सुप्रीम कोर्ट बोला- SIR अवैध नहीं:चुनाव आयोग शर्तों के साथ नागरिकता जांच सकता है; SIR में 13 राज्य-UT में 7.41 करोड़ नाम कटे | ACTPnews

सुप्रीम कोर्ट बोला- SIR अवैध नहीं:चुनाव आयोग शर्तों के साथ नागरिकता जांच सकता है; SIR में 13 राज्य-UT में 7.41 करोड़ नाम कटे

सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को वैध और संवैधानिक करार दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने बुधवार को कहा कि SIR मनमाना नहीं है और चुनाव आयोग को यह प्रक्रिया चलाने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा, चुनाव आयोग वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के लिए नागरिकता की जांच कर सकता है, लेकिन यह फैसला सिर्फ चुनावी उद्देश्यों तक सीमित रहेगा। किसी व्यक्ति को अंतिम रूप से गैर-नागरिक घोषित करने का अधिकार आयोग के पास नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि संदिग्ध नागरिकता के आधार पर जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनके नाम 4 हफ्ते में केंद्र सरकार को भेजा जाए। जून 2025 में बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया अब तक 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी हो चुकी है। इस दौरान 7.41 करोड़ वोटर्स के नाम हटाए गए, जिनमें सबसे ज्यादा 2.89 करोड़ नाम उत्तर प्रदेश से कटे। बिहार के बाद पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी SIR कराया गया, जबकि असम में स्पेशल रिवीजन (SR) हुआ। बिहार SIR के खिलाफ दायर याचिकाओं से ही मामला सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। कुल कितनी याचिकाएं थीं इसकी जानकारी नहीं है। SIR पर 5 सवाल और सुप्रीम कोर्ट के जवाब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में अलग-अलग याचिकाओं पर 10 महीने तक लगातार सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि दलीलें सुनने के बाद 5 सवाल सामने आए, जिन पर आदेश दिया जा रहा है। सवाल-1: क्या चुनाव आयोग के पास SIR करने की शक्ति है? आदेश: यह नहीं कहा जा सकता कि चुनाव आयोग ने SIR कराकर अपने अधिकारों से बाहर जाकर काम नहीं किया है। सिर्फ इसलिए इसे गैरकानूनी नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह सामान्य प्रक्रिया से अलग था। SIR का मकसद चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करना नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। सवाल-2: क्या इसका कोई वैध उद्देश्य है और क्या इसके लिए अपनाए गए उपाय सटीक हैं? आदेश: कोर्ट ने कहा कि SIR की प्रक्रिया संतुलित और सही है, इसमें कोई मनमानी नहीं हुई। इसका मकसद वोटर लिस्ट को सही और साफ रखना है ताकि निष्पक्ष चुनाव हो सकें। कोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ने जो कदम उठाए हैं, वे जरूरत से ज्यादा सख्त या गलत नहीं हैं। सवाल-3: क्या SIR ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ और संबंधित नियमों के विपरीत है? आदेश: चूंकि SIR कानूनी रूप से मान्य और उचित है इसलिए यह ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम’ (RP Act) का उल्लंघन नहीं करता है। यह कानून तय करता है कि चुनाव कैसे होंगे, कौन वोट दे सकता है, कौन चुनाव लड़ सकता है और वोटर लिस्ट कैसे बनेगी। सवाल-4: क्या चुनाव आयोग के पास जानकारी या दस्तावेज मांगने का अधिकार है? आदेश: चुनाव आयोग ने जिन दस्तावेजों की मांग की है, उन्हें मनमाना नहीं कहा जा सकता। आधार कार्ड समेत 11 तरह के दस्तावेजों को मान्य माना गया है। कोर्ट के मुताबिक बिना किसी नियम या दिशा-निर्देश के दस्तावेजों की जांच करना भी सही नहीं होगा। सवाल-5: SIR के तहत जिन लोगों के नाम काट दिए गए हैं, उनका क्या होगा? आदेश: जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उनके मामले चुनाव आयोग को 4 हफ्ते के भीतर नागरिकता तय करने वाली संबंधित सरकारी एजेंसी को भेजने होंगे। उस एजेंसी को संबंधित लोगों को नोटिस देना होगा। उन्हें अपनी बात रखने का मौका देना होगा और चुनाव से पहले फैसला करना होगा। अब तक 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR देश के 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR हो चुका है। इनमें अब तक कुल 7.41 वोटर्स के नाम कट चुके हैं। दिल्ली में 30 जून से SIR प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। SIR के पहले फेज में बिहार शामिल था। दूसरे फेज में 9 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश शामिल था। इसमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, यूपी, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार थे। SIR के तीसरे फेज 16 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश कवर होंगे। पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। विपक्ष का आरोप- लोगों से वोटिंग का अधिकार छीना जा रहा विपक्षी का आरोप है कि इस प्रक्रिया से लोगों को वोटिंग के अधिकार से वंचित करने की साजिश हो रही है। ​​विपक्ष का कहना है कि 2003 से आज तक करीब 22 साल में बिहार में कम से कम 5 चुनाव हो चुके हैं, तो क्या वे सारे चुनाव गलत थे। अगर चुनाव आयोग को SIR करना था तो इसकी घोषणा जून के अंत में क्यों की गई। इसका निर्णय कैसे और क्यों लिया गया। अगर मान भी लिया जाए कि SIR की जरूरत है तो इसे बिहार चुनाव के बाद आराम से किया जा सकता था। इतनी हड़बड़ी में इसे करने का फैसला क्यों लिया गया। कांग्रेस ने फैसले पर सवाल उठाए- निष्कासन पहले, निर्णय बाद में कांग्रेस ने SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग लोगों को वोटर लिस्ट से पहले हटाता है और निर्णय बाद में आता है। इस बीच चुनाव हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में भी चुनाव आयोग को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
अभिषेक मनुसिंघवी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सुप्रीम कोर्ट ने एक सिस्टम बनाया है कि जो लोग निष्कासित हुए हैं उन्हें एक अपील का मौका मिलना चाहिए यहां 6 हजार अपीलों में 4 हजार अपील मंजूर हो गई हैं। कहते हैं कि 80% अपील मंजूर हो रही हैं कि इन्हें नहीं हटाया जा सकता था, मगर चुनाव तो खत्म हो गया। तो क्या ये चुनावों पर प्रश्न चिन्ह नहीं है। इस बात पर भी सुप्रीम कोर्ट को टिप्पणी करनी चाहिए थी। BJP बोली- यह कांग्रेस और इंडी गठबंधन की हार है
BJP ने कहा कि राहुल गांधी और इंडी गठबंधन जिस SIR को लेकर देश में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे थे, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि फ्री और फेयर इलेक्शन में SIR से मदद मिली है। इससे कांग्रेस की पोल खुल गई है। यह कांग्रेस की पूर्ण पराजय है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… 19 राज्य-UT में SIR का ऐलान, यहां 37 करोड़ वोटर्स:30 मई से 23 दिसंबर के बीच होगा वेरिफिकेशन; पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर में अगले साल चुनाव चुनाव आयोग ने हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड, दिल्ली समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की है। यह SIR का तीसरा फेज होगा। पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी। इस दौरान 36.73 करोड़ वोटरों का वेरिफिकेशन होगा। पूरी खबर पढ़ें…



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