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नई दिल्ली/एवियन42 मिनट पहले
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए मंगलवार को फ्रांस के एवियन पहुंचे। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि वह वैश्विक नेताओं के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार को पीएम मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात हो सकती है। अगर यह बैठक होती है तो दोनों नेता करीब 16 महीने बाद आमने-सामने होंगे। इससे पहले दोनों की आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई थी।
मोदी और ट्रम्प के बीच भारत-अमेरिका ट्रेड डील, टैरिफ, निवेश और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से प्रस्तावित व्यापार समझौते पर भी बातचीत होने की संभावना है।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को 52वें G7 शिखर सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन किया। समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी समेत कई वैश्विक नेता शामिल हो रहे हैं।

यह फोटो 13 फरवरी 2025 की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में मुलाकात की थी।
G7 समिट में 12 देशों के नेता हिस्ला ले रहे
G7 समिट में इसके सदस्य देशों कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका के नेता शामिल होंगे। इसके अलावा यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि भी इसमें भाग लेंगे।
फ्रांस ने समिट में G7 देशों के अलावा कई अन्य देशों के नेताओं को भी सम्मेलन में आमंत्रित किया है। इनमें शामिल हैं:
- भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी
- ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा
- दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यंग
- केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो
G7 समिट से जुड़ी 5 तस्वीरें…

G7 समिट के दौरान (दाएं से) EU चीफ उर्सला लेयेन, जापानी पीए ताकाइची, इटली पीएम मेलोनी, कनाडाई पीएम कार्नी, फ्रेंच पीएम मैक्रों, ब्रिटिश पीएम स्टार्मर, जर्मन चांसलर मर्त्ज और EU काउंसिल के चीफ एंटोनियो कोस्टा।

फ्रांस पहुंचने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय बैठक में मुलाकात की।

ट्रम्प ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिगिट को लेकर अप्रैल में तंज कसा था। ट्रम्प ने कहा था कि मैक्रों अपनी पत्नी द्वारा मारे गए थप्पड़ से उबर रहे हैं।

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजिट के साथ।

G7 समिट के दौरान फ्रेंच प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी का अभिवादन करते हुए।
G7 क्या है, इसमें कौन-कौन से देश हैं?
G7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’, दुनिया के उन 7 देशों का समूह है, जिन्हें दुनिया की ‘मॉडर्न इकोनॉमी’ वाला देश कहा जाता है। इनमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी शामिल हैं।
इसकी शुरुआत 1975 में G6 के रूप में हुई थी। 1976 में कनाडा के जुड़ने के बाद यह G7 बन गया। 1998 में रूस को शामिल कर इसका नाम G8 कर दिया गया, लेकिन 2014 में यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र पर रूस के कब्जे के बाद उसे समूह से बाहर कर दिया गया। इसके बाद यह फिर से G7 कहलाने लगा।

भारत G7 में गेस्ट नेशन, पीएम 7वीं बार शामिल होंगे
भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था और महत्वपूर्ण वैश्विक भूमिका के कारण उसे अक्सर विशेष आमंत्रित देश (गेस्ट नेशन) के रूप में बुलाया जाता है। आमतौर पर भारत के प्रधानमंत्री को समिट का न्यौता मिलता है।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2005 से 2013 के बीच पांच बार G7 (पहले G8) समिट में हिस्सा लिया था। PM मोदी को पहली बार 2019 में फ्रांस के बियारिट्ज में आयोजित G7 समिट में आमंत्रित किया गया था।
2020 में अमेरिका को मेजबानी करनी थी, लेकिन उसने तब समिट रद्द कर दी। इसके बाद 2021 में ब्रिटेन की मेजबानी में आयोजित सम्मेलन में PM मोदी वर्चुअली शामिल हुए। इसके अलावा मोदी 2022 में जर्मनी, 2023 में जापान, 2024 में इटली और 2025 में कनाडा में आयोजित G7 समिट में शामिल हुए।
G7 समिट क्या है, इस बार इसके एजेंडे की खास बात क्या है?
एक तय एजेंडे पर बातचीत के लिए हर साल G7 समिट होती है, जिसका आयोजन G7 का अध्यक्ष देश करता है। दरअसल, G7 के सभी 7 देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता करते हैं।
इस साल फ्रांस अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे में G7 समिट फ्रांस के एवियां शहर में होगी। इस समिट के एजेंडे में जियोपॉलिटिक्स क्राइसेस (यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा, लेबनान और होर्मुज रूट की स्थिति, मध्य पूर्व की सुरक्षा चुनौतियां), वैश्विक आर्थिक सहयोग और असंतुलन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मुद्दे शामिल हैं।
इसके अलावा G7 के सदस्य देशों के लीडर्स और ऑफिसर्स साल में कई बैठकें करते हैं, जिनमें कई समझौते होते हैं और दुनिया की बड़ी घटनाओं पर आधिकारिक बयान जारी किए जाते हैं।
शुरुआत में G7 का एजेंडा आर्थिक चुनौतियों और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों का हल निकालना था। बाद में राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी इसमें शामिल हो गए। वैश्विक मुद्दों पर G7 के फैसलों का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।
उदाहरण के लिए G7 ने 2002 में मलेरिया और एड्स से लड़ने के लिए ग्लोबल फंड बनाया। 1998 में वित्तीय संकट के दौरान इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों को आर्थिक मदद की। रूस-यूक्रेन जंग के दौरान रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने और यूक्रेन की मदद करने का फैसला किया।

G20 से कैसे अलग है G7
G7 का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है और इसके सदस्य देश कोई अंतरराष्ट्रीय कानून पारित नहीं कर सकते। G20 में सबसे बड़ा मुद्दा वर्ल्ड इकोनॉमी होता है, जबकि G7 के लिए राजनीतिक मुद्दे भी अहम होते हैं। 1999 में बने G20 में G7 के देशों के अलावा BRICS के देश भी शामिल हैं।
इन देशों में भारत के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चीन, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, तुर्किये और यूरोपीय संघ शामिल हैं। राजन कुमार के मुताबिक G20 में नई और बढ़ती हुई इकोनॉमी वाले देशों को भी शामिल किया गया है।
भले ही G7 और G20 का एजेंडा एक जैसा हो, लेकिन इस समय G20 ज्यादा प्रभावी गुट है। 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी G7 को बहुत आउटडेटेड ग्रुप कहा था।
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