Eiffel Tower Strike Reason Update; Hindu Group Visit Row | ACTPnews

Eiffel Tower Strike Reason Update; Hindu Group Visit Row


पेरिस5 घंटे पहले

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फ्रांस की राजधानी पेरिस में मशहूर एफिल टावर सोमवार को कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बंद रहा। मामला शनिवार को हिंदू संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) के करीब 100 सदस्यों के दौरे से जुड़ा है।

आरोप है कि BAPS प्रतिनिधिमंडल के आने से पहले कुछ महिला कर्मचारियों को अपनी जगह से हटने के लिए कहा गया, ताकि वहां पुरुष कर्मचारियों को तैनात किया जा सके।

इस घटना से महिला कर्मचारी आहत हुईं। उन्हें यह अपमानजनक लगा। मामला बढ़ने के बाद सोमवार को कर्मचारियों ने बैठक की और मैनेजमेंट से बातचीत की।

बात न बनने पर कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी। इसके चलते एफिल टावर को बंद रखना पड़ा। बाद में एफिल टावर के मैनेजमेंट ने भी माना कि उसे ऐसा अनुरोध मानना ही नहीं चाहिए था।

BAPS कर्मचारियों के दौरे से जुड़ीं 2 तस्वीरें

BAPS के मेंबर किसी धार्मिक कार्यक्रम के लिए एफिल टावर नहीं गए थे। यह निजी दौरा था।

BAPS के मेंबर किसी धार्मिक कार्यक्रम के लिए एफिल टावर नहीं गए थे। यह निजी दौरा था।

BAPS के वर्तमान महंत स्वामी महराज भी एफिल टावर गए थे।

BAPS के वर्तमान महंत स्वामी महराज भी एफिल टावर गए थे।

BAPS बोला- किसी की एंट्री नहीं रोकी, फिर भी मांगी माफी

BAPS ने कहा कि करीब 100 लोगों के एफिल टावर दौरे की योजना संगठन और टावर के मैनेजमेंट ने मिलकर बनाई थी। दौरे का समय भी इस तरह तय किया गया था, ताकि दूसरे पर्यटकों को कम से कम परेशानी हो।

संगठन के मुताबिक, उसकी जानकारी में किसी को भी एफिल टावर में प्रवेश करने से नहीं रोका गया। हालांकि, अगर इस घटना से किसी को दुख या परेशानी हुई है तो BAPS इसके लिए माफी मांगता है।

BAPS खुद को हिंदू आध्यात्मिक और स्वयंसेवी संगठन बताता है। इसके लंदन, लॉस एंजिल्स और सिडनी समेत कई शहरों में मंदिर हैं। रविवार को पेरिस में BAPS के फ्रांस के पहले बड़े मंदिर का उद्घाटन भी हुआ था।

महिला कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पेरिस का एफिल टावर बंद रहा। तस्वीर में टावर के बाहर हड़ताल की जानकारी देता बोर्ड नजर आ रहा है।

महिला कर्मचारियों की हड़ताल के चलते पेरिस का एफिल टावर बंद रहा। तस्वीर में टावर के बाहर हड़ताल की जानकारी देता बोर्ड नजर आ रहा है।

फ्रांस में नेताओं ने भी नाराजगी जताई

फ्रांस के कई राजनीतिक नेताओं ने भी इसकी आलोचना की। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोआर ने मामले की जांच कराने की बात कही। उन्होंने कर्मचारियों के गुस्से को जायज बताया। फ्रांस की समानता मंत्री ऑरोर बर्जे ने कहा,

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फ्रांस में महिलाओं से खुद को छिपाने के लिए नहीं कहा जाता। कोई भी धर्म देश के कानून से ऊपर नहीं है।

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दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन और पूर्व प्रधानमंत्री गैब्रियल अताल ने भी घटना की आलोचना की। अताल ने कहा कि किसी संस्कृति, आस्था या धर्म के नाम पर महिलाओं से यह तय नहीं कराया जा सकता कि उन्हें किसी जगह पर कहां रहना है।

ब्रह्मचर्य के नियमों के चलते साधु महिलाओं से दूरी रखते हैं

BAPS के साधु और स्वामी आठ तरह के ब्रह्मचर्य के नियमों का पालन करते हैं। इसके तहत वे महिलाओं से बातचीत करने, उन्हें छूने और उनके साथ ज्यादा करीब रहने से बचते हैं। BAPS के मंदिरों में भी कई जगह पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग बैठने की व्यवस्था होती है।

संगठन का कहना है कि यह साधुओं के धार्मिक नियम और उनकी साधना का हिस्सा है। हालांकि, एफिल टावर में महिला कर्मचारियों को हटाने का फैसला इसी धार्मिक नियम की वजह से लिया गया था या स्थानीय स्तर पर की गई व्यवस्था के तहत, इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

2 साल 2 महीने और 5 दिन में बना था एफिल टावर

1889 में फ्रांस में विश्व मेला होना था। फ्रांसीसी क्रांति के 100 साल पूरे होने पर आयोजित इस मेले में फ्रांस अपनी इंजीनियरिंग और औद्योगिक ताकत दिखाना चाहता था। इसी के लिए 300 मीटर ऊंचा लोहे का टावर बनाने का फैसला हुआ।

इसका शुरुआती डिजाइन इंजीनियर मॉरिस कोएकलिन और एमिल नुगिए ने बनाया था। बाद में आर्किटेक्ट स्टीफन सॉवेस्ट्रे ने डिजाइन को बेहतर किया और गुस्ताव एफिल की कंपनी ने टावर बनाया।

इतने बड़े ढांचे को उस दौर की तकनीक से रिकॉर्ड समय में बनाया गया था। एफिल टावर का निर्माण 26 जनवरी 1887 को शुरू हुआ और इसका मुख्य ढांचा 31 मार्च 1889 को पूरा हो गया। निर्माण के दौरान साइट पर 150 से 300 मजदूर काम करते थे।

इस तस्वीर में फ्रांस के मशहूर एफिल टावर के शुरुआत से बनकर तैयार होने तक के सफर को देख सकते हैं।

इस तस्वीर में फ्रांस के मशहूर एफिल टावर के शुरुआत से बनकर तैयार होने तक के सफर को देख सकते हैं।

हवा और गर्मी में भी टिके रहने की 3 वजह 1. हवा के दबाव को ध्यान में रखकर बनाया डिजाइन: एफिल टावर जालीदार लोहे का ढांचा है। इसकी चारों पाए नीचे से चौड़े हैं और ऊपर जाते-जाते एक-दूसरे के करीब आते हैं। इससे हवा ढांचे से टकराकर रुकती नहीं, बल्कि आर-पार निकल जाती है। इससे हवा का दबाव कम होता है। टावर में करीब 18,038 लोहे के हिस्से और 25 लाख रिवेट (कील) लगे हैं। पूरे ढांचे का वजन करीब 7,300 टन है। 2. गर्मी में ऊंचाई में थोड़ा बदलाव आता है: तापमान बढ़ने पर लोहा फैलता है और ठंड में सिकुड़ता है। इसलिए मौसम के हिसाब से एफिल टावर की ऊंचाई में थोड़ा बदलाव होता है। सूरज की गर्मी से इसके अलग-अलग हिस्सों में हल्की हलचल भी होती है। तेज हवा में पूरा ढांचा थोड़ा हिलता है, लेकिन इसे इन बदलावों को सहने के हिसाब से डिजाइन किया गया है। 3. करीब हर 7 साल में होता है रंग-रोगन: एफिल टावर लोहे से बना है और जंग लगने का खतरा रहता है। इसलिए इस पर नियमित रूप से पेंट किया जाता है। आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, 1892 से टावर को औसतन हर 7 साल में पूरी तरह दोबारा पेंट किया गया है। अब तक करीब 20 बार इसकी पेंटिंग हो चुकी है।

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