Mayawati 2027 Election Strategy | BSP Tickets To Gen-Z & Deepika Successor | ACTPnews

अपने भाइयों आकाश (दाएं) और ईशान के साथ दीपिका आनंद। यह रक्षाबंधन की तस्वीर है।


बसपा सुप्रीमो मायावती अपनी भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी की कमान सौंप सकती हैं। शनिवार को उन्होंने इसका संकेत दिया। कहा- अगर भाई आनंद कुमार को मदद के लिए किसी सदस्य की जरूरत पड़ती है, तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका आनंद की मदद ले सकते हैं। उनकी ईमानदारी

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मायावती ने यह भी साफ किया कि दोनों भतीजों आकाश और ईशान को पार्टी में कोई राजनीतिक पद नहीं मिलेगा। भविष्य में उनके बच्चों को भी कोई पद नहीं दिया जाएगा। कांशीराम की तरह मैं भी परिवारवाद के खिलाफ डटी रहूंगी। मैं अविवाहित हूं। महिला हूं, इसीलिए मजबूरी में भाई आनंद कुमार को साथ रखना पड़ा। लेकिन, अब किसी मोह में नहीं पड़ने वाली हूं।

मायावती ने 2 दिन पहले भतीजे आकाश को पार्टी से बाहर कर दिया था। हालांकि, ईशान अभी 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

अपने भाइयों आकाश (दाएं) और ईशान के साथ दीपिका आनंद। यह रक्षाबंधन की तस्वीर है।

आखिर मायावती दीपिका को क्यों सौंपेंगी कमान? जानिए

  • राजनीतिक एक्सपर्ट कहते हैं- ईशान को जिम्मेदारी देने के बाद सोशल मीडिया पर परिवारवाद को लेकर ट्रोल किया जा रहा था। आकाश और ईशान के बीच तुलना की जा रही थी। इसके चलते मायावती को भतीजों को जिम्मेदारी नहीं देने का फैसला लेना पड़ा।
  • भतीजी दीपिका को आगे बढ़ाने के पीछे मायावती का महिला कार्ड है। मायावती संदेश देना चाहती हैं कि मेरी तरह ही भतीजी भी भविष्य में कमान संभाल सकती हैं। अगर वह मायावती की उम्मीदों पर खरी उतरीं, तो उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित करेंगी।

मायवाती की 5 बड़ी बातें पढ़िए

1- बेटी तैयार नहीं हुई, तो दलित मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी देंगे

मायावती ने साफ किया कि अगर दीपिका इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं होती हैं, तो दलित समाज के मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी सौंपेंगे। मैं महिला नहीं होती, तो भाई-बहनों को भी अपने साथ नहीं रखती। महिला होने के कारण सुरक्षा और अन्य परेशानियों से बचने और सम्मान के साथ पार्टी में काम करने के लिए मुझे सबसे छोटे भाई आनंद को अपने साथ रखना पड़ा।

2- कांशीराम की तरह परिवारवाद के खिलाफ डटी हूं

अब मैं किसी तरह के मोह में नहीं पड़ूंगी। पार्टी को नुकसान नहीं होने दूंगी। जिस तरह कांशीराम परिवारवाद से दूर रहे, मैं भी परिवारवाद के खिलाफ डटी हूं। BSP में किसी को योग्यता के आधार पर मौका दिया जा सकता है। लेकिन, उसकी आड़ में उसके परिवार के दूसरे सदस्यों को राजनीतिक फायदा नहीं दिया जाएगा। इसका मकसद BSP को परिवारवाद से मुक्त रखना है।

तस्वीर 23 जून, 2024 की है, जब लखनऊ में बसपा की एक बैठक में आकाश आनंद ने मायावती के पैर छुए थे।

तस्वीर 23 जून, 2024 की है, जब लखनऊ में बसपा की एक बैठक में आकाश आनंद ने मायावती के पैर छुए थे।

3- विधानसभा चुनाव में 50% जेन-जी को टिकट देंगे

आकाश आनंद के निष्कासन से होने वाले संभावित नुकसान की काट के लिए मायावती ने 2027 के विधानसभा चुनावों में जेन-जी को 50% तक टिकट देने की बात कही। मायावती ने कहा- यूपी, उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों में युवा चेहरों को मौका दिया जाएगा। इसमें महिला और पुरुष दोनों की भागीदारी होगी।

4- विरोधी दलों के रवैए से 5वीं बार BSP सरकार नहीं बनी

मायावती ने कहा- विरोधी दलों के जातिवादी रवैये से बसपा 2012 में 5वीं बार सरकार नहीं बना सकी। इसका पछतावा सर्वसमाज के लोगों को है। बसपा सरकार के बाद प्रदेश में ‘कानून द्वारा कानून का राज’ कायम नहीं हो सका। लोगों का जीवन परेशानियों से भरा है। केवल सरकारी ढिंढोरा पीटने से लोगों का पेट नहीं भरता।

ईशान आनंद (दाएं से पहले) 3 सितंबर को बसपा की बैठक में पहुंचे थे।

ईशान आनंद (दाएं से पहले) 3 सितंबर को बसपा की बैठक में पहुंचे थे।

5- निष्कासित नेताओं की वापसी की खबर ‘फेक न्यूज’ है

बसपा को यूपी में सरकार बनाने से रोकने के लिए साम, दाम, दंड और भेद जैसे हथकंडे अपनाए जा सकते हैं। इसलिए कार्यकर्ताओं को विरोधी दलों और मीडिया-सोशल मीडिया में चलने वाले प्रोपेगेंडा से सावधान रहने को कहा।

मायावती ने पार्टी से निकाले गए नेताओं की वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को खारिज किया। कहा- पिछले कुछ दिनों से यह प्रचार किया जा रहा है कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित किए गए लोगों को BSP में वापस लिया जाएगा। ऐसा नहीं है। उन्हें दोबारा मौका नहीं मिलेगा।

आकाश ने 2017 में राजनीति में की थी एंट्री​​

  • 6 साल पहले यानी 2017 में आकाश आनंद सहारनपुर की जनसभा में मायावती के साथ दिखे थे। इसके बाद वह लगातार पार्टी का काम कर रहे थे। 2019 में उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया। इसके बाद बसपा-सपा का गठबंधन टूट गया।
  • उस वक्त यह बात सामने आई थी कि आकाश के कहने पर ही मायावती ने गठबंधन तोड़ा। 2022 के हिमाचल विधानसभा चुनाव में पहली बार आकाश आनंद का नाम स्टार प्रचारकों की लिस्ट में आया था। आकाश ने लंदन से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की पढ़ाई की है।

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