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नई दिल्ली1 घंटे पहले
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दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लरिश होटल में लगी आग मामले में मालिक लवकेश बजाज को 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। बजाज को पुलिस ने दिल्ली कोर्ट में पेश किया था।
वहीं, बजाज ने पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, आग लगने के दौरान बजाज अपनी कार से जलती हुई इमारत के पास से गुजरा, लेकिन लोगों की मदद करने के बजाय वहां से निकल गया।
उसने बताया कि वह डर के कारण मौके से भाग गया था। उसने यह भी स्वीकार किया कि उसने न तो किसी की मदद की और न ही घर गया। इसके बजाय वह शहर में इधर-उधर घूमता रहा।
बुधवार को लगी इस भीषण आग ने पांच मंजिला इमारत को अपनी चपेट में ले लिया था, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई। घटना के कुछ घंटों बाद पुलिस ने बजाज को हिरासत में लिया था।

दिल्ली पुलिस ने बुधवार रात होटल के सह-मालिक लवकेश बजाज को हिरासत में लिया।
होटल मालिक बोला- मैं नहीं दूसरे लोग संभालते थे काम
गिरफ्तार होटल मालिक लवकेश बजाज ने बताया कि वह खुद होटल की निगरानी नहीं करता था। उसने होटल के मैनेजमेंट, बिलिंग और अकाउंट्स का काम किसी और व्यक्ति को दिया था। उसने यह भी कहा कि होटल में कमरे बड़े करने और अन्य बदलावों की सलाह भी किसी अन्य व्यक्ति ने दी थी।
बजाज ने दावा किया कि सलाह देने वाले व्यक्ति ने उससे कहा था- होटल में ये सारे मॉडिफिकेशन नॉर्मल हैं और दिल्ली में सब चलता है।

आज के अपडेट्स
- दिल्ली सरकार ने सभी मृतकों के लिए 10 लाख रुपये और घायलों के लिए 5 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है।
- मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस ने 10 टीमें बनाई हैं। इनमें से 5 टीमें फरार होटल मैनेजर जय मिश्रा की तलाश में जुटी हैं।
- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मैक्स अस्पताल पहुंचीं और घायलों का हालचाल जाना।
- मरने वालो के परिवार को दिल्ली सरकार 10 लाख रुपए और गंभीर रूप से घायल लोगों को 5 लाख रुपए की सहायता राशि देगी।
- दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, शव को उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
- फोरेंसिक जांच के दौरान कई कमरों से कुकिंग हीटर और अन्य इलेक्ट्रिक सामान मिले हैं।
6 कमरों का लाइसेंस, 25 कमरे चल रहे थे
फ्लोरिश स्टे होटल के पास B&B (बेड एंड ब्रेकफास्ट) के तौर पर सिर्फ 6 कमरों का लाइसेंस था। रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के मुताबिक, पहली मंजिल पर 3 और दूसरी मंजिल पर 3 कमरे दर्ज थे। होटल सिल्वर कैटेगरी में रजिस्टर्ड था। हालांकि, पुलिस का कहना है कि इमारत में करीब 25 कमरे चलाए जा रहे थे।
आग फैली तो लोगों को निकलने का मौका नहीं मिला
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, आग सुबह 8:30 बजे लगी। कुछ मिनट में धुआं पूरी इमारत में फैल गया। ऊपरी मंजिलों पर ठहरे लोगों को निकलने का मौका नहीं मिला। फायर सर्विस, पुलिस और स्थानीय लोगों ने 58 लोगों को बाहर निकाला।
इनमें 35 घायल हैं। इस दौरान 10 पुलिसकर्मी भी घायल हुए। मैक्स अस्पताल ने बताया, 39 लोगों को लाया गया था, जिसमें 18 की अस्पताल आने से पहले मौत हो चुकी थी। 15 आईसीयू में भर्ती हैं और इनमें 8 वेंटिलेटर पर हैं।
मृतकों में 11 विदेशी और 10 भारतीय हैं। विदेशियों में 9 अफ्रीकी देशों और 2 तुर्कमेनिस्तान के नागरिक हैं। शवों की पहचान के लिए DNA टेस्ट होगा। पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है।
हादसा होने की 5 बड़ी वजह
- खिड़कियां बंद थीं। वेंटिलेशन नहीं था। आने-जाने का सिर्फ एक रास्ता था। जगह काफी सकरी थी। बाहरी फायर एस्केप (आपातकालीन निकास) की कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसी इमारतें ‘चिमनी’ जैसी बन जाती हैं, धुआं-गर्मी कुछ ही सेकंड में ऊपर पहुंच जाती है।
- प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, सेंसर आधारित मुख्य गेट बंद हो गया था। इसकी वजह से लोग बाहर ही नहीं निकल पाए।
- स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसे जरूरी फायर सेफ्टी उपकरण काम नहीं कर रहे थे।
- ग्राउंड फ्लोर पर कई भारी एलपीजी सिलेंडर रखे गए थे, जिनके लिए कोई फायर-आइसोलेशन सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।
लोगों को बेसमेंट से ग्रिल तोड़कर निकाला गया
अधिकारियों के अनुसार, इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर रेस्टोरेंट था, जबकि बेसमेंट और ऊपरी मंजिलों का इस्तेमाल होटल के रूप में किया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद कई लोग बेसमेंट में फंस गए।
एक स्थानीय व्यक्ति ने दावा किया कि बेसमेंट का दरवाजा बंद था और उसे खोलने में दमकलकर्मियों को 20 मिनट से ज्यादा समय लग गया। दमकलकर्मियों ने ग्रिल काटकर लोगों को बाहर निकाला गया और उन्हें एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया।

बेसमेंट के दरवाजे पर लोहे का ग्रिल लगा था, जिसे काटकर लोगों को निकाला गया।
एक रास्ता, बंद खिड़कियां और सेंसर वाला दरवाजा बना मौत का जाल
अधिकारियों के अनुसार, पांच मंजिला होटल में अंदर आने और बाहर निकलने का केवल एक ही रास्ता था। खिड़कियां सील कर दी गई थीं और मेन गेट सेंसर से चलता था। इन सभी कारणों ने मिलकर इमारत को लोगों के लिए मौत का जाल बना दिया।
आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ मेहमान उस समय सो रहे थे। साकेत के अस्पताल में अपनों की तलाश में जुटे रोते-बिलखते रिश्तेदारों ने बताया कि शव इस कदर झुलस चुके हैं कि तस्वीरों से भी उनकी पहचान करना नामुमकिन हो रहा है।
पिता को देखने आए थे, परिवार के 8 लोग मृत
गुरुग्राम के सेक्टर-46 निवासी सीए विवेक अग्रवाल मैक्स अस्पताल में भर्ती पिता का हालचाल लेने आए थे। परिवार इसी होटल में ठहरा था। हादसे में विवेक, पत्नी तर्जनी, मां प्रेमलता, बेटी जीविषा व वार्या, झावेरी, मामा अशोक गोयल और मौसी कमला की मौत हो गई।
अजमेर निवासी कारोबारी अशोक पंसारी, उनकी बुआ और फूफा की भी अग्निकांड में मौत हो गई। ये मैक्स में भर्ती रिश्तेदार का हालचाल लेने आए थे और इसी होटल में थे।

CA विवेक और उनकी पत्नी तर्जनी अग्रवाल। फाइल फोटो
मामा बोले- जिसे पाला-पोसा, उसी का अंतिम संस्कार करना पड़ा
तर्जनी के मामा अजय गुप्ता से भास्कर रिपोर्टर ने बात की। उन्होंने कहा- जिस भांजी को अपने हाथों से पाला-पोसा, उसकी शादी की, आज उसी का अंतिम संस्कार भी अपने हाथों से करना पड़ा। इससे बड़ी बदकिस्मती क्या होगी। अब हमारे पास बचा ही क्या है। जीना तो पड़ेगा, लेकिन जीने की वजह चली गई।
तर्जनी के कजन भाई अंकुश गुप्ता ने भास्कर से कहा कि परिवार के सभी लोगों की मौत हो गई। घर में दीया जलाने वाला भी कोई नहीं बचा। परिवार मौसा जी को देखने गया था। मौसा जी अस्पताल में भर्ती हैं, लेकिन उनके साथ गए परिवार के बाकी सदस्य अब इस दुनिया में नहीं रहे।

विवेक और तर्जनी के घर के बाहर सन्नाटा पसरा है। परिवार के कुछ दूर के रिश्तेदार ही मौजूद हैं।
चश्मदीद बोले- सोकर उठा, खिड़कियों से लटके हुए दिखे लोग
होटल के सामने रहने वाली अंजुम ने बताया कि सुबह 8 बजे दमकल को फोन किया था, पर गाड़ियां देर से पहुंचीं। पार्क में टहल रहे अश्विन की नजर धुएं के गुबार पर पड़ी, तो वे घटनास्थल की ओर भागे। अश्विन ने बताया, ‘लोगों की मदद से वहां से गुजर रही एम्बुलेंस को रुकवाया। पीड़ितों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया।
अनीता चौधरी ने बताया, ‘कई धमाकों की गूंज से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। चारों तरफ अफरा-तफरी थी। हालात देखकर कॉलोनी के निवासी अंदर फंसे लोगों की मदद के लिए होटल की इमारत की ओर दौड़ पड़े।’
हौजरानी गांव के वसीम राजा ने बताया, ‘अधिकांश धुएं से बेहोश हो गए थे। हमने बिना हिचकिचाहट उन्हें सीपीआर देना शुरू किया। इसी सूझबूझ से कुछ की मौके पर ही जान बचाई जा सकी, हालांकि कुछ को नहीं बचा पाए।’ होटल के पास रहने वाले आसिफ ने बताया- सोकर उठा, तो होटल से धुआं निकल रहा था। फंसे लोग खिड़कियों और बालकनियों से लटककर मदद की गुहार लगा रहे थे।

आग लगने के दौरान एक विदेशी महिला और पुरुष खिड़की से लटके हुए थे।
नए गद्दे लाकर सड़क बिछाए, कई की जान बचाई
फायर ब्रिगेड पहुंचने से पहले स्थानीय लोग बचाव में जुट गए। होटल के सामने कंबल-गद्दे की दुकान चलाने वाले अरमान ने दुकान से सभी नए गद्दे और रजाइयां निकालकर सड़क पर बिछा दीं। अरमान ने कहा, होटल की ऊपरी मंजिल से कई लोग इन्हीं गद्दों पर गिरे, जिससे उनकी जान बचाने में मदद मिली। स्थानीय युवक अफजल, शाहरुख, अनीस, आमिर और वसीम ने लोगों को निकालने में मदद की। कम से कम 10 लोगों को सीपीआर भी दी।

एक विदेशी महिला ने चौथे फ्लोर से छलांग लगा दी। गद्दे पर गिरने से उसकी जान बची।
दिल्ली अग्निकांड की 9 तस्वीरें…

होटल में बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे आग लगी। थोड़ी देर में लपटें उठने लगीं।

एक विदेशी नागरिक आग से बचने के लिए छत की बाउंड्री पर पहुंच गया।

फर्स्ट फ्लोर पर मौजूद कुछ लोगों ने छोटी सी खिड़की से निकलकर छलांग लगा दी।

एक व्यक्ति होटल की तीसरे फ्लोर से नीचे कूद गया। इस दौरान वह घायल हो गया।
होटल की एक खिड़की पर धुएं से घिरी विदेशी महिला मदद के लिए चीखती दिखी।

स्थानीय लोगों ने होटल से कई लोगों का रेस्क्यू किया और उन्हें अस्पताल पहुंचाया।

कई घायलों की हालत गंभीर है। केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनसे मुलाकात की।

आग में पूरा होटल जल गया। आसपास की बिल्डिंग्स को भी नुकसान पहुंचा है।

दिल्ली के AIIMS, मैक्स सहित अलग-अलग अस्पतालों में पीड़ित के परिवार रोते-बिलखते दिखे।
हाई कोर्ट ने जनवरी में मांगा था एक्शन प्लान, अब हादसा
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में दावा किया गया है कि राजधानी में करीब 1000 लाइसेंसी होटल और गेस्ट हाउस हैं, लेकिन केवल 52 के पास वैध फायर NOC है। इस साल 7 जनवरी को कोर्ट ने दिल्ली सरकार, एमसीडी और एनडीएमसी को फायर सेफ्टी पर कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया था।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता अर्पित भार्गव का कहना था कि बड़ी संख्या में होटल और गेस्ट हाउस जरूरी अग्नि सुरक्षा मानकों के बिना संचालित हो रहे हैं। सुनवाई के करीब 5 महीने बाद अब हादसा हो गया है। अधिकारियों ने बताया, जिस होटल में आग लगी उसका नक्शा नहीं था।
दिल्ली में जनवरी 2021 से आग से 445 मौत
देश की राजधानी दिल्ली में जनवरी 2021 से मई 2026 हादसों में 6,466 लोगों की मौत हुई है, जबकि 14,857 लोग घायल हुए हैं। इनमें आगजनी में 445 लोगों की मौत और 3193 लोग घायल हुए। अन्य घटनाओं में 6021 लोगों की मौत और 11,718 लाेग घायल हुए है।

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बेसमेंट में कमरे और किचन, ना वेंटिलेशन, ना इमरजेंसी एग्जिट: दिल्ली के जिस होटल में आग लगी, उसका मालिक पास में चला रहा ऐसे 2 होटल

दिल्ली के जिस फ्लरिश स्टे होटल में बुधवार को आग लगने से 21 लोगों की मौत हुई, उसका मालिक पास में ऐसे ही दो और होटल चला रहा है। लवकेश बजाज के इन दोनों होटलों में बेसमेंट के अंदर ही किचन और कमरे हैं। इनमें इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं है। फ्लरिश स्टे होटल दिल्ली के मालवीय नगर में है। इस इलाके में 400 से 500 मीटर के दायरे में 8 से 10 होटल हैं। पूरी खबर पढ़ें…













