फिल्म 3 इडियट्स को रिलीज हुए 15 साल से ज्यादा समय हो चुका है। इस दौरान एक दावा लगातार दोहराया जाता रहा कि फिल्म का फेमस किरदार रैंचो उर्फ फुंसुख वांगडू शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक से प्रेरित था। यह बात अब इतनी बार कही जा चुकी है कि कई लोग इसे तथ्य मानने लगे हैं। हालांकि, उपलब्ध रिकॉर्ड और फिल्म से जुड़े लोगों के बयानों को देखने पर इस दावे को लेकर कई सवाल सामने आते हैं। रैंचो और सोनम वांगचुक में क्या हैं समानताएं? पहली नजर में दोनों के बीच कुछ समानताएं दिखाई देती हैं। दोनों इंजीनियर हैं, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं, स्कूल चलाते हैं और लद्दाख से उनका संबंध है। फिल्म में रैंचो की असली पहचान फुंसुख वांगडू के रूप में दिखाई गई है, जिसका नाम भी सोनम वांगचुक से मिलता-जुलता लगता है। हालांकि, कहानी के मुख्य हिस्से में रैंचो का जीवन पूरी तरह अलग नजर आता है। फिल्म में वह एक अमीर परिवार के बेटे की पहचान अपनाकर इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई करता है। उसकी कहानी दोस्ती, पढ़ाई, परीक्षा, हॉस्टल जीवन और शिक्षा व्यवस्था के विरोध के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म के अंत में वह लद्दाख में एक स्कूल चलाते हुए दिखता है। यही हिस्सा सोनम वांगचुक से तुलना की सबसे बड़ी वजह माना जाता है। टाइमलाइन पर उठते हैं सवाल जांच से पता चला कि 3 इडियट्स की स्क्रिप्ट 1 अगस्त 2007 को स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन के साथ रजिस्टर हुई थी। मौजूद जानकारी से पता चलता है कि आमिर खान और सोनम वांगचुक पहली बार अप्रैल 2008 में सार्वजनिक रूप से मिले थे। अगर स्क्रिप्ट पहले से ही पूरी थी, तो यह सवाल उठता है कि क्या 2008 की मुलाकात से पहले लिखी गई कहानी बाद की किसी घटना से इंस्पायर्ड हो सकती है। लेखकों ने क्या कहा था? फिल्म के लेखक अभिजात जोशी और डायरेक्टर-को-राइटर राजकुमार हिरानी कई इंटरव्यू में कह चुके हैं कि रैंचो के किरदार की सोच एक अलग घटना से प्रेरित थी। उनके मुताबिक, फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) के एक छात्र की कहानी ने उन्हें प्रभावित किया था। बताया गया कि वह छात्र डिग्री के लिए नहीं, बल्कि सीखने के उद्देश्य से दूसरे छात्र की पहचान अपनाकर संस्थान पहुंचा था। लेखकों ने यह भी कहा है कि उनकी सोनम वांगचुक से कभी मुलाकात नहीं हुई। आमिर खान भी लगातार यह कहते रहे हैं कि रैंचो का किरदार सोनम वांगचुक के जीवन पर आधारित नहीं था। फिल्म के प्रचार में नहीं किया गया था ऐसा दावा फिल्म के 2009 के प्रमोशनल कैंपेन, ट्रेलर, प्रेस कॉन्फ्रेंस और इंटरव्यू में कहीं भी रैंचो को सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं बताया गया। यदि ऐसा दावा फिल्म के प्रमोशन का हिस्सा होता, तो उसके स्पष्ट रिकॉर्ड मिलने चाहिए थे। उपलब्ध सार्वजनिक सामग्री में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिलता। फिर यह धारणा बनी कैसे? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2010 में कुछ खबरों में लद्दाख के लोगों द्वारा रैंचो और सोनम वांगचुक के बीच समानता की चर्चा सामने आई। शुरुआती रिपोर्ट्स में इसे केवल एक संभावना बताया गया था। बाद के वर्षों में कई प्रकाशनों ने सोनम वांगचुक को सीधे रियल लाइफ रैंचो कहना शुरू कर दिया। समय के साथ यह तुलना कई खबरों, सोशल मीडिया पोस्ट और चर्चाओं में दोहराई जाती रही। इसी कारण यह धारणा धीरे-धीरे व्यापक रूप से स्वीकार की जाने लगी। अब भी कई सवाल बाकी अब भी कुछ सवालों के स्पष्ट जवाब सामने नहीं आए हैं। क्या फिल्म लिखे जाने से पहले निर्माता या लेखक सोनम वांगचुक से मिले थे? क्या उन्होंने उनके स्कूल का दौरा किया था? क्या 2009 में फिल्म के किसी आधिकारिक प्रचार में रैंचो को सोनम वांगचुक से प्रेरित बताया गया था? फिलहाल, उपलब्ध रिकॉर्ड यही दिखाते हैं कि रैंचो और सोनम वांगचुक के बीच तुलना समय के साथ लोकप्रिय हुई, लेकिन इसे ऐतिहासिक तथ्य मानने के लिए स्वतंत्र और ठोस प्रमाण जरूरी हैं।
Source link
'रैंचो' का किरदार सोनम वांगचुक से प्रेरित नहीं:डायरेक्टर राजकुमार हिरानी ने बताया था- FTII के छात्र से मिली थी प्रेरणा | ACTPnews

Previous Post
Next Post
Leave a Reply
Latest News
Search the Archives
Access over the years of investigative journalism and breaking reports












