Modi to Meet Trump at G7 Summit on June 17; Also Visiting Slovakia | ACTPnews

पीएम मोदी फ्रांस के नीस शहर पहुंचे हैं। वे 14 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। - Dainik Bhaskar


नई दिल्ली/पेरिस/ब्रातिस्लावा4 घंटे पहले

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पीएम मोदी फ्रांस के नीस शहर पहुंचे हैं। वे 14 जून को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार रात फ्रांस के नीस शहर पहुंचे। होटल में भारतीय समुदाय ने उनका स्वागत किया। इस दौरान पीएम ने बच्चे को गोद में उठाया और दुलार किया। महिलाओं ने पीएम के हाथ को माथे पर लगाया। इसके बाद मोदी ने कल्चरल प्रोग्राम देखा।

पीएम मोदी आज दोपहर में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। साथ ही ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।

दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, हेल्थ टेक, मेडिकल टेक्नोलॉजी, AI, सेमीकंडक्टर और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े 12 समझौते हो सकते हैं।

भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील पर अहम चर्चा होगी। भारत चाहता है कि इन विमानों में अपने हथियार जोड़ने की सुविधा मिले। इसके लिए सोर्स कोड का मुद्दा भी उठाया जाएगा।

डील पर अभी कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) की मंजूरी नहीं मिली है। प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद ही इस पर अंतिम फैसला होगा।

PM का फ्रांस में स्वागत, 3 तस्वीरें…

फ्रांस के नीस शहर में भारतीय समुदाय ने पीएम का स्वागत किया। पीएम ने एक बच्चे को दुलार भी किया।

फ्रांस के नीस शहर में भारतीय समुदाय ने पीएम का स्वागत किया। पीएम ने एक बच्चे को दुलार भी किया।

भारतीय समुदाय की महिलाओं ने पीएम के हाथ को अपने सिर पर लगाया।

भारतीय समुदाय की महिलाओं ने पीएम के हाथ को अपने सिर पर लगाया।

पीएम जिस होटल में ठहरे, वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।

पीएम जिस होटल में ठहरे, वहां सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।

पीएम का 6 दिन का फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा

प्रधानमंत्री 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के 6 दिनों के दौरे पर हैं। पीएम बनने के बाद उनकी यह 7वीं फ्रांस यात्रा है। उनका फ्रांस दौरा दो फेज में होगा। इस दौरान 3 शहरों नीस, एवियान और पेरिस जाएंगे। वे 13-14 जून तक नीस में रहेंगे।

16 से 17 जून को एवियान में G7 समिट में हिस्सा लेंगे। 18 जून को पेरिस में राष्ट्रपति मैक्रों के साथ विवाटेक सम्मेलन में जाएंगे। 17 जून को G7 समिट के दौरान मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से द्विपक्षीय मुलाकात होगी। दोनों नेता 16 महीने बाद मिलेंगे। दोनों आखिरी बार फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में मिले थे।

फांस दौरे के बीच मोदी 14 जून की शाम फ्रांस से स्लोवाकिया जाएंगे और 15 जून तक रुकेंगे। इस दौरान स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रोबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी से मुलाकात करेंगे। 1993 में स्लोवाकिया के आजाद देश बनने के बाद किसी भारतीय पीएम का यह पहला दौरा है।

2025 में कनाडा में हुए G7 में PM मोदी शामिल हुए थे। लेकिन ट्रम्प समिट बीच में छोड़कर चले गए थे, जिससे दोनों की मुलाकात नहीं हो सकी थी।

2025 में कनाडा में हुए G7 में PM मोदी शामिल हुए थे। लेकिन ट्रम्प समिट बीच में छोड़कर चले गए थे, जिससे दोनों की मुलाकात नहीं हो सकी थी।

होर्मुज रक्षा गठबंधन में भारत के शामिल होने पर निर्णय संभव

प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान ईरान युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है। ब्रिटेन की अगुवाई में अप्रैल में हुई पेरिस वार्ता में भारत शामिल हुआ था।

होर्मुज खोलने को लेकर भारत किसी एक देश की पहल पर होने वाली सुरक्षा व्यवस्था के बजाए संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अनुकूल बहुपक्षीय सुरक्षा व्यवस्था के हक में है। ऐसे में भारत फ्रांस और ब्रिटेन की पहल के साथ कदम मिलाते हुए होर्मुज रक्षा गठबंधन में शामिल होने पर सहमति दे सकता है।

G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं?

G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं।

इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बन गया। 1998 में रूस को शामिल कर इसका नाम G8 कर दिया गया, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। इसके बाद यह फिर से G7 कहलाने लगा।

भारत G7 में गेस्ट नेशन, पीएम 7वीं बार शामिल होंगे

भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के रूप में बुलाया जाता है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री को समिट का न्यौता मिलता है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 से 2013 के बीच पांच बार G7 (पहले G8) समिट में हिस्सा लिया था। PM मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित G7 समिट में आमंत्रित किया गया था।

2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन उसने तब समिट रद्द कर दी। इसके बाद 2021 में ब्रिटेन की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन में PM मोदी वर्चुअली शामिल हुए। इसके अलावा मोदी 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान, 2024 में इटली और 2025 में कनाडा में आयोजित G7 समिट में शामिल हुए।

भारत के टॉप-2 हथियार सप्लायर्स में शामिल फ्रांस

साल 2025 में फ्रेंच अखबार ला मोंड की खबर के मुताबिक फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है, जब अमेरिका समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था।

पोखरण में परमाणु टेस्ट के बाद अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए, लेकिन फ्रांस ने भारत का समर्थन किया।

फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है।

भारत को फ्रांस से मिराज 2000 फाइटर जेट, राफेल फाइटर जेट और स्कॉर्पीन पनडुब्बी मिल चुकी है।

फ्रांस ने इंटरनेशनल फोरम पर हमेशा भारत को सपोर्ट किया

सितंबर 2023 में हुई G20 समिट के दौरान PM मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया था, लेकिन दिसंबर में उन्होंने भारत आने से इनकार कर दिया।

ऐसे वक्त में भारत ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को गणतंत्र दिवस में शामिल होने का न्योता भेजा। उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार भी कर लिया।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ्रांस ने भारत का हमेशा समर्थन किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र में भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाने की मांग की थी।

इसके अलावा फ्रांस, न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में भी भारत को सदस्य बनाने का पक्षधर है।

G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है?

एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं।

इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान और होर्मुज रूट की स्थिति, मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियां), वैश्विक आर्थिक सहयोग और असंतुलन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दे शामिल हैं।

इसके अलावा G7 के सदस्य देशों के लीडर्स और ऑफिसर्स साल में कई बैठकें करते हैं, जिनमें कई समझौते होते हैं और दुनिया की बड़ी घटनाओं पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते हैं।

शुरुआत में G7 का एजेंडा आर्थिक चुनौतियों और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हल निकालना था। बाद में राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। वैश्विक मुद्दों पर G7 के फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।

उदाहरण के लिए G7 ने 2002 में मलेरिया और एड्स से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड बनाया। 1998 में वित्तीय संकट के दौरान इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को आर्थिक मदद की। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन की मदद करने का फैसला किया।

G20 से कैसे अलग है G7

G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और इसके सदस्य देश कोई अंतरराष्ट्रीय कानून पारित नहीं कर सकते। G20 में सबसे बड़ा मुद्दा वर्ल्ड इकोनॉमी होता है, जबकि G7 के लिए राजनीतिक मुद्दे भी अहम होते हैं। 1999 में बने G20 में G7 के देशों के अलावा BRICS के देश भी शामिल हैं।

इन देशों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्किये और यूरोपीय संघ शामिल हैं। राजन कुमार के मुताबिक G20 में नई और बढ़ती हुई इकोनॉमी वाले देशों को भी शामिल किया गया है।

भले ही G7 और G20 का एजेंडा एक जैसा हो, लेकिन इस समय G20 ज्यादा प्रभावी गुट है। 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी G7 को बहुत आउटडेटेड ग्रुप कहा था।

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