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शेख हसीना 11 जनवरी 2024 को पांचवीं बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद संबोधित करतीं हुईं। - Dainik Bhaskar


नई दिल्ली16 मिनट पहले

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शेख हसीना 11 जनवरी 2024 को पांचवीं बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद संबोधित करतीं हुईं।

भारत सरकार ने कहा है कि 5 अगस्त को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के ऑनलाइन संबोधन से उसका कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा,

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यह कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था आयोजित कर रही है। भारत सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। इस मंच पर रखे जाने वाले किसी भी विचार का सरकार समर्थन भी नहीं करती।

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दरअसल, शेख हसीना ने ऐलान किया है कि वह 5 अगस्त को नई दिल्ली स्थित ‘फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA)’ के कार्यक्रम में वीडियो लिंक के जरिए शामिल होंगी। अगस्त 2024 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद यह पहली बार होगा, जब वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आएंगी।

बांग्लादेश ने भारत से भाषण रोकने की अपील की थी

फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA) नई दिल्ली स्थित पत्रकारों का एक पेशेवर संगठन है। इसकी स्थापना 1958 में हुई थी। शेख हसीना इसी संगठन के कार्यक्रम में वीडियो लिंक के जरिए शामिल होंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कार्यक्रम शाम 6 बजे से 7:30 बजे तक चलेगा।

बांग्लादेश ने कल सोमवार को भारत से अपील की थी कि शेख हसीना या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े किसी भी व्यक्ति को भारत की जमीन से राजनीतिक भाषण देने या ऐसी गतिविधियां करने की अनुमति न दी जाए, जिससे बांग्लादेश में अस्थिरता फैल सकती हो।

ढाका का कहना है कि अगर किसी भगोड़े नेता को भारत की जमीन से राजनीतिक गतिविधियां करने की अनुमति दी गई, तो इससे दोनों देशों के सुधरते रिश्तों पर असर पड़ सकता है।

यह मुद्दा सोमवार को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर और ढाका में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी की मुलाकात के दौरान भी उठाया गया था।

शेख हसीना ने 5 अगस्त का दिन ही क्यों चुना

5 अगस्त 2024 को ही छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था। प्रदर्शनकारी उनके सरकारी आवास तक पहुंच गए थे। इसके बाद वह इस्तीफा देकर सेना के विमान से भारत आ गई थीं।

यानी जिस दिन उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी, उसी दिन वह दो साल बाद फिर लोगों के सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि वह इसी दिन अपनी राजनीतिक वापसी का मैसेज देना चाहती हैं।

हसीना के साथ उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय और अवामी लीग के दूसरे नेता भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। उम्मीद है कि हसीना बताएंगी कि वह बांग्लादेश कब लौटेंगी।

हाल ही में उन्होंने कहा था कि वह दिसंबर में वापस जाकर अदालत के सामने पेश होंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें पता है कि लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनकी जान को खतरा हो सकता है।

अगले महीने भारत आएंगे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री

हसीना अगस्त 2024 से भारत में रह रही हैं। बांग्लादेश कई बार उनका प्रत्यर्पण मांग चुका है। अब उनकी यह सार्वजनिक मौजूदगी ऐसे समय हो रही है, जब सितंबर में BRICS सम्मेलन के लिए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान के भारत आने की संभावना है। ऐसे में ढाका नहीं चाहता कि भारत की जमीन से हसीना राजनीतिक मैसेज दें।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान को भारत आने का न्योता दिया है।

उन्होंने बताया कि सितंबर की शुरुआत में नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन में भी तारीक रहमान को बुलाया गया है।

बांग्लादेश इस समय बिम्सटेक (BIMSTEC) का अध्यक्ष है, इसलिए उन्हें सम्मेलन के आउटरीच सत्र में आमंत्रित किया गया है।

तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार भारत की यात्रा करेंगे। 12-13 सितंबर को ब्रिक्स समिट का आयोजन होना है।

तारिक रहमान प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार भारत की यात्रा करेंगे। 12-13 सितंबर को ब्रिक्स समिट का आयोजन होना है।

राजनीतिक शरण क्या है, भारत में इसके क्या नियम हैं

  • अगर किसी व्यक्ति को अपने देश में जान का खतरा हो, राजनीतिक प्रताड़ना हो या युद्ध की वजह से वहां रहना मुश्किल हो जाए, तो वह किसी दूसरे देश में शरण मांग सकता है। इसे राजनीतिक शरण कहते हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, किसी देश को शरण देना जरूरी नहीं है। यह उस देश का अपना फैसला होता है। लेकिन एक नियम यह जरूर कहता है कि अगर किसी व्यक्ति की जान को खतरा है, तो उसे जबरन वापस नहीं भेजा जाना चाहिए। इसे नॉन-रिफॉलमेंट का सिद्धांत कहा जाता है।
  • भारत ने शरणार्थियों के लिए बने संयुक्त राष्ट्र के 1951 कन्वेंशन और 1967 प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। भारत में शरणार्थियों के लिए कोई अलग कानून भी नहीं है। यही वजह है कि सरकार हर मामले में अलग-अलग फैसला लेती है। फैसला इस आधार पर होता है कि देश की सुरक्षा, विदेश नीति और मानवीय पहलू क्या कहते हैं।
  • भारत सरकार ने कभी आधिकारिक तौर पर यह नहीं कहा कि शेख हसीना को राजनीतिक शरण दी गई है। हालांकि अगस्त 2024 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद से वह भारत में रह रही हैं। भारत ने उनकी मौजूदगी को मानवीय आधार पर स्वीकार किया है। उनके मामले में भारत ने कोई अलग कानून लागू नहीं किया, क्योंकि देश में शरणार्थियों के लिए कोई विशेष कानून नहीं है।

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