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हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप में रविवार को हिमस्खलन आया था - Dainik Bhaskar


काठमांडू7 घंटे पहले

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हिमलुंग हिमाल के बेस कैंप में रविवार को हिमस्खलन आया था

नेपाल के मनांग जिले में 7,126 मीटर ऊंचे हिमलुंग हिमाल पर रविवार को हिमस्खलन हो गया। हादसे के समय गाइड और उनके साथ काम करने वाले लोग एक टेंट में सो रहे थे। हिमस्खलन की चपेट में आने से टेंट बर्फ के नीचे दब गया।

हादसे में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोग लापता हैं। हादसे के बाद रविवार को ही बचाव दल के कुछ सदस्य मौके पर पहुंच गए थे और दो शव बरामद कर लिए थे।

हालांकि खराब मौसम और उड़ान में दिक्कत के कारण पूरी टीम बेस कैंप तक नहीं पहुंच सकी। सोमवार सुबह हेलिकॉप्टर से बाकी बचावकर्मियों को बेस कैंप पहुंचाया गया।

हिमलुंग हिमाल पर रेस्क्यू की 5 तस्वीरें

हिमस्खलन वाली जगह पर लापता लोगों की तलाश कर रहा बचाव दल।

हिमस्खलन वाली जगह पर लापता लोगों की तलाश कर रहा बचाव दल।

हिमलुंग हिमाल की चोटी के नार-फू इलाके में हुआ है हिमस्खलन।

हिमलुंग हिमाल की चोटी के नार-फू इलाके में हुआ है हिमस्खलन।

खराब मौसम के बीच बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश कर रहा है।

खराब मौसम के बीच बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश कर रहा है।

रविवार को बचाव दल ने दो शव बरामद किए थे।

रविवार को बचाव दल ने दो शव बरामद किए थे।

बचाव दल ने बर्फ में दबे टेंट बाहर निकाले हैं।

बचाव दल ने बर्फ में दबे टेंट बाहर निकाले हैं।

चढ़ाई की तैयारी में जुटे थे गाइड और वर्कर

जिस टेंट पर हिमस्खलन गिरा, उसमें कुल 22 लोग मौजूद थे। इनमें 9 पर्वतारोही और 13 लोग सपोर्ट स्टाफ के थे। ये लोग आने वाले पर्वतारोहण सीजन की तैयारी के लिए वहां पहुंचे थे।

उनका काम चढ़ाई का रास्ता तैयार करना, रस्सियां लगाना और बेस कैंप तैयार करना था। हिमस्खलन के बाद 12 लोग लापता हो गए।

हिमलुंग हिमाल पर चल रहे रेस्क्यू का वीडियो।

हिमलुंग हिमाल पर चल रहे रेस्क्यू का वीडियो।

ऊंचे पहाड़ों की चढ़ाई के लिए हिमलुंग में ट्रेनिंग लेते हैं पर्वतारोही

हिमलुंग हिमाल 7,126 मीटर ऊंचा है और तिब्बत सीमा के पास स्थित है। यह इलाका काफी दूरदराज है, इसलिए यहां पहुंचना आसान नहीं है।

एवरेस्ट और मनास्लू जैसी 8,000 मीटर से ऊंची चोटियों पर चढ़ने वाले पर्वतारोही यहां आकर कम ऑक्सीजन और ज्यादा ऊंचाई में अपने शरीर को ढालने की तैयारी करते हैं।

हिमलुंग पर चढ़ाई कुछ दूसरी बड़ी चोटियों के मुकाबले कम मुश्किल मानी जाती है। फिर भी यहां पर्वतारोहियों को बर्फीली ढलानों पर फिक्स्ड रोप, जुमार और क्रैम्पॉन के साथ चढ़ने का अच्छा अभ्यास मिलता है।

यानी बड़ी और ज्यादा ऊंची चोटियों पर जाने से पहले यहां चढ़ाई के जरूरी तरीकों को आजमाने का मौका मिलता है।

हिमलुंग पर चढ़ाई के लिए आमतौर पर अप्रैल-मई और सितंबर-नवंबर का समय बेहतर माना जाता है।

हिमलुंग पर चढ़ाई के लिए आमतौर पर अप्रैल-मई और सितंबर-नवंबर का समय बेहतर माना जाता है।

बेस कैंप से शिखर तक 3 पड़ाव

हिमलुंग का बेस कैंप करीब 4,900 मीटर की ऊंचाई पर होता है। इसके बाद शिखर तक पहुंचने के लिए आमतौर पर तीन कैंप बनाए जाते हैं।

कैंप 1: करीब 5,450 मीटर

कैंप 2: करीब 6,000 मीटर

कैंप 3: करीब 6,350 मीटर

कैंप 3 के बाद पर्वतारोही शिखर की अंतिम चढ़ाई शुरू करते हैं।

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