Justice Ujjwal Bhuiyan Statement | Voting Rights Arbitrary Process | ACTPnews

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नई दिल्ली31 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि लाखों भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी है। ऐसी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था को नकारती है। कोई भी बहाना इसे सही नहीं ठहरा सकता।

जस्टिस भुइयां हैदराबाद में NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। हालांकि, अपने भाषण में उन्होंने किसी खास प्रक्रिया या अथॉरिटी का नाम नहीं लिया।

जस्टिस भुइयां की स्पीच, 5 बड़ी बातें…

  • एक वर्ग वोट देने का अधिकार रखता हो और दूसरे वर्ग को इससे वंचित रखा जाए, भारत का संविधान नागरिकों के दो वर्ग नहीं बनाता।
  • भारतीय नागरिकों को बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का उल्लंघन होगी।
  • अगर कोई प्रक्रिया लाखों भारतीय नागरिकों को उनके ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बना देती है, तो ऐसी प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से मनमानी है।
  • ऐसी प्रक्रिया संविधान की बुनियाद पर चोट करती है। यह भारतीय संविधान के तहत अपनाई गई संवैधानिक व्यवस्था को नकारने के बराबर है।
  • कोई भी संस्था इससे मुक्त नहीं है। कोई भी प्राधिकरण ऐसा नहीं कर सकता, कोई भी अदालत इसे माफ नहीं कर सकती। कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है।



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