Coronavirus Origins Funding Exposed; Tulsi Gabbard Vs Anthony Fauci | ACTPnews

Coronavirus Origins Funding Exposed; Tulsi Gabbard Vs Anthony Fauci


वाशिंगटन3 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

अमेरिका की पूर्व खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कार्यालय में अपने अंतिम दिन बड़े वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फॉसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कुछ गोपनीय दस्तावेज जारी कर दावा किया है कि डॉ. फॉसी ने चीन की वुहान लैब को लाखों डॉलर की सरकारी फंडिंग दी थी।

इस पैसे का इस्तेमाल चमगादड़ के कोरोना वायरस को और खतरनाक बनाने वाली रिसर्च के लिए हुआ। आरोप है कि जब महामारी फैली, तो डॉ. फॉसी ने यह बात दबाई कि वायरस लैब से लीक हुआ था। गबार्ड के मुताबिक, डॉ. फॉसी ने 2024 में अमेरिकी संसद के सामने कसम खाने के बाद भी झूठ बोला था।

आरोप- डॉ. फॉसी ने लैब से कोरोना फैलने की बात दबाई

2020 में जब अमेरिका में कोरोना फैला, तो ट्रम्प सरकार ने इससे निपटने की जिम्मेदारी डॉ. फॉसी को सौंपी थी।

किस रिसर्च के लिए वैज्ञानिक ने फं​डिंग दी थी?

आरोप है कि डॉ. फॉसी ने ‘गेन-ऑफ-फंक्शन रिसर्च’ के लिए फंडिंग की थी। यह एक ऐसी वैज्ञानिक रिसर्च है, जिसमें किसी वायरस को लैब के भीतर जानबूझकर ज्यादा ताकतवर, संक्रामक या खतरनाक बनाया जाता है। वैज्ञानिक ऐसा इसलिए करते हैं ताकि यह समझा जा सके कि भविष्य में कोई वायरस इंसानों पर कितना बड़ा हमला कर सकता है और उसकी वैक्सीन कैसे बनेगी, लेकिन इसमें वायरस के लीक होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है।

इस रिसर्च का कोविड-19 के साथ क्या रिश्ता?

गबार्ड का दावा है कि वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में चमगादड़ों के कोरोना वायरस पर यही खतरनाक रिसर्च चल रही थी। माना जा रहा है कि इसी लैब से वायरस दुर्घटनावश लीक हुआ और दुनियाभर में कोरोना महामारी फैली।

सच्चाई छिपाने के लिए क्या खेल खेला गया था?

गबार्ड के कार्यालय के अनुसार, डॉ. फॉसी ने खुद एक ‘फर्जी वैज्ञानिक पेपर’ तैयार करवाया और अपने पसंदीदा वैज्ञानिकों को खुफिया एजेंसियों के पास भेजा। इन वैज्ञानिकों ने आधिकारिक रिपोर्ट में लिखवाया कि कोरोना वायरस लैब से नहीं बल्कि प्राकृतिक रूप से जानवरों से इंसानों में फैला है, ताकि फॉसी का खतरनाक रिसर्च प्रोजेक्ट छिपा रहे।

डॉ. फॉसी पर ये आरोप किस आधार पर लगे हैं?

व्हिसलब्लोअर्स की गवाही से साफ है कि जिन खुफिया विश्लेषकों ने डॉ. फॉसी की ‘प्राकृतिक उत्पत्ति’ वाली थ्योरी पर सवाल उठाए थे, उन्हें कॅरिअर बर्बाद करने की धमकियां दी गईं, प्रताड़ित किया गया और किनारे लगा दिया गया।

डॉ. एंथनी फॉसी डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के दौरान कोरोना महामारी के समय प्रमुख सार्वजनिक हैल्थ एक्सपर्ट के रूप में भी सामने आए।

डॉ. एंथनी फॉसी डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के दौरान कोरोना महामारी के समय प्रमुख सार्वजनिक हैल्थ एक्सपर्ट के रूप में भी सामने आए।

फॉसी पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल

कोरोना महामारी के दौरान डॉ. एंथनी फॉसी कई बार विवादों में रहे। आरोप लगे कि अमेरिकी सरकार से मिले पैसे का एक हिस्सा गैर-लाभकारी संस्था ‘ईकोहेल्थ एलायंस’ के जरिए चीन की वुहान लैब में चमगादड़ों के कोरोना वायरस पर रिसर्च के लिए इस्तेमाल हुआ।

2021 में अमेरिकी संसद की सुनवाई में फॉसी ने कहा था कि उनकी एजेंसी ने वुहान लैब में वायरस को ज्यादा खतरनाक बनाने वाली रिसर्च के लिए फंडिंग नहीं दी। हालांकि, बाद में सामने आए कुछ दस्तावेजों और कांग्रेस की जांच के बाद रिपब्लिकन नेताओं ने उनके बयान पर सवाल उठाए।

फॉसी हमेशा इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं और उनका कहना है कि अभी तक कोरोना की उत्पत्ति को लेकर कोई ठोस और अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है।

ट्रम्प सरकार की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस की हेड थीं तुलसी

ट्रम्प की सरकार की टॉप हिंदू अधिकारी तुलसी गबार्ड ने 22 मई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। तुलसी अमेरिका की ‘डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’ हेड थीं, उनके अंडर में 18 सीक्रेट एजेंसियां काम करती थीं।

फॉक्स न्यूज के मुताबिक, उनके पति एक बेहद दुर्लभ हड्डी के कैंसर से जूझ रहे हैं और गबार्ड इस मुश्किल समय में उनके साथ रहना चाहती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गबार्ड ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात के दौरान उन्हें अपने इस्तीफे की जानकारी दी थी।

गबार्ड ने अपने चिट्ठी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का धन्यवाद भी किया और कहा था कि नेशनल इंटेलिजेंस ऑफिस का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान की बात रही। पूरी खबर पढ़ें…

भारतवंशी नहीं हैं तुलसी गबार्ड

तुलसी को उनके नाम की वजह से कई बार भारतवंशी कहा जाता है। हालांकि, वे भारतवंशी नहीं हैं। वे खुद कई बार ऐसा कह चुकी हैं।

तुलसी का जन्म एक समोअन अमेरिकी परिवार में हुआ था। उनके पिता कैथोलिक थे। मां भी ईसाई थीं जिन्होंने बाद में हिंदू धर्म अपना लिया था। तुलसी भी पहले ईसाई थीं, लेकिन बाद में उन्होंने हिंदू धर्म अपना लिया।

——————-

यह खबर भी पढ़ें…

ट्रम्प बोले-मेलोनी मेरे साथ फोटो खिंचाने के लिए बेताब थीं: इटली PM का जवाब- उनकी कहानी झूठी, विदेश मंत्री ने US दौरा रद्द किया

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान पर नाराजगी जाहिर की है। ट्रम्प ने दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बेताब थीं। इस पर मेलोनी ने कहा कि ट्रम्प की यह कहानी पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *