Twisha Sharma Death Case; Giribala Samarth Singh – CBI SIT | ACTPnews

CBI ने बुधवार को समर्थ सिंह के साथ उसके घर पर सीन रिक्रिएट किया।


ट्विशा की 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी।

एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में SIT ने आरोपी पति समर्थ सिंह को बुधवार को भोपाल कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे 29 मई तक CBI रिमांड पर भेज दिया। सीबीआई की टीम समर्थ को लेकर उसके घर पहुंची। यहां सीन रिक्रिएशन किया गया।

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एमपी हाईकोर्ट में रिटायर्ड जज और सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला रिजर्व रख लिया है। साथ ही CBI को भी मामले में पक्षकार बनाया है।

12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स में ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है।

CBI ने बुधवार को समर्थ सिंह के साथ उसके घर पर सीन रिक्रिएट किया।

एजी बोले- जमानत की शर्तों का बर्बरता से उल्लंघन किया

सरकार की ओर से महाधिवक्ता (AG) प्रशांत सिंह ने कोर्ट से कहा- अदालत देख सकती है कि जमानत की शर्तों का कितनी बर्बरता से उल्लंघन किया गया। नोटिस जारी होने की तारीखें रिकॉर्ड में हैं। अदालत स्वयं उन्हें देख सकती है। तारीखों की सूची का हवाला दे रहा हूं। हम आरोपियों की तरह ट्रायल कोर्ट में अजीब सामग्री पेश नहीं कर रहे हैं।

AG ने यह भी कहा कि मैं केवल केस डायरी में मौजूद दस्तावेज को ही पढ़ रहा हूं, ताकि अदालत को सुविधा हो। इस पर आरोपी पक्ष के वकील ने आपत्ति जताते हुए कहा- हमने यह सामग्री नहीं देखी है। आपको हमें यह दिखाना होगा। जवाब में AG ने कहा, आप जांच में सहयोग करेंगे, तब हर सामग्री मिल जाएगी। यह सब केस डायरी का ही हिस्सा है।

सरकार की ओर से AG प्रशांत सिंह की 5 दलीलें

1.आरोपी ने जांच में सहयोग नहीं किया- दो बार नोटिस भेजे गए, लेकिन आरोपी पक्ष ने नोटिस लेने से भी इनकार कर दिया। बाद में व्हाट्सएप पर नोटिस भेजना पड़ा।

2. FIR के एक घंटे में मिल गई अग्रिम जमानत- ADG ने कहा कि इतनी गंभीर FIR दर्ज होने के सिर्फ एक घंटे के भीतर जमानत दे दी गई, जबकि जांच शुरुआती चरण में थी।

3. आरोपी का रवैया ‘लुका-छिपी’ जैसा- ADG बोले कि आरोपी जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुईं और लगातार बचने की कोशिश करती रहीं।

4. प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए समय, जांच के लिए नहीं- आरोपी सार्वजनिक मंचों पर सक्रिय रहीं, उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की, लेकिन जांच में सहयोग नहीं किया।

5. ट्रायल कोर्ट ने गंभीर आरोप नजरअंदाज किए- ट्रायल कोर्ट ने केस डायरी और अभियोजन की सामग्री को नजरअंदाज कर आरोपी पक्ष के दस्तावेजों पर ज्यादा भरोसा किया।

एसआईटी ने बुधवार को समर्थ सिंह को कोर्ट में पेश किया।

एसआईटी ने बुधवार को समर्थ सिंह को कोर्ट में पेश किया।

ट्विशा के पिता की ओर से वकील सिद्धार्थ लूथरा की 5 दलीलें

1. FIR दर्ज कराने में देरी हुई- पीड़ित परिवार लगातार FIR दर्ज कराने की कोशिश करता रहा, लेकिन मामला 15 मई को दर्ज हुआ।

2. इतनी जल्दी जमानत कैसे मिल गई- FIR दर्ज होने के तुरंत बाद आखिर ऐसी कौन-सी जांच हुई, जिससे अदालत ने मान लिया कि कस्टोडियल पूछताछ की जरूरत नहीं है।

3. आरोपी घटना वाले घर में ही रहे- 12 मई से 15 मई तक आरोपी उसी घर में रहे, जहां घटना हुई थी। CBI जांच शुरू होने तक भी वे वहीं मौजूद थे।

4. सिर्फ उम्र जमानत का आधार नहीं- सिर्फ 63 साल उम्र होना जमानत का आधार नहीं हो सकता। हर सास लगभग इसी उम्र की होती है।”

5. आरोपी प्रभावशाली और सिस्टम समझने वाले लोग हैं- सास गिरिबाला सिंह रिटायर्ड जज हैं और दूसरा आरोपी वकील है। ऐसे लोग क्राइम सीन और फॉरेंसिक प्रक्रिया को अच्छी तरह समझते हैं।

सीबीआई की टीम बुधवार को समर्थ को लेकर उसके घर पहुंची।

सीबीआई की टीम बुधवार को समर्थ को लेकर उसके घर पहुंची।

गिरिबाला सिंह की तरफ से वरिष्ठ वकील नित्या की 5 दलीलें

1. चैट्स में कोई सीधा आरोप नहीं- ट्विशा की WhatsApp चैट्स में कहीं भी सास गिरिबाला सिंह पर दहेज मांगने, प्रताड़ना या क्रूरता का आरोप नहीं है। चैट्स में ज्यादातर शिकायतें पति के खिलाफ हैं।

2. FIR में आरोप लगना ही सबूत नहीं होता- नित्या ने कहा कि दहेज मृत्यु के मामलों में सिर्फ FIR में आरोप लग जाने से मामला साबित नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि अभियोजन सिर्फ चैट्स के कुछ हिस्सों को अपने हिसाब से पेश कर रहा है।

3. अग्रिम जमानत लेना गलत नहीं- FIR से पहले अग्रिम जमानत याचिका लगाना कोई अपराध नहीं है। अपनी आजादी की सुरक्षा मांगना गलत नहीं हो सकता।

4. जांच में पूरा सहयोग किया- घर सील होने के बाद भी गिरिबाला सिंह ने जांच एजेंसियों का सहयोग किया। CBI जब घर पहुंची तब भी परिवार ने पूरा साथ दिया। “जांच से बचने” की बात गलत है।

5. 63 साल की महिला को बेवजह निशाना बनाया जा रहा- गिरिबाला सिंह 63 साल की महिला हैं, भोपाल में स्थायी रूप से रहती हैं और फरार होने का कोई खतरा नहीं है। इसलिए उन्हें जेल भेजना सही नहीं होगा।

जांच अब सीडीआर, मोबाइल लोकेशन जैसे डिजिटल सबूतों पर केंद्रित

मामले की जांच अब डिजिटल सबूतों पर केंद्रित है। मंगलवार को पुलिस ने भोपाल कोर्ट को बताया कि घटना से जुड़े मोबाइल नंबरों की CDR और टावर लोकेशन सुरक्षित रखने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को पत्र भेजे गए हैं।

यह जवाब ट्विशा के परिजन के आवेदन पर पेश किया गया। आवेदन में दावा किया गया है कि मौत के बाद गिरिबाला सिंह ने 46 नंबरों पर कॉल किए थे। इनमें कुछ नंबर न्यायिक अधिकारियों और जांच एजेंसियों से जुड़े लोगों के भी थे।

12 मई को ट्विशा शर्मा का शव फंदे पर लटका मिला था। 15 मई को गिरिबाला सिंह ने भोपाल कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। 22 मई को उनके बेटे समर्थ सिंह को जबलपुर कोर्ट से गिरफ्तार किया गया था।

सीबीआई की टीम ने लिए गिरिबाला के बयान

CBI ने मंगलवार (26 मई) को गिरिबाला सिंह का बयान लिया। इसके बाद टीम ने 3 EME सेंटर जाकर ट्विशा के परिजन से जानकारी जुटाई। CBI की दूसरी टीम ने पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से केस की जानकारी मांगी। जांच एजेंसी ने SIT से केस डायरी भी तलब की। प्रारंभिक जांच में डायरी अधूरी पाए जाने पर CBI ने उसे पूरा कर सौंपने के निर्देश दिए। मंगलवार देर रात SIT ने जरूरी जानकारी जोड़कर केस डायरी CBI को सौंप दी।

SIT ने बताया- CDR सुरक्षित रखने के लिए कंपनियों को लिखा

कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और CCTV फुटेज सुरक्षित रखने को लेकर भोपाल जिला कोर्ट में दायर आवेदनों पर मंगलवार को सुनवाई हुई। SIT ने कोर्ट में बताया कि 12 से 20 मई तक की पूरी CDR सुरक्षित रखने के लिए संबंधित सिम कंपनियों को पत्र भेज दिए गए हैं। कंपनियों से जानकारी मिलते ही उसे केस डायरी का हिस्सा बनाकर कोर्ट में पेश किया जाएगा।

दरअसल, ट्विशा के परिवार की ओर से वकील अंकुर पांडे ने CDR सुरक्षित रखने के लिए आवेदन दिया था।

समर्थ बोला- ट्विशा से रिश्ता तनावपूर्ण

पूछताछ में समर्थ ने कहा कि उसका और ट्विशा का रिश्ता तनावपूर्ण था, लेकिन उसने किसी भी तरह की शारीरिक हिंसा से इनकार किया। उसने माना कि दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते थे, लेकिन दावा किया कि यह वैवाहिक तनाव का हिस्सा था, हिंसा नहीं।

समर्थ के मुताबिक, मार्च तक उनकी शादी सामान्य थी, लेकिन ट्विशा के भाई की शादी के बाद तनाव बढ़ने लगा। जांचकर्ताओं ने समर्थ से पूछा कि ट्विशा से उसकी पहली मुलाकात कैसे हुई, शादी से पहले दोनों कितने समय तक दोस्त रहे और शादी के पांच महीने के भीतर क्या बदल गया।

समर्थ ने बताया- ट्विशा को बाइपोलर डिसऑर्डर था

ट्विशा के वॉट्सएप मैसेज से पता चला है कि समर्थ ने उनकी गर्भावस्था पर सवाल उठाए थे। बच्चे के पितृत्व पर भी संदेह जताया था। यह समर्थ के उस दावे के विपरीत है, जिसमें उसने कहा कि वह और उसकी मां बच्चा चाहते थे, जबकि गर्भधारण के बाद से ट्विशा मानसिक तनाव में थीं। समर्थ ने पुलिस को बताया-

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मैं और मेरी मां बच्चा चाहते थे, लेकिन गर्भ ठहरने के बाद से ही ट्विशा तनाव में रहने लगी थीं।

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ट्विशा के परिवार का आरोप है कि गर्भावस्था से जुड़े विवाद के बाद ही उनका मानसिक इलाज और दवाएं शुरू हुईं। इस दौरान ट्विशा का वजन लगभग 15 किलो कम हो गया था। पूछताछ का एक बड़ा हिस्सा ट्विशा की मानसिक स्थिति को लेकर रहा।

पुलिस ने समर्थ से पूछा कि क्या ट्विशा के परिवार को इस कथित मानसिक उपचार की जानकारी दी गई थी, इलाज कब शुरू हुआ और शादी के कुछ महीनों के भीतर उन्हें मनोचिकित्सक के पास ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी।

समर्थ ने कहा कि ट्विशा को दी जाने वाली नींद की गोलियां डॉक्टर की सलाह पर तनाव कम करने के लिए दी जाती थीं। अब CBI जांच करेगी कि यह इलाज चिकित्सकीय रूप से कितना उचित था, क्या ट्विशा की सहमति ली गई थी और क्या उनके परिवार को इससे अनजान रखा गया था।

चीफ जस्टिस ने कहा- निष्पक्षता पर सवाल उठने से दुखी हैं

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 25 मई को खुद नोटिस लेकर सुनवाई की थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि मीडिया पीड़ित या दूसरे परिवार के बयानों के पीछे न भागे और मामले को कानून के मुताबिक आगे बढ़ने दिया जाए। “हम न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठने से दुखी हैं।”

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोप लगाया था कि ट्विशा की सास और पूर्व जज गिरिबाला सिंह जांच में बाधा डाल रही हैं।

कोर्ट ने गिरिबाला सिंह के वकील को जवाब देने के लिए दो दिन का समय दिया था। सुनवाई में महाधिवक्ता ने कहा था कि गिरिबाला जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं। गिरिबाला के वकील मृगेंद्र सिंह ने कहा कि पिटीशन के दस्तावेज नहीं मिलने से जवाब दाखिल नहीं किया जा सका। ट्विशा के परिवार के वकील पीयूष तिवारी ने कहा था कि कोर्ट ने जवाब पेश करने के लिए समय दिया है।

25 मई को सुनवाई के दौरान कहा था।

25 मई को सुनवाई के दौरान कहा था।

मौत के 12 दिन बाद दोबारा हुआ पोस्टमॉर्टम

24 मई को भोपाल AIIMS में दिल्ली AIIMS की टीम ने ट्विशा की डेड बॉडी का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद शाम को मौत के 12 दिन बाद भदभदा श्मशान घाट में ट्विशा का अंतिम संस्कार किया गया। भाई मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी।

12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स में ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है।

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