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नई दिल्ली3 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वोटर लिस्ट से बाहर किए गए लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। इसमें मांग की गई है कि जिन लोगों के नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कट गए हैं उनको योजनाओं का लाभ मिलना बंद नहीं होना चाहिए।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने इस मामले में चुनाव आयोग (EC) और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई से पहले हो सकती है।
याचिकाकर्ता प्रसेंजित बोस ने कहा है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हट जाता है, तो सिर्फ इसी वजह से उसका राशन, अन्नपूर्णा योजना और दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ बंद नहीं होना चाहिए। जब तक उसकी नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक उसके अधिकार सुरक्षित रहने चाहिए।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि नागरिकता से जुड़े करीब 34 लाख मामले अभी भी विशेष ट्रिब्यूनलों में लंबित हैं। अब तक केवल 38 हजार मामलों का ही निपटारा हुआ है। उन्होंने बताया कि इस समय सिर्फ 19 ट्रिब्यूनल काम कर रहे हैं और दो जज इस्तीफा दे चुके हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद कई लोगों को राशन, अन्नपूर्णा योजना, जाति प्रमाणपत्र के सत्यापन और दूसरी सरकारी सुविधाएं पाने में दिक्कत हो रही है, जबकि उनकी नागरिकता पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
याचिका में यह भी मांग की गई है कि विशेष ट्रिब्यूनलों का कामकाज ज्यादा पारदर्शी बनाया जाए। इसके लिए हर ट्रिब्यूनल की अपनी वेबसाइट हो, जहां उसकी कार्यप्रणाली (SOP) और सभी आदेश सार्वजनिक किए जाएं, ताकि लोगों को आसानी से जानकारी मिल सके।
याचिकाकर्ता ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति के पास वैध पासपोर्ट जैसे सरकारी दस्तावेज हैं, तो नागरिकता साबित करने के लिए उससे बार-बार दूसरे दस्तावेज नहीं मांगे जाने चाहिए।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि जब तक नागरिकता या वोटर लिस्ट से जुड़े मामले का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक किसी भी व्यक्ति का राशन, सामाजिक सुरक्षा और दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ बंद नहीं किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट बोला- नागरिकता तय करना EC का काम
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि चुनाव आयोग का काम सिर्फ वोटर लिस्ट तैयार करना और मतदान से जुड़े मामलों को देखना है। किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का अधिकार नहीं है। अगर नागरिकता पर विवाद हो, तो मामला संबंधित सरकारी प्राधिकरण के पास भेजा जाना चाहिए।













