बेंगलुरु29 मिनट पहले
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कर्नाटक में आज शाम 4 बजे विधायक दल की बैठक होगी। डिप्टी CM डीके शिवकुमार को नेता चुना जा सकता है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक डीके 1 जून को नए मंत्रियों के साथ सीएम पद की शपथ ले सकते हैं। 4 डिप्टी CM भी बनाए जा सकते हैं।
CM सिद्धारमैया ने 28 मई को इस्तीफा दिया था। इस्तीफा देने के एक दिन बाद ही सिद्धारमैया शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की।

कर्नाटक के कांग्रेस इंचार्ज रणदीप सुरजेवाला शनिवार सुबह दिल्ली से कर्नाटक के लिए रवाना हुए।
बैठक में क्या होगा, नए विकल्प पर भी विचार
- कांग्रेस विधायक दल की बैठक शाम 4 बजे बेंगलुरु के विधान सौधा में होगी।
- बैठक की निगरानी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला करेंगे।
- सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया खुद डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रख सकते हैं।
- एक अन्य विकल्प के तहत विधायक दल कांग्रेस हाईकमान को नया नेता चुनने का अधिकार भी दे सकता है।
4 या 5 जून को सरकार की शपथ, दावा- नई कैबिनेट में सिद्धारमैया का दबदबा रहेगा
सूत्रों के मुताबिक 4 या 5 जून को नई सरकार का शपथ ग्रहण हो सकता है। CM के साथ-साथ कैबिनेट भी बदलेगी। मौजूदा कैबिनेट से 10 मंत्री हटाए जा सकते हैं। शिवकुमार कैबिनेट में सिद्धारमैया और मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे भी शामिल होंगे।
यह पहला मौका नहीं है कि किसी राज्य में एक साथ इतने डिप्टी सीएम बनाए जाएंगे। इससे पहले 2019 में आंध्र प्रदेश के पूर्व CM जगन मोहन ने 5 डिप्टी सीएम के साथ शपथ ली थी।

ज्योतिषी का दावा- शिवकुमार लंबे समय तक सीएम रहेंगे
डिप्टी सीएम शिवकुमार के ज्योतिषी द्वारकानाथ गुरुजी ने भविष्यवाणी की है कि शिवकुमार लंबे समय तक सीएम रहेंगे। न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा- मैंने शिवकुमार को शपथ के लिए 31 मई, 5 जून और 6 जून की तारीखें दी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिवकुमार 2028 के विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता में वापसी करेंगे।
ज्योतिषी ने कहा, वह कोई एक दिन के मुख्यमंत्री या एक बार के CM नहीं हैं। वह एक लंबे समय तक इस पद पर बने रहेंगे। उनकी कुंडली बहुत अच्छी है। वह कर्नाटक के लिए लंबे समय तक काम करेंगे।
कर्नाटक राजनीति का पिछले 2 दिनों का घटनाक्रम…
28 मई: CM सिद्धारमैया ने लोकभवन जाकर राज्यपाल के सचिव को इस्तीफा दिया

इस्तीफा देने से पहले सिद्धारमैया ने मीटिंग बुलाई। डीके शिवकुमार भी पहुंचे उन्होंने सीएम के पैर भी छुए थे।
सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत के सचिव को इस्तीफा सौंपा है। गहलोत पारिवारिक कारणों से बेंगलुरु से बाहर थे। सिद्धारमैया ने उसी दिन अपने घर पर मंत्रियों के साथ बैठक की और फैसले की जानकारी दी। बैठक के दौरान डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए, जिसके बाद दोनों गले मिले।
29 मई: सिद्धारमैया और शिवकुमार दिल्ली में राहुल-खड़गे से मिले

सिद्धारमैया ने 29 मई को राहुल गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की। दोनों के बीच करीब आधा घंटा बातचीत हुई।
कर्नाटक के राज्यपाल ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा मंजूर कर लिया। सिद्धारमैया शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में सिद्धारमैया ने हाईकमान के सामने अपनी कई मांगें रखीं, जिनमें बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के लिए नए मंत्रिमंडल में अहम मंत्रालय की मांग भी शामिल बताई जा रही है।
सिद्धारमैया के अलावा डीके शिवकुमार भी दिल्ली पहुंचे। उन्होंने भी राहुल और खड़गे से मुलाकात की।
सिद्धारमैया 3 साल पहले रोटेशनल फॉर्मूला से बने थे सीएम
कर्नाटक विधानसभा के रिजल्ट 13 मई, 2023 को आए थे। कांग्रेस ने AHINDA फॉर्मूले के दम पर चुनाव जीता था। AHINDA का मतलब है, A – अल्पसंख्यक, HI – हिंदुलिदा (पिछड़े वर्ग), DA – दलित। सिद्धारमैया खुद ओबीसी की कुरुबा जाति से आते हैं, इसलिए पिछड़े वर्ग का बड़ा समर्थन कांग्रेस के साथ रहा।
सिद्धारमैया ने 135 विधायकों में से 90 का समर्थन का दावा किया था। वहीं, डीके शिवकुमार का दावा था कि उसने पार्टी को मुश्किल दौर से बाहर निकाला। इसके लिए उन्होंने मेहनत की। इसमें लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय ने साथ दिया।
दोनों के अड़े रहे। इससे कांग्रेस आलाकमान को मुख्यमंत्री तय करने में 7 दिन लगे थे। शपथ 20 मई को हो सकी। इस बीच खबरें आईं कि दिल्ली में कई दौर की बैठकों के बाद दोनों के बीच ‘ढाई-ढाई साल के सीएम’ फॉर्मूले पर सहमति बनी। हालांकि कांग्रेस ने इसे आधिकारिक रूप से कभी नहीं माना।
डीके के पास 1400 करोड़ की संपत्ति, मनी लॉन्ड्रिंग केस में तिहाड़ भी जा चुके

कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे डीके शिवकुमार देश के सबसे अमीर नेताओं में हैं। उनके पास ₹1413 करोड़ से अधिक की संपत्ति है। वह रियल एस्टेट, खनन, होटल कारोबारी भी हैं। दिलचस्प ये है कि इतनी संपत्ति के बावजूद उनके चुनावी हलफनामे में एक टोयोटा क्वालिस कार दर्ज है। 263 करोड़ का कर्ज भी है।
1962 में बेंगलुरु के पास कनकपुरा में जन्मे डीके वोक्कालिगा समुदाय से हैं। वह कनकपुरा से ही विधायक हैं। कांग्रेस में उनकी पहचान ऐसे नेता की है जो पार्टी विधायकों को टूटने से बचाते हैं। किसी भी बड़े ऑपरेशन, चुनाव मैनेजमेंट, प्रचार या गुप्त रणनीतियों के लिए जिस वित्तीय और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट की जरूरत होती है, उसे वे बखूबी मैनेज कर लेते हैं।
डीके पर 19 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। ईडी उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के दो केस में जांच कर रही है। 2017 में आयकर विभाग के छापे में इनके घर 8.5 करोड़ रु. मिले थे। इसी केस में वह 2019 में गिरफ्तार हुए। उन्हें 50 दिन तिहाड़ में बिताने पड़े थे। सीबीआई आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में जांच कर रही है।
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