Highlights
- कीव पर 6 इस्कंदर-M मिसाइलों और 151 ड्रोन से रूसी हमले का दावा किया गया है।
- काला सागर में तीन यूक्रेनी कार्गो जहाजों पर ड्रोन हमले का रूस ने दावा किया।
- NATO सीमा पर बढ़ी हलचल, रोमानिया ने F-35 फाइटर जेट से ड्रोन ड्रिल की।
मॉस्को: रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग अब एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। पिछले कुछ दिनों में रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव समेत कई इलाकों में बड़े हवाई हमले किए हैं। रूसी हमलों में बैलिस्टिक मिसाइलों, ड्रोन और दूसरी मिसाइल प्रणालियों के इस्तेमाल का दावा किया गया है। वहीं काला सागर में भी यूक्रेनी जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबर है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की मदद की तलाश में सर्बिया पहुंचे हैं। दूसरी तरफ NATO के पूर्वी हिस्से में भी सैन्य तैयारियां तेज होती दिख रही हैं। रोमानिया ने सीमा के पास ड्रोन से निपटने के लिए F-35 फाइटर जेट की ड्रिल की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या रूस-यूक्रेन युद्ध का असर अब NATO की जमीन तक पहुंच सकता है?
कीव पर रात में ताबड़तोड़ मिसाइल हमला
रिपोर्ट के मुताबिक, 7 और 8 अगस्त की दरम्यानी रात रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर 6 इस्कंदर-M बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। पहली मिसाइल रात करीब पौने एक बजे कीव में गिरी। इसके बाद अगले करीब 15 मिनट में 5 और मिसाइलें राजधानी की तरफ दागे जाने का दावा किया गया। हमलों के बाद कीव के कई इलाकों में आग लग गई। कई मकानों के जलने और बड़े पैमाने पर नुकसान की तस्वीरें सामने आईं। ब्रोवरी इलाके में एक बच्चे और उसके दादा-दादी के मारे जाने की भी खबर है। कई लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं और राहत-बचाव दल उन्हें तलाश रहे हैं। एक मिसाइल उस फैक्ट्री के पास गिरी, जहां कर्मचारी हमले के दौरान भूमिगत बंकर में छिपे हुए थे।
हमले के बीच कर्मचारियों ने ऐसे बचाई जान
कीव के एक वेयरहाउस कर्मचारी मिखाइल हुकोव ने बताया कि एयर रेड सायरन बजते ही उन्हें बैलिस्टिक हमले का खतरा समझ आ गया था। उन्होंने तुरंत कर्मचारियों के ग्रुप में संदेश भेजकर सभी को शेल्टर में जाने को कहा। हुकोव के मुताबिक, कई कर्मचारी अपने बैग लेने के लिए वापस जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। इसके बाद सभी लोग शेल्टर में चले गए। कुछ ही देर बाद इतने तेज धमाके हुए कि ऐसा लगा जैसे विस्फोट बिल्कुल वेयरहाउस के पास ही हुआ हो।
एक धमाके में ट्रक जल गया, भागकर बची जान
कीव में हुए हमलों के दौरान ट्रक ड्राइवर इवान ब्रागा भी रूसी हमले की चपेट में आए। उन्होंने बताया कि वह कैब के अंदर थे, तभी जोरदार धमाका हुआ और उनके ट्रक में आग लग गई। पास खड़े दूसरे ट्रक में भी आग लग गई। ब्रागा के मुताबिक, उनके पास जरूरी कागजात और सामान निकालने तक का समय नहीं था। वह सिर्फ कपड़ों का एक बैग लेकर बाहर निकल पाए। आग की तेज गर्मी के कारण उनकी पीठ और शरीर के एक हिस्से पर भी जलने की चोट आई। इसके बाद उन्हें वहां से भागना पड़ा।
रूस ने हमले में S-400 का भी इस्तेमाल किया?
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस ने इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ S-400 सिस्टम से दागी जाने वाली मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया। आम तौर पर S-400 को दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को रोकने वाले एयर डिफेंस सिस्टम के तौर पर जाना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने इसे हमले के लिए भी इस्तेमाल किया। इसके साथ ही गेरान सीरीज के ड्रोन भी हमले में शामिल किए गए। बताया गया है कि रूस ने कुल 151 ड्रोन, 6 इस्कंदर-M बैलिस्टिक मिसाइलें और S-400 से दागी गई मिसाइलों का इस्तेमाल किया। यूक्रेन की ओर से 135 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया गया है। हालांकि, यूक्रेनी एयर डिफेंस 6 बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक नहीं पाया।
क्या यूक्रेन की मिसाइल रोकने की क्षमता घटी?
रिपोर्ट में जुलाई के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि रूस ने उस महीने यूक्रेन पर 195 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से यूक्रेन सिर्फ 29 को रोक पाया। यानी इंटरसेप्शन रेट करीब 14 फीसदी बताया गया है। इसी वजह से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस अब सीमित संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों से भी बड़े हमले कर रहा है। साथ ही यूक्रेन के पास मौजूद पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की संख्या को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इस दावे की पुष्टि नहीं हो पाई है कि यूक्रेन ने कुछ मिसाइलें खास तौर पर राष्ट्रपति के महल की सुरक्षा के लिए बचा रखी हैं।
8 यूक्रेनी प्रांतों में हमलों का दावा
रूस के हमलों का असर सिर्फ कीव तक सीमित नहीं बताया गया। 7-8 अगस्त की रात यूक्रेन के कई प्रांतों में हमले और नुकसान की खबरें सामने आईं।
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक:
- जापोरिज्जिया में तीन लोगों की मौत और चार लोग घायल हुए।
- खारकीव में दो लोगों की मौत और सात लोग घायल हुए।
- सुमी में 19 लोगों के घायल होने की खबर है।
- डोनेस्क में एक व्यक्ति की मौत और 15 लोग घायल बताए गए।
- खेरसान में दो लोगों की मौत और 26 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई।
- ओडेसा में एक फुटबॉल स्टेडियम को नुकसान पहुंचने का दावा किया गया।
- नेप्रोपेट्रोवस्क में ड्रोन हमले में एक व्यक्ति के घायल होने की खबर है।
यानी एक ही रात में यूक्रेन के कई हिस्सों में रूसी हमलों का असर दिखाई दिया।
खारकीव में सड़कों के ऊपर लगी ‘मच्छरदानी’
खारकीव से सामने आई तस्वीरें युद्ध की एक अलग तस्वीर दिखाती हैं। यहां सड़कों के ऊपर एंटी-ड्रोन नेट लगाए गए हैं। ये जाल देखने में मच्छरदानी जैसे लगते हैं। इनका मकसद रूसी ड्रोन को सीधे सड़क पर मौजूद लोगों और वाहनों तक पहुंचने से रोकना है। रिपोर्ट के मुताबिक, महंगे एंटी-ड्रोन सिस्टम हर जगह लगाना संभव नहीं होने के कारण कई इलाकों में ऐसे जाल लगाए गए हैं। खारकीव की निवासी इरिना ने बताया कि लोग सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, लोग शांत रहने और मजबूत बने रहने की कोशिश करते हैं और उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब युद्ध खत्म होगा और बच्चे फिर सुरक्षित माहौल में बड़े हो सकेंगे।
आखिर इतनी खतरनाक क्यों है इस्कंदर-M मिसाइल?
रूस की इस्कंदर-M एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली है। इसकी बताई गई अधिकतम रेंज करीब 500 किलोमीटर है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मिसाइल अपनी उड़ान के दौरान रास्ता बदल सकती है और बहुत तेज गति से लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इसकी सटीकता को लेकर भी कई दावे किए जाते हैं। इसमें अलग-अलग प्रकार के वॉरहेड ले जाने की क्षमता बताई जाती है। पारंपरिक हथियारों के अलावा इसके लिए क्लस्टर, बंकर-विरोधी और दूसरे विशेष वॉरहेड विकल्प भी हैं। इसे मोबाइल लॉन्चर से दागा जाता है, जिससे लॉन्च के बाद लॉन्चर को जल्दी दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इससे जवाबी हमले से बचने की क्षमता बढ़ती है।
काला सागर में 3 जहाजों पर हमले का दावा
जंग का एक और मोर्चा काला सागर में दिखाई दे रहा है। रूस ने दावा किया है कि ओडेसा पोर्ट के पास यूक्रेन के तीन कार्गो जहाजों को ड्रोन से निशाना बनाया गया। रूस के मुताबिक, इन जहाजों में NATO देशों से मिले सैन्य उपकरण और हथियार यूक्रेन पहुंचाए जा रहे थे। इन जहाजों पर गेरान-4 ड्रोन से हमला किए जाने का दावा किया गया है। रूस का कहना है कि गेरान-4 को अब पहले से ज्यादा आधुनिक बनाया गया है। इसके अगले हिस्से में बेहतर सेंसर और गाइडेंस सिस्टम लगाए गए हैं। दावा है कि कम्युनिकेशन लिंक टूटने के बाद भी ड्रोन कैमरों और सेंसर की मदद से लक्ष्य को पहचान सकता है। रिपोर्ट में इसकी स्पीड करीब 500 किलोमीटर प्रति घंटे और रेंज 450 से 500 किलोमीटर तक बताई गई है। इसमें पैनोरमिक कैमरे और एंटी-जैमिंग तकनीक होने का भी दावा किया गया है।
यूक्रेन भी रूस की ‘शैडो फ्लीट’ पर कर रहा हमला
हालांकि काला सागर में यूक्रेन भी रूस को लगातार चुनौती दे रहा है। यूक्रेन का दावा है कि उसने काला सागर और अजोव सागर में रूस की तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ के जहाजों को निशाना बनाया है। यूक्रेन ने जुलाई में ‘ऑपरेशन मोलोच्का’ शुरू करने का दावा किया था। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 6 जुलाई के बाद से रूसी शैडो फ्लीट के खिलाफ 218 ड्रोन हमले किए गए। इनमें 134 हमले अजोव सागर और 84 हमले काला सागर में किए जाने का दावा है। यूक्रेन की रणनीति रूस की उन समुद्री सप्लाई लाइनों को कमजोर करना है, जो क्रीमिया के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। रूस ने 2014 में क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था और यूक्रेन तब से वहां रूसी सैन्य और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाता रहा है।
ड्रोन वॉर में हो रहे हैं नए तरह के प्रयोग
रूस ने युद्ध में नए प्रकार के ड्रोन और तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है। रिपोर्ट में ‘वुर्डलाक’ नाम के एक हेक्साकॉप्टर ड्रोन का जिक्र है। इसे मुख्य रूप से सामान पहुंचाने के लिए बनाया गया है। दावा है कि सिग्नल ब्लैकआउट होने के बावजूद यह तय जगह तक सामान पहुंचा सकता है। इसकी अधिकतम गति करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटा और करीब 15 किलो सामान को 30 किलोमीटर तक ले जाने की क्षमता बताई गई है। यह ड्रोन फ्रंटलाइन तक गोला-बारूद, मेडिकल सामान और खाने-पीने की चीजें पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह GPS और गैलीलियो समेत 4 नेविगेशन नेटवर्क पर काम करता है और किसी एक नेटवर्क में दिक्कत आने पर दूसरे नेटवर्क पर स्विच कर सकता है।
यूक्रेनी ड्रोन ठिकानों पर FAB-500 बम से हमले का दावा
पूर्वी यूक्रेन में भी रूसी हमले जारी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, डोनेस्क क्षेत्र के डोब्रोपिलिया इलाके में यूक्रेनी ड्रोन ऑपरेशन साइट्स को निशाना बनाया गया। रूस ने इन ठिकानों पर FAB-500 बमों से हमला किए जाने का दावा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेनी सेना इन जगहों से रूसी सैनिकों पर ड्रोन हमले कर रही थी और रूस ने खुफिया जानकारी के आधार पर इन साइट्स को निशाना बनाया।
रूस ने यूक्रेनी पूर्व सैनिकों की नई ब्रिगेड बनाई?
रिपोर्ट में रूस की एक और रणनीति का जिक्र है। दावा है कि रूस ने ‘फर्स्ट यूक्रेनियन स्पेशल परपज वॉलंटियर ब्रिगेड’ नाम से एक ब्रिगेड तैयार की है। इसमें यूक्रेन के कुछ ऐसे सैनिकों को शामिल किए जाने का दावा है, जिन्हें रूस ने युद्ध के दौरान पकड़ लिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, कई छोटी यूनिट और बटालियनों को मिलाकर यह ब्रिगेड बनाई गई है। इनमें मैक्सिम क्रिवोनोस बटालियन, ओलेक्सी बेरेस्ट बटालियन, अलेक्जेंडर मात्रोसोव दस्ता, मार्टिन पुष्कर दस्ता और स्लोबोडस्की दस्ता शामिल होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के लिए इन सैनिकों की स्थानीय इलाके की जानकारी उपयोगी हो सकती है। हालांकि, युद्धबंदियों को सैन्य सेवा में इस्तेमाल करने का सवाल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत गंभीर कानूनी मुद्दा है।
जेलेंस्की पहुंचे सर्बिया, मदद की तलाश?
इधर कीव और दूसरे यूक्रेनी शहरों पर हमले जारी रहने के बीच राष्ट्रपति जेलेंस्की सर्बिया पहुंचे हैं। सर्बिया को रूस के करीब माना जाता है और वह रूस के खिलाफ यूरोपीय प्रतिबंधों के कई मामलों में दूसरे यूरोपीय देशों से अलग रुख रखता रहा है। जेलेंस्की की सर्बिया यात्रा ऐसे समय हुई है, जब यूक्रेन को एयर डिफेंस और दूसरी सैन्य मदद की जरूरत है। रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि NATO और अमेरिका ने यूक्रेन को अतिरिक्त इंटरसेप्टर मिसाइलें देने से इनकार किया है।
अब NATO की सीमा पर बढ़ी हलचल
रूस-यूक्रेन युद्ध का सबसे बड़ा सवाल अब NATO को लेकर है। रिपोर्ट में अमेरिकी रक्षा विभाग से जुड़ी एक आकलन रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि रूस भविष्य में किसी NATO देश के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई का प्रयास कर सकता है। इस आकलन में 2029 तक रूस की सैन्य क्षमता को लेकर भी चिंता जताए जाने का दावा किया गया है। हालांकि, रूस ने NATO देशों पर हमले की किसी योजना से इनकार किया है। रूस की ओर से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही NATO से टकराव या पूर्वी यूरोप के देशों पर कब्जे की किसी योजना की बात को खारिज कर चुके हैं।
रोमानिया और बुल्गारिया की सीमा पर दिखे ड्रोन
NATO की पूर्वी सीमा पर रोमानिया और बुल्गारिया को लेकर भी चिंता बढ़ी है। बुल्गारिया की ओर से एक ड्रोन घटना की जानकारी दी गई है। बुल्गारियाई प्रधानमंत्री रुमेन रादेव के मुताबिक, सुबह करीब 8:10 बजे एक ड्रोन बुल्गारियाई हवाई क्षेत्र में दाखिल हुआ और सीमा के अंदर करीब 100 मीटर की दूरी पर एक कंप्रेसर स्टेशन तथा पुराने कारदाम चेकपॉइंट के पास विस्फोट हुआ। बताया गया कि यह जगह रोमानिया के एक कंप्रेसर स्टेशन से करीब 200 मीटर और ट्रांस-बाल्कन गैस पाइपलाइन से जुड़े बुल्गारियाई कंप्रेसर स्टेशन से करीब एक किलोमीटर दूर थी। वहीं, रोमानिया ने अपनी सीमा के पास ड्रोन से निपटने के लिए F-35 फाइटर जेट की ड्रिल भी की।
क्या एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया हैं अगला टारगेट?
रिपोर्ट में NATO से संभावित टकराव की स्थिति में एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया को संभावित निशाने के तौर पर बताया गया है। एस्टोनिया की सीमा रूस से लगती है और नारवा में रूसी मूल की बड़ी आबादी है। यहां रूस सीमित घुसपैठ या हाइब्रिड कार्रवाई से NATO की प्रतिक्रिया परख सकता है। लातविया की भी रूस से संवेदनशील सीमा है और वहां हाइब्रिड हमले की आशंका जताई गई है। लिथुआनिया रूस के मुख्य भूभाग और कैलिनिनग्राद के बीच रणनीतिक जगह पर है। बेलारूस-कैलिनिनग्राद के बीच सुवालकी कॉरिडोर पर नियंत्रण से बाल्टिक देशों की यूरोप से जमीनी कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।
NATO से भिड़ंत हुई तो क्या होगा?
अमेरिकी राजनीतिक टिप्पणीकार लैरी जॉनसन ने दावा किया कि NATO पहले से ही रूस के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध में शामिल है, क्योंकि NATO देश यूक्रेन को हथियार और खुफिया जानकारी दे रहे हैं। उनके मुताबिक, यूक्रेन NATO देशों से मिले ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल रूस के खिलाफ कर रहा है। उनका कहना है कि अगर रूस और NATO के बीच सीधा युद्ध शुरू हुआ तो रूस सिर्फ सीमित नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं करेगा, बल्कि बड़े स्तर पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
क्या रूस सच में NATO पर हमला करने वाला है?
रूस और NATO के बीच तनाव निश्चित तौर पर बढ़ा है, लेकिन NATO के किसी सदस्य देश पर रूस के संभावित हमले को लेकर किए जा रहे दावों को सावधानी से देखना जरूरी है। रूस ने NATO देशों पर कब्जे या हमला करने की योजना से इनकार किया है। दूसरी तरफ पश्चिमी देशों में रूस की सैन्य क्षमता और भविष्य की रणनीति को लेकर चिंता बनी हुई है। फिलहाल रूस-यूक्रेन युद्ध का दायरा यूक्रेन की सीमा से बाहर सीधे NATO क्षेत्र तक नहीं पहुंचा है, लेकिन काला सागर, ड्रोन हमलों और NATO की पूर्वी सीमा पर बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने तनाव जरूर बढ़ा दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि रूस और यूक्रेन की यह लंबी जंग किस हद तक फैलती है और NATO इसमें सीधे तौर पर कितना शामिल होता है।
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