रिलेटेबल चेहरा, दमदार अदाकारी और लगातार मेहनत के दम पर हरलीन सेठी ने अपने हर किरदार से अलग पहचान बनाई है। ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’, ‘कोहरा’, ‘बैड कॉप’ और ‘डॉक्टर्स’ जैसे प्रोजेक्ट्स के बाद अब वह ‘शक’ में नजर आ रही हैं। अपने किरदारों से हरलीन ने साबित किया है कि वह खुद को सिर्फ नायिका की पारंपरिक छवि तक सीमित नहीं रखना चाहतीं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में हरलीन ने अपने बचपन, अभिनय की शुरुआत, ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ की सफलता और रिजेक्शन के अनुभवों पर बात की। उन्होंने सह-कलाकारों और ‘शक’ में श्रेया के किरदार की तैयारी से जुड़े अनुभव भी साझा किए। सवाल: बचपन में कैसी थीं? अभिनय का ख्याल कब आया? जवाब: मैं बचपन से ही बहुत मस्तमौला थी। खेल-कूद और दूसरी गतिविधियों में काफी रुचि थी। हालांकि, अभिनय करने का कोई प्लान नहीं था। मुझे सिर्फ इतना पता था कि परफॉर्मिंग आर्ट्स में कुछ करना है। मुझे संगीत में भी बहुत रुचि थी। याद है, बचपन में ‘कल हो न हो’ की कैसेट आई थी। मैंने उसे पूरे दिन बजाया था। मेरे दादा ने मजाक में कहा था कि जब तक सारे गाने याद नहीं हो जाएंगे, तब तक हमें यही सुनाती रहोगी। फिर संगीत से डांस और डांस से धीरे-धीरे अभिनय की तरफ आ गई। सवाल: क्या आप पढ़ाई में भी आप काफी अच्छी थीं? जवाब: हां। मैंने विज्ञापन में पढ़ाई की और पूरे मुंबई में टॉप-5 में थी। उस समय टीचर और आसपास के लोग चाहते थे कि मैं पढ़ाई के क्षेत्र में आगे बढ़ूं। लेकिन मेरा मन वहां पूरी तरह नहीं था। मैंने विज्ञापन एजेंसी में काम करने के बारे में सोचा। विज्ञापनों में असिस्टेंट डायरेक्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर भी काम किया। दरअसल, मैं लगातार तलाश रही थी कि परफॉर्मिंग आर्ट्स में आखिर मुझे करना क्या है। सवाल: वह कौन सा पल था, जब लगा कि अभिनय ही करना है? जवाब: कोई एक पल तो याद नहीं, लेकिन जब मैंने अपना पहला विज्ञापन किया, तब आधे दिन के काम के लिए मुझे 17 हजार रुपए मिले थे। मैंने सोचा कि मैंने ऐसा क्या काम किया? बस मुस्कुराई और विज्ञापन किया। उस समय मेरे लिए यह बहुत बड़ी बात थी। उसके बाद धीरे-धीरे विश्वास बढ़ता गया। मैंने कई बड़े ब्रांड्स के विज्ञापन किए। लेकिन असली आत्मविश्वास वेब सीरीज ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ से आया। सवाल: ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ आपके लिए कितना बड़ा मोड़ था? जवाब: यह मेरे लिए बहुत बड़ा मोड़ था। लोगों ने समीरा के किरदार से बहुत जुड़ाव महसूस किया। पहली बार मैंने लोगों को अपनी खूबसूरती और आवाज की तारीफ करते सुना। मैंने कभी खुद को उस नजर से नहीं देखा था। मुझे लगता था कि मैं खूबसूरत नहीं हूं, क्योंकि मेरी मां बहुत खूबसूरत हैं और मेरा भाई भी उन पर गया है। ‘ब्रोकन’ के बाद पहली बार मुझे लगा कि शायद मैं भी खूबसूरत हूं। यह मेरे लिए सिर्फ अभिनय की सफलता नहीं थी, बल्कि खुद को स्वीकार करने की यात्रा भी थी। सवाल: क्या आपको लगा था कि ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ इतना बड़ा बनेगा? जवाब: बिल्कुल नहीं। हमने बहुत सच्चाई और प्यार से इसे बनाया था, लेकिन यह कल्ट बन जाएगा, इसकी कल्पना नहीं की थी। आज भी रोमांटिक सीरीज की बात होती है तो ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ का जिक्र होता है। शो दोबारा ट्रेंड हुआ, लोगों ने इसके किरदारों और संगीत को फिर से पसंद किया। मुझे उन लड़कियों की तस्वीरें मिलीं, जिन्होंने समीरा वाला टैटू तक बनवाया था। कई लोगों ने लिखा कि समीरा के किरदार ने उन्हें खुद से प्यार करना सिखाया। यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। सवाल: ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ में विक्रांत मैसी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: बहुत अच्छा। जब आप करियर की शुरुआत कर रहे होते हैं, तब सामने वाला आपको छोटा महसूस न कराए, यह बहुत जरूरी होता है। विक्रांत ने कभी मुझे ऐसा महसूस नहीं कराया कि वह मुझसे ज्यादा अनुभवी हैं। उन्होंने मेरी काफी मदद की और एक बार मेरी परफॉर्मेंस देखकर कहा था कि मैं उन्हें एक अनुभवी कलाकार जैसी लगी। मेरे लिए यह बहुत बड़ा कॉम्प्लिमेंट था। सवाल: ‘ब्रोकन’ के बाद आपने ‘कोहरा’ में मुख्य भूमिका के बजाय महत्वपूर्ण किरदार क्यों चुना? जवाब: मेरे लिए अच्छी कहानी और अच्छे फिल्ममेकर्स के साथ काम करना ज्यादा जरूरी था। ‘कोहरा’ के ऑडिशन के लिए जो सीन मुझे मिले, उन्हें पढ़कर ही लगा कि यह बहुत अच्छा प्रोजेक्ट है। सुदीप शर्मा सर के साथ काम करने का मौका भी मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण था। उन्होंने मुझसे कहा था, ‘हरलीन, बस मुझ पर भरोसा रखो और इसे करो।’ मैंने उन पर भरोसा किया और ‘कोहरा’ मेरे लिए एक बड़ा मोड़ बन गया। सवाल: ‘कोहरा’ और ‘ब्रोकन बट ब्यूटीफुल’ की सफलता में क्या अंतर महसूस हुआ? जवाब: ‘ब्रोकन’ को दर्शकों से बहुत प्यार मिला। ‘कोहरा’ को इंडस्ट्री के लोगों से भी बहुत सराहना मिली और दर्शकों ने भी इसे पसंद किया। इन दोनों तरह की स्वीकृति का मिलना बहुत खास होता है। बहुत कम प्रोजेक्ट्स ऐसे होते हैं जिन्हें दर्शक भी पसंद करें और इंडस्ट्री के लोग भी उतनी ही गंभीरता से लें। सवाल: ‘बैड कॉप’ में अनुराग कश्यप और गुलशन देवैया जैसे कलाकारों के साथ काम करना कैसा रहा? जवाब: बहुत मजेदार अनुभव था। गुलशन बहुत मजेदार और अलग तरह के इंसान हैं। उन्हें देखकर ही आपको मनोरंजन मिलता रहता है। अनुराग कश्यप हमेशा से मेरे पसंदीदा निर्देशकों में रहे हैं। उनके साथ एक ही प्रोजेक्ट में काम करना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। सौरभ सचदेवा, गुलशन, विक्रांत, शरद केलकर जैसे कलाकारों के बीच मैं अनुभव के मामले में सबसे जूनियर थी। इसलिए मेरी कोशिश रहती थी कि मैं मेहनत करके जाऊं और उनके सामने कम न लगूं। सवाल: अनुराग कश्यप के निर्देशन में काम करने की इच्छा भी है? जवाब: बिल्कुल। मैंने उनकी एक फिल्म के लिए ऑडिशन भी दिया था। बाद में किरदार बदल गया और उसमें एक अलग तरह के उच्चारण की जरूरत थी, इसलिए बात आगे नहीं बढ़ी। लेकिन उन्होंने मेरा ऑडिशन देखा था और खुद फोन करके मेरी तारीफ की थी। उम्मीद है, आगे उनके निर्देशन में काम करने का मौका मिले। सवाल: ‘शक’ के लिए हां कहने की सबसे बड़ी वजह क्या थी? जवाब: रेंसिल डिसिल्वा सर का फोन आया था। उन्होंने श्रेया के किरदार के बारे में बताया। मैं उस समय जुहू सर्कल के सिग्नल पर कार में थी। जैसे ही उन्होंने किरदार के बारे में बताया, मुझे लगा कि इसमें बहुत सारी परतें हैं। वह बचपन से नायिका की सबसे अच्छी दोस्त है, उसका नायिका के पति से रिश्ता है, बच्ची के गायब होने में भी उसका हाथ है और वह अपने पति से भी सच छिपा रही है। इतना जटिल किरदार सुनते ही मैंने कहा- सर, मैं यह करना चाहती हूं। सवाल: श्रेया जैसे किरदार में उतरने के लिए आपने क्या तैयारी की? जवाब: सबसे पहले मुझे अपने अंदर से उसके प्रति जजमेंट हटाना था। स्क्रिप्ट पढ़ते ही आप उसके कई फैसलों को गलत मान सकते हैं। लेकिन कलाकार के तौर पर आपको उस किरदार को समझना होता है। मैंने उसके बचपन से लेकर वर्तमान तक की पूरी जिंदगी के बारे में सोचा। अगर वह और उसकी दोस्त बचपन से साथ थीं, तो उनके रिश्ते में ऐसा क्या हुआ कि वह अपनी दोस्त के साथ ऐसा कर सकी? उसके मन में क्या था? पति के साथ उसका रिश्ता कैसे बना? इन सभी सवालों के जवाब मैंने अपनी नोटबुक में लिखे। मेरे लिए किरदार की तैयारी सिर्फ स्क्रिप्ट तक सीमित नहीं होती। मैं यह भी सोचती हूं कि कैमरे पर दिखाए जा रहे दृश्य से ठीक पहले किरदार की जिंदगी में क्या हुआ होगा। इससे किरदार को भीतर से समझने में मदद मिलती है। सवाल: इतने गंभीर किरदार के बाद क्या सेट का माहौल भी गंभीर रहता था? जवाब: नहीं। कैमरा शुरू होते ही हम किरदार बन जाते थे, लेकिन उससे पहले खूब मस्ती होती थी। ‘शक’ की शूटिंग पहाड़ों में हुई। एक दिन पूरी कास्ट ने साथ में पार्टी की। खुले आसमान के नीचे संगीत था और सभी कलाकार साथ बैठे थे। शूटिंग के दौरान हम खाली समय में ट्रैकिंग और साइकिलिंग के लिए भी जाते थे। यही चीजें कलाकारों को एक-दूसरे के करीब लाती हैं और काम के दौरान केमिस्ट्री भी बेहतर होती है। सवाल: ‘शक’ के लिए मिला सबसे अच्छा कॉम्प्लिमेंट क्या रहा? जवाब: लोगों ने मेरी परफॉर्मेंस की तारीफ तो की ही, लेकिन मेरे लिए यह भी खास था कि लोगों ने कहा कि मैं स्क्रीन पर बहुत खूबसूरत लग रही हूं। मैंने आपको बताया कि मैंने कभी खुद को उस तरह नहीं देखा था, इसलिए यह बात मेरे लिए मायने रखती है। इसके अलावा मेरा और सुमित व्यास का जेल वाला एक सीन है, जिसे बहुत प्यार मिल रहा है। मेरे डीएम उस सीन की तारीफ से भरे हुए हैं। सवाल: आप किस तरह के किरदार करना चाहती हैं? जवाब: मेरी कोशिश रहती है कि ऐसे किरदार करूं, जिन्हें लोग अक्सर समझ नहीं पाते। मैं उन्हें सहानुभूति के साथ निभाना चाहती हूं। चाहे समीरा हो, ‘कोहरा’ की निमरत हो या ‘शक’ की श्रेया- इन सभी किरदारों में एक बारीक रेखा है। मुझे ऐसे किरदारों को समझना और निभाना पसंद है। सवाल: आगे क्या करने वाली हैं? जवाब: मैंने एक बहुत अच्छी सीरीज साइन की है। उसकी शूटिंग अक्टूबर-नवंबर में होगी। किरदार भी बहुत अच्छा है और कलाकार भी शानदार हैं। अभी मैं उसके बारे में ज्यादा नहीं बता सकती। इसके अलावा एक थिएट्रिकल प्रोजेक्ट पर भी बातचीत चल रही है। अगर सब कुछ तय हो गया तो जनवरी में उसकी शूटिंग शुरू हो सकती है।
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खुद को खूबसूरत नहीं मानती थीं हरलीन सेठी:बोलीं- ‘ब्रोकन’ ने बदली जिंदगी; दर्शकों की तारीफों से आत्मविश्वास मिला, खुद से प्यार करना सीखा | ACTPnews

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