महिला आरक्षण पर विपक्षी पार्टी के समर्थन से गदगद हुए रिजिजू, बोले- ‘दिल से स्वागत है’ | ACTPnews

महिला आरक्षण पर विपक्षी पार्टी के समर्थन से गदगद हुए रिजिजू, बोले- 'दिल से स्वागत है'


Highlights

  • किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण पर SAD के समर्थन का खुलकर स्वागत किया।
  • सुखबीर बादल ने महिला आरक्षण और निष्पक्ष परिसीमन तुरंत लागू करने की मांग की।
  • SAD ने सभी राज्यों की सीटें 50 प्रतिशत बढ़ाने वाले सरकारी प्रस्ताव का समर्थन किया।

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर शिरोमणि अकाली दल के समर्थन का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को बराबर राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना चाहिए। साथ ही, उन्होंने निष्पक्ष और समान परिसीमन की जरूरत पर भी जोर दिया। रिजिजू ने शनिवार को X पर कहा कि SAD का यह फैसला शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से पहले कायम की गई मिसाल के बाद आया है।

‘फैसले का दिल से स्वागत करता हूं’

बता दें कि रिजिजू महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं और उन्होंने इस बारे में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी बातचीत की है। महिला आरक्षण विधेयक पर SAD का समर्थन मिलने के बाद रिजिजू ने लिखा,

‘मैं शिरोमणि अकाली दल के इस बेहद महत्वपूर्ण फैसले का दिल से स्वागत करता हूं, जो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से कायम की गई मिसाल के बाद लिया गया है। हमें महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एक निष्पक्ष और समान परिसीमन सुनिश्चित करने के साथ एकजुट होकर काम करना चाहिए, ताकि उन्हें बराबर प्रतिनिधित्व मिल सके।’

विधेयक को तुरंत लागू करने की मांग

दरअसल, SAD प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने शनिवार को पार्टी की वरिष्ठ नेताओं की बैठक में महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत लागू करने की मांग की। चंडीगढ़ में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में संसद के सामने मौजूद कई अहम विधायी मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद बादल ने X पर कहा कि शिरोमणि अकाली दल ने आज चंडीगढ़ में वरिष्ठ नेताओं की बैठक में देश में महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की बराबरी को लेकर पार्टी की सोच सिख गुरुओं की शिक्षाओं से प्रेरित है। बादल ने कहा,

‘शिरोमणि अकाली दल सिख गुरुओं की शिक्षाओं से प्रेरणा लेता है, जिन्होंने महिलाओं की गरिमा, समानता और समान अधिकारों की वकालत की। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अपने सदन में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान करके पहले ही एक मिसाल कायम की है।’

परिसीमन पर भी SAD की दो टूक मांग

महिला आरक्षण के अलावा SAD की बैठक में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी ने मांग की कि परिसीमन इस तरह किया जाना चाहिए कि किसी भी राज्य के हित प्रभावित न हों। सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि संसद के सामने मौजूद प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा के बाद शिरोमणि अकाली दल ने सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने वाला निष्पक्ष और समान परिसीमन करने की भी मांग की। SAD ने सीटों की संख्या बढ़ाने के एक खास फॉर्मूले का भी समर्थन किया है। पार्टी का कहना है कि ऐसा कोई राज्य नहीं होना चाहिए जिसे नई व्यवस्था में नुकसान हो। बादल ने कहा,

‘शिरोमणि अकाली दल ने सदन में भारत सरकार की ओर से रखे गए सभी राज्यों की सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के प्रस्ताव का समर्थन किया। पार्टी ने जोर दिया कि महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों को तत्काल किया जाना चाहिए।’

क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम?

सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई यानी 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को संसद के दोनों सदनों ने पारित किया था। हालांकि, इसके लागू होने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। दिए गए विवरण के मुताबिक, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में गिर गया, क्योंकि मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की संवैधानिक जरूरत पूरी नहीं हो सकी। इस विधेयक में विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के साथ-साथ लोकसभा के लिए परिसीमन का प्रस्ताव भी शामिल था।

जानें क्यों अहम है SAD का रुख?

SAD के समर्थन के बाद महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। एक तरफ पार्टी महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग कर रही है, वहीं दूसरी तरफ वह परिसीमन में सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार की बात कह रही है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी SAD के रुख का स्वागत करते हुए महिलाओं के समान प्रतिनिधित्व और निष्पक्ष परिसीमन को साथ-साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। इससे संकेत मिलता है कि महिला आरक्षण के साथ परिसीमन का मुद्दा भी आने वाले समय में राजनीतिक बहस का अहम हिस्सा बना रह सकता है।

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