस्कर के लिए इस साल सामने आई फिल्मों में भाषाई विविधता देखने को मिली। कुल 33 फिल्मों में 14 फिल्में हिंदी भाषा की थीं, यानी किसी एक भाषा की ओर से सबसे ज्यादा प्रविष्टियां हिंदी सिनेमा से आईं। मराठी, तेलुगु और गुजराती सिनेमा की चार-चार फिल्मों ने भी इस दौड़ में हिस्सा लिया। वहीं तमिल भाषा की तीन फिल्मों को चयन प्रक्रिया में जगह मिली। मलयालम और नागामी भाषा की एक-एक फिल्म भी इस सूची का हिस्सा थीं। अलग-अलग भाषाओं और शैलियों की इन फिल्मों के बीच से ‘गोंधल’ का चुना जाना मराठी सिनेमा के लिए खास उपलब्धि माना जा रहा है।

थ्रिलर कहानी ने खींचा जूरी का ध्यान

‘गोंधल’ की सबसे बड़ी खासियत इसकी कहानी और उसका ट्रीटमेंट बताया जा रहा है। फिल्म में थ्रिलर के साथ ग्रामीण परिवेश और मानवीय रिश्तों को कहानी का हिस्सा बनाया गया है। चयन प्रक्रिया के दौरान फिल्म की मेकिंग और कहानी कहने के अंदाज ने भी जूरी का ध्यान आकर्षित किया। जूरी के मूल्यांकन में फिल्म के सिनेमाई पक्ष और थ्रिलर तत्वों को अहम माना गया। इसी आधार पर ‘गोंधल’ को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की तरफ से पेश करने के लिए चुना गया। हालांकि, आधिकारिक भारतीय एंट्री बनने का मतलब यह नहीं है कि फिल्म को ऑस्कर का अंतिम नामांकन मिल गया है। आगे की प्रक्रिया में अकादमी की ओर से फिल्मों का मूल्यांकन किया जाएगा।

13 सदस्यों की जूरी ने किया चयन

भारत की ऑस्कर एंट्री तय करने के लिए फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने 13 सदस्यों वाली विशेष जूरी बनाई थी। इसमें पी. शेषाद्री, विजय पाटकर, हितू कनोडिया, शांति कुमार, संदीप पराशर, संजय पाटिल, साबू जोसेफ, अनिल थॉमस, विवेक वासवानी, बिजोन दासगुप्ता, हासन, वासन और तनिष्ठा चटर्जी शामिल थे। जूरी के सदस्यों ने ऑस्कर की दावेदारी के लिए भेजी गई सभी फिल्मों को देखने और उनके अलग-अलग पहलुओं का आकलन करने के बाद अपना फैसला लिया। आखिरकार मराठी फिल्म ‘गोंधल’ के नाम पर सहमति बनी और इसे भारत की आधिकारिक प्रविष्टि घोषित किया गया।

PTI Input

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