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कोलकाता11 मिनट पहले
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ऋतब्रत बनर्जी हावड़ा से उलुबेरिया पुरबा सीट और संदीपन साहा मध्य कोलकाता के एंटाली से विधायक हैं।
तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी कलह बढ़ गई है। पार्टी से निकाले गए विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी सोमवार को देर शाम MLA हॉस्टल पहुंचे, जहां दोनों ने TMC के कई विधायकों के साथ मीटिंग की।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि ममता बनर्जी के कई वफादार विधायक इस बैठक में शामिल हुए। इनमें से कुछ विधायक मालदा-मुर्शिदाबाद क्षेत्र के हैं। TMC के निलंबित नेता रिजू दत्ता ने दावा किया कि पार्टी के 80 में से 50 से ज्यादा विधायक खुद को असली तृणमूल बताने की तैयारी कर रहे हैं।
ये असंतुष्ट गुट शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष बनाने से भी नाराज हैं। संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया था कि नेता प्रतिपक्ष बनाने को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए प्रस्ताव में उनके फर्जी साइन थे। इसके दोनों को ममता ने दोनों को पार्टी से निकाल दिया था।

पार्टी से निकाले जाने पर संदीपन बोले- कोई पछतावा नहीं
पार्टी से निकाले जाने के बाद संदीपन साहा ने कहा था कि पार्टी में नैतिकता की बात करना ही एंटी-पार्टी गतिविधि माना जाता है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा- नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। मैं इसके बारे में क्यों सोचूंगा।

कांग्रेस बोली- लगता नहीं TMC जिंदा नहीं रह पाएगी
कांग्रेस नेता उदित राज ने TMC में चल रही उथल-पुथल को लेकर कहा कि ममता ने जो बोया है वही काट रही हैं। असलियत यह है कि उनके पास विरोध प्रदर्शन करने के लिए लोग ही नहीं हैं। मुझे नहीं लगता TMC आगे जिंदा रह पाएगी। बात बहुत दूर तक जा चुकी है। TMC के कार्यकर्ताओं में बहुत असंतोष है। ममता को अब ‘INDIA’ ब्लॉक को मजबूत करने के बारे में सोचना चाहिए।
TMC टूटती है, तो 2 संभावनाएं बन सकती हैं
- पहली: दो तिहाई विधायक भाजपा में शामिल हों। TMC के कुल 80 विधायकों में से दो तिहाई (54 विधायक) भाजपा में शामिल होने का फैसला लें। ऐसे में दलबदल कानून नहीं लगेगा।
- दूसरी: TMC में 2 गुटों में बंट जाए। एक ग्रुप पार्टी से अलग होकर असली TMC का दावा करे। इसके लिए 54 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। अगर ऐसा होता है तो बड़े गुट के दावे पर चुनाव आयोग फैसला लेगा। मामला कोर्ट भी जा सकता है।
इस मामले में संविधान क्या कहता है
अगर किसी राष्ट्रीय/राज्य स्तर की पार्टी के विधायक बागी हो जाएं, तो वे सीधे पार्टी पर दावा नहीं कर सकते। यह मामला मुख्य रूप से दसवीं अनुसूची में दिए दलबदल कानून, पार्टी संगठन के संविधान और निर्वाचन आयोग के नियमों से तय होता है।
91वें संविधान संशोधन (2003) के बाद कम से कम दो-तिहाई विधायक मूल पार्टी से अलग होने का निर्णय लेते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से छूट मिल सकती है। इसके बाद चुनाव आयोग यह जांच करता है कि पार्टी पर असली नियंत्रण किसका होगा। इसके लिए 4 पॉइंट तय हैं…
- पार्टी संगठन किसके साथ है?
- राष्ट्रीय/राज्य कार्यकारिणी किसके साथ है?
- पार्टी संविधान क्या कहता है?
- चुने हुए प्रतिनिधियों का समर्थन किसे है?
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ममता का दावा- TMC विधायकों पर भाजपा जॉइन करने का दबाव, पुलिस उन्हें डरा-धमका रही

पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को फेसबुक पर वीडियो मैसेज जारी कर भाजपा और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पुलिस TMC विधायकों पर पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने का दबाव बना रही है। ममता ने दावा किया कि कुछ विधायकों और सांसदों को डराने-धमकाने या रिश्वत देकर TMC को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर…













